नौगढ़ के जंगलों में बिछा 'मौत का करंट', शिकारियों की जाल में झुलसा बुजुर्ग किसान, कब जागेगा प्रशासन ?
चंदौली के नौगढ़ में जंगली जानवरों के लिए बिछाए गए करंट की चपेट में आने से एक बुजुर्ग किसान बुरी तरह झुलस गया। ग्राम प्रधान की सूझबूझ से किसान की जान तो बच गई, लेकिन इस घटना ने वन विभाग की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नौगढ़ के जंगल में शिकारियों ने बिछाया मौत का जाल
करंट की चपेट में आने से बुजुर्ग किसान गंभीर रूप से झुलसा
संकटमोचक बने ग्राम प्रधान संजय यादव ने बचाई जान
रेंजर अमित श्रीवास्तव ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का दिया भरोसा
वन्यजीवों के साथ-साथ अब इंसानों की जान पर भी मंडराया खतरा
चंदौली जिले का तहसील नौगढ़ क्षेत्र, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जंगलों के लिए जाना जाता है, अब इंसानों के लिए 'डेथ ट्रैप' बनता जा रहा है। सोमवार सुबह नौगढ़ के जंगलों में जो हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जंगली जानवरों के अवैध शिकार के लिए बिछाया गया बिजली का नंगा तार अब इंसानों का खून चूसने लगा है।
खेत जाने की सजा: झाड़ियों में छिपा था मौत का तार
चकरघट्टा थाना क्षेत्र के बजरडीहा गांव के रहने वाले 60 वर्षीय बचाऊ, पुत्र रामजग, रोज की तरह सोमवार सुबह अपने खेत की ओर निकले थे। परसिया गांव के पास ओखरिहवा बंधी के पास जैसे ही वह एक नाले के किनारे पहुंचे, वहां शिकारियों द्वारा झाड़ियों में छिपाकर बिछाया गया करंट प्रवाहित तार उनके पैरों में उलझ गया। तेज करंट लगते ही बचाऊ हवा में उछलकर जमीन पर गिर पड़े और बेहोश हो गए। इस हादसे में उनकी पीठ और पैर बुरी तरह झुलस गए हैं।
प्रधान बने संकटमोचक, बचाई बुजुर्ग की जान
घटना के बाद जब वहां सन्नाटा पसरा था और कोई जिम्मेदार अधिकारी नजर नहीं आ रहा था, तब बजरडीहा के ग्राम प्रधान संजय यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायल किसान की हालत देख तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन किया और उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नौगढ़ पहुँचाया। प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रधान ने समय पर सक्रियता न दिखाई होती, तो आज एक बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
शिकारियों का आतंक और विभागीय लापरवाही
नौगढ़ के जंगलों में करंट बिछाकर शिकार करना अब एक संगठित अपराध बन चुका है। शिकारी बेखौफ होकर खेतों और नाले के किनारे नंगे तारों में हाई-वोल्टेज करंट प्रवाहित कर देते हैं। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि सीधे तौर पर गैर-इरादतन हत्या की कोशिश जैसा अपराध है। सवाल यह उठता है कि वन विभाग की गश्ती टीम को इतने बड़े पैमाने पर बिछाए जा रहे तारों की भनक क्यों नहीं लगती?
रेंजर का एक्शन और सिस्टम को चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेंजर अमित श्रीवास्तव ने तत्काल एक्शन का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, “जंगल में करंट बिछाना एक संगीन जुर्म है। हमने फील्ड स्टाफ को मौके पर रवाना कर दिया है। दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी।”
हालांकि, विभाग की इस सक्रियता के बीच ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। लोगों का एक ही सवाल है—क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या 'मौत' का इंतजार कर रहा है? यदि अब भी जंगलों से यह 'मौत का जाल' नहीं हटाया गया, तो अगली बार जिम्मेदार कौन होगा?
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