नौगढ़ के मैदान में उतरीं 20 गांवों की 100 बेटियां: दौड़ में दिखाया दम, सीखे सुरक्षा और सेहत के गुर
नौगढ़ के मानव सेवा केंद्र में आयोजित खेल दिवस समारोह में 20 गांवों की करीब 100 बेटियों ने हिस्सा लिया। मैदान में दौड़ और खेल के साथ-साथ बेटियों को 112 आपातकालीन हेल्पलाइन, स्वास्थ्य और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
नौगढ़ की बेटियों का खेल दिवस
20 गांवों की 100 किशोरियों की भागीदारी
112 नंबर से मिली सुरक्षा की सीख
जलेबी और 200 मीटर दौड़ में उत्साह
विजेता बेटियों को मिला सम्मान पुरस्कार
चंदौली जिले के नौगढ़ ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों की बेटियों ने खेल के मैदान से एक ऐसा शानदार संदेश दिया है, जिसकी गूंज पूरे क्षेत्र में सुनाई दे रही है। मानव सेवा केंद्र के प्रांगण में आयोजित खेल दिवस समारोह में 20 गांवों की लगभग 100 किशोरियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। मैदान में जहां बेटियों ने 100 और 200 मीटर की दौड़ में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, वहीं उन्हें मुसीबत के समय 112 नंबर डायल करने और अपने स्वास्थ्य व अधिकारों की रक्षा करने के गुर भी सिखाए गए।

खेल के बहाने बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित करके किया गया। मानव सेवा केंद्र के निदेशक जगत नारायण सिंह ने दीप जलाकर समारोह की शुरुआत की। इस मौके पर प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर अरुण कुमार, कोऑर्डिनेटर सुधा, संगीता देवी, हंसराज, संदीप और गुंजा विशेष रूप से मौजूद रहे।
संस्थान के निदेशक जगत नारायण सिंह ने बताया कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से नौगढ़ ब्लॉक के 20 गांवों में बेटियों की शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और हिंसा से बचाव के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। यह खेल दिवस भी इसी मुहीम का एक अहम हिस्सा है।
थानाध्यक्ष ने बताया—मुसीबत में घबराना नहीं, 112 दबाना है
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थानाध्यक्ष संतोष कुमार ने बेटियों को सुरक्षा और सजगता से जुड़ी बेहद जरूरी बातें समझाईं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की आपात स्थिति या खतरे के समय बेटियों को डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि तुरंत 112 नंबर पर फोन करके पुलिस की मदद लेनी चाहिए। उन्होंने बेटियों को अपने आसपास घटने वाली संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया।
जलेबी दौड़ से 200 मीटर तक मैदान में दिखा जबरदस्त उत्साह
प्रार्थना और स्वागत गीत के बाद खेल प्रतियोगिताओं का दौर शुरू हुआ, जिसमें बेटियों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कुर्सी दौड़, जलेबी दौड़, गणित दौड़, सुई-धागा दौड़ के साथ-साथ 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में किशोरियों ने जमकर जोर आजमाया।
प्रतियोगिता के अंत में बेहतर प्रदर्शन करने वाली बेटियों को अतिथियों ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता भी बढ़ाता है। 20 गांवों की 100 बेटियों का इस तरह एक साथ मैदान में उतरना ग्रामीण क्षेत्र में आते बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
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