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नौगढ़ में काशीराज स्टेट के पट्टों पर बड़ा बवाल: 3 पीढ़ियों से जिस जमीन पर खेती, अब वहां बेदखली का खतरा! जानिए पूरी सच्चाई

चंदौली के नौगढ़ और चकिया क्षेत्र में काशीराज स्टेट के समय से वन भूमि पर खेती कर रहे हजारों गरीब, दलित और आदिवासी परिवारों पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है। पट्टे रिन्यू न होने और सर्वे में गड़बड़ी का यह मामला अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दरबार तक पहुंच गया है।

 
 

नौगढ़ में काशीराज स्टेट पट्टों पर बवाल

60 साल पुरानी जमीन से बेदखली का खतरा

सपा सांसद छोटेलाल खरवार का PM को पत्र

सर्वे में गड़बड़ी और री-सर्वे की मांग

जिस जमीन पर परिवारों की दो-तीन पीढ़ियां खेती करते हुए गुजर गईं, आज उसी जमीन पर बेदखली का काला साया मंडरा रहा है। चंदौली जिले के नौगढ़ और चकिया क्षेत्र में काशीराज स्टेट के समय गरीबों और किसानों को दिए गए वन भूमि के पट्टे अब विवादों में आ गए हैं। सालों से काबिज परिवारों को अचानक जमीन खाली करने के नोटिस मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

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स्थानीय विवाद अब पहुंचा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दरबार
पट्टों के नवीनीकरण न होने और वन विभाग की कार्रवाई का यह मामला अब स्थानीय राजनीति से निकलकर देश की राजधानी तक पहुंच गया है। सोनभद्र से सपा सांसद कुंवर छोटेलाल सिंह खरवार ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नौगढ़ और चकिया क्षेत्र के गरीबों का मुद्दा उठाया है। सांसद ने अपने पत्र में पट्टों के रिन्यू न होने, जमीन खाली कराने के नोटिसों और सर्वे में हुई धांधली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

खेत वही, परिवार वही... फिर जमीन का हक क्यों बदला?
सपा सांसद छोटेलाल का कहना है कि काशीराज स्टेट के समय पात्र गरीबों, दलितों और आदिवासियों को उपयोग के लिए वन भूमि आवंटित की गई थी। इन परिवारों का दावा है कि वे पिछले 50 से 60 वर्षों से लगातार इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। सांसद ने प्रधानमंत्री से सवाल किया है कि अगर ये परिवार दशकों से अपनी रोजी-रोटी इसी जमीन से चला रहे हैं, तो राजस्व और वन विभाग उनके अधिकारों का स्थाई निपटारा क्यों नहीं कर रहा?

सर्वे में बाहर के लोगों के नाम दर्ज करने का गंभीर आरोप
सांसद ने पत्र में अधिकारियों पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नौगढ़ क्षेत्र में पुश्तैनी जमीन के सर्वे के दौरान मौके पर खेती कर रहे असली हकदारों को नजरअंदाज कर दिया गया और बाहर के लोगों के नाम कागजों में चढ़ा दिए गए। उन्होंने नियम का हवाला देते हुए मांग की कि मौके पर कब्जे के आधार पर पात्रों को 4 बीघा से 16 बीघा तक पट्टा दिया जाना चाहिए।

कचहरी से हाईकोर्ट तक चक्कर काट रहे बेबस परिवार
मामला सिर्फ पट्टे तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीबों के उत्पीड़न से भी जुड़ा है। सांसद के मुताबिक, हजारों आदिवासी और दलित परिवार अपनी जमीन बचाने के लिए तहसील, कचहरी से लेकर हाईकोर्ट तक के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने पर गरीबों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। पत्र में सोनभद्र के केवटम गांव का जिक्र करते हुए रेंजर पर आदिवासियों से मारपीट और SC/ST एक्ट की धाराओं को कमजोर करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

री-सर्वे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
सांसद ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि नौगढ़ और चकिया क्षेत्र के इस पूरे जमीन विवाद का नए सिरे से निष्पक्ष री-सर्वे कराया जाए। असली और पात्र काबिज लोगों की पहचान कर उन्हें नियमानुसार पट्टा दिया जाए और सर्वे में गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। अब देखना यह होगा कि PMO के दखल के बाद क्या नौगढ़ के इन गरीब किसानों को उनकी पुश्तैनी जमीन का हक मिल पाता है या नहीं।

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