जिले का पहला ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलMovie prime

नौगढ़ में बेअसर साबित हुई अफसरों की रेड: JCB और ट्रैक्टर पकड़े जाने के बाद भी नहीं थमा मिट्टी का अवैध खनन

चंदौली के नौगढ़ में एसडीएम, तहसीलदार और सीओ की संयुक्त छापेमारी के बाद भी मिट्टी खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। ऑनलाइन परमिशन की आड़ में रात के अंधेरे में धड़ल्ले से जेसीबी और ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं।
 

नौगढ़ में जारी मिट्टी का खनन

छापेमारी के बाद भी खेल चालू

रात के अंधेरे में खुली चुनौती

ऑनलाइन परमिशन पर उठे सवाल

लेखपाल और राजस्व तंत्र मौन

चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में मिट्टी खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब प्रशासनिक कार्रवाई का भी कोई डर नहीं रह गया है। पिछले दिनों एसडीएम विकास मित्तल, तहसीलदार राहुल सिंह और क्षेत्राधिकारी (CO) नामेन्द्र कुमार रावत ने एक साथ मिलकर बड़ी छापेमारी की थी। इस दौरान कई जेसीबी और ट्रैक्टर पकड़े गए थे। इस कड़े एक्शन के बाद उम्मीद थी कि खनन बंद हो जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

चकरघट्टा और नौगढ़ में रात भर गरज रही जेसीबी
स्थानीय लोगों के मुताबिक चकरघट्टा और नौगढ़ थाना क्षेत्र में आज भी रात के सन्नाटे में जेसीबी मशीनों के चलने और ट्रैक्टरों से मिट्टी ढोने का काम धड़ल्ले से चल रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बड़े अधिकारियों ने खुद मौके पर जाकर सख्त संदेश दिया था, तो फिर कुछ ही दिनों के भीतर यह खेल दोबारा किसके भरोसे और किसके संरक्षण में शुरू हो गया?

बड़ा सवाल- जब सब वैध है, तो दिन के उजाले से परहेज क्यों?
खनन के इस धंधे से जुड़े लोग अक्सर तर्क देते हैं कि उनके पास तहसील प्रशासन से ऑनलाइन अनुमति (परमिशन) है। लेकिन ग्रामीणों का सवाल बिल्कुल सीधा और वाजिब है कि अगर आपके कागज पूरी तरह वैध हैं, तो फिर अधिकांश काम रात के अंधेरे में ही क्यों किया जाता है? ऐसा क्या है जिसे दिन के उजाले में करने से परहेज किया जा रहा है? यही रहस्य अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

मानक से ज्यादा खुदाई और लेखपालों की भूमिका
इस पूरे खेल का एक और काला पहलू यह है कि कागज पर जितनी गहराई और क्षेत्रफल की अनुमति मिलती है, जमीन पर उससे कहीं ज्यादा खुदाई कर दी जाती है। इन खनन स्थलों की मौके पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी स्थानीय लेखपाल और राजस्व विभाग की होती है। इसके बावजूद मानक से ज्यादा हो रही इस खुदाई की जानकारी बड़े अफसरों तक नहीं पहुँच रही है, जिससे निगरानी तंत्र पर भी उंगलियां उठने लगी हैं।

क्या केवल छापेमारी से रुकेगा यह खेल?
एक तरफ प्रशासन लगातार कार्रवाई करने और मुस्तैद रहने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों से लगातार मिट्टी खनन की शिकायतें आ रही हैं। ऐसे में साफ है कि सिर्फ कागजी दावों या कभी-कभार की छापेमारी से यह खेल रुकने वाला नहीं है। इस पर स्थायी रोक लगाने के लिए परमिशन देने से लेकर मौके की खुदाई की गहराई की जांच करने तक, हर स्तर पर जवाबदेही तय करनी होगी।

Tags

चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*