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नौगढ़ की वादियों में लौटेगी हरियाली: 15 हजार हेक्टेयर में रोपे जाएंगे 12 लाख पौधे, वन विभाग का मेगा प्लान तैयार

चंदौली के नौगढ़ क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए 12 लाख से अधिक पौधे लगाने का महाभियान शुरू हो गया है। विंध्य की पहाड़ियों और वीरान हो रहे जंगलों को हरा-भरा करने के लिए 15 हजार हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है।

 
 

नौगढ़ और विंध्य की पहाड़ियों पर महाभियान

15 हजार हेक्टेयर वन भूमि पर पौधरोपण

जयमोहनी और मझगाईं रेंज में तैयारी तेज

12 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य

बीजों के माध्यम से भी उगाई जाएगी हरियाली

उत्तर प्रदेश के 'धान के कटोरे' के रूप में प्रसिद्ध चंदौली जिले का जंगली इलाका नौगढ़ अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए नई पहचान बनाने जा रहा है। विंध्य पर्वत की ऊंची-नीची पहाड़ियों और नौगढ़ के वीरान हो रहे जंगलों को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए वन विभाग ने एक विशाल पौधरोपण अभियान की रूपरेखा तैयार की है। इस मिशन के तहत करीब 15 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र में 12 लाख से अधिक नए पौधे रोपे जाएंगे।

इन क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर चल रही गड्ढों की खुदाई
पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू हुए इस अभियान के लिए पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों को चुना गया है। वर्तमान में गंगापुर, चोरमरवा, नरकटी, गहिला, मगरही, हथिनी, औरवाटांड, छानपाथर, कर्माबाद, देवखत, भरदूवा और रमैया जैसे दर्जनों गांवों के समीपवर्ती वन क्षेत्रों में गड्ढों की खुदाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों की सीधी निगरानी में यह कार्य सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि मानसून की पहली बारिश के साथ ही पौधरोपण शुरू किया जा सके।

तीन प्रमुख रेंजों में बंटा है लक्ष्य
वन विभाग ने इस लक्ष्य को अलग-अलग रेंजों में विभाजित किया है ताकि मॉनिटरिंग बेहतर हो सके:--

मझगाईं वन रेंज: यहाँ लगभग 2 लाख 20 हजार पौधे लगाने की योजना है।
जयमोहनी वन रेंज: इस क्षेत्र में 3 लाख 80 हजार पौधे लगाए जाएंगे।

प्राकृतिक संवर्धन: विभाग ने 6 लाख 60 हजार पौधे सीधे बीजों (सीडिंग) के माध्यम से उगाने का लक्ष्य रखा है। यह विधि न केवल लागत प्रभावी है बल्कि इससे पौधों की जड़ों की पकड़ प्राकृतिक रूप से मजबूत होती है।

तकनीकी निगरानी और भविष्य की योजना
क्षेत्रीय वन अधिकारी अमित कुमार श्रीवास्तव (जयमोहनी/मझगाई) ने बताया कि इस बार केवल पौधे लगाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा और वृद्धि की निरंतर मॉनिटरिंग भी की जाएगी। गड्ढों की खुदाई में वैज्ञानिक मानकों का पालन किया जा रहा है ताकि जल संचयन बेहतर हो और पौधों को लंबे समय तक नमी मिलती रहे।

यह अभियान न केवल क्षेत्र के तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होगा, बल्कि स्थानीय वन्यजीवों के लिए भी एक सुरक्षित गलियारा तैयार करेगा। नौगढ़ की इन वादियों में हरियाली लौटने से आने वाले वर्षों में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ने की उम्मीद है।

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