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वकीलों की धमकी को बंदरघुड़की समझती है नौगढ़ पुलिस, तहसील में अधिवक्ता की पिटाई में नामजद FIR के बाद भी एक्शन नहीं

चन्दौली के नौगढ़ तहसील में अधिवक्ता वीरेंद्र केशरी से मारपीट के मामले में चार दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे नाराज बार एसोसिएशन ने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर आंदोलन की चेतावनी दी है, जिससे तहसील का कामकाज ठप है।
 

चार दिन बाद भी आरोपी आजाद

वकीलों ने किया न्यायिक कार्य बहिष्कार

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

ग्रामीणों और फरियादियों की बढ़ी परेशानी


चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील परिसर में अमदहां चरनपुर के निवासी और वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र केशरी के साथ कथित मारपीट के मामले ने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के चार दिन बीत जाने और नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बावजूद पुलिस अब तक आरोपियों को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। इस लचर कार्रवाई से नाराज अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। आज क्षेत्र का सबसे बड़ा जनहित का सवाल यह बन गया है कि जब दूसरों को न्याय दिलाने वाले वकील ही खुद के लिए न्याय की भीख मांग रहे हैं, तो आम आदमी पुलिस से क्या उम्मीद रखे?

जमीन से जुड़े विवाद पर दी थी कानूनी राय
पीड़ित अधिवक्ता वीरेंद्र केशरी ने नौगढ़ थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि बुधवार को जब वह तहसील जा रहे थे, तब एक भूमि से जुड़े सवाल पर उन्होंने ईमानदारी से कानूनी राय देते हुए संबंधित जमीन को वन विभाग की भूमि बताया था। यह बात आरोपियों को नागवार गुजरी। इसके कुछ ही देर बाद तहसील परिसर के भीतर ही देवखत निवासी परमहंस यादव और उनके पिता लक्ष्मण यादव ने अधिवक्ता को घेर लिया। दोनों ने पहले विवाद किया और फिर सरेआम उनके साथ मारपीट की। पुलिस ने मुकदमा तो लिख लिया, लेकिन चार दिन बाद भी आरोपियों की धरपकड़ नहीं हो सकी है।

बार एसोसिएशन का हल्लाबोल
आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से भड़के बार एसोसिएशन नौगढ़ ने अध्यक्ष रामचंद्र यादव एडवोकेट की अध्यक्षता में एक आपात बैठक बुलाई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि जब तक आरोपियों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक कोई भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य नहीं करेगा। वकीलों का साफ कहना है कि यदि सरकारी तहसील परिसर के भीतर हुई इस गुंडागर्दी पर भी पुलिस तुरंत एक्शन नहीं लेती, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे और न्याय प्रणाली से जनता का भरोसा उठ जाएगा।

जनता बेहाल, प्रशासन पर राजनीतिक दबाव की चर्चा तेज
वकीलों और पुलिस-प्रशासन के बीच छिड़ी इस आर-पार की लड़ाई का सीधा खामियाजा स्थानीय गरीब जनता भुगत रही है। तहसील और न्यायालय में जमीन, राजस्व, जाति-निवास प्रमाण पत्र और पुराने वादों के सिलसिले में दूर-दराज के गांवों से आने वाले ग्रामीण रोज भटककर वापस लौट रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि आखिर नामजद आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस किसके दबाव में काम कर रही है? हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी (SDM) विकास मित्तल ने जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिया है।

इस बीच, बार एसोसिएशन ने चेताया है कि यदि पुलिस ने सुस्ती नहीं छोड़ी तो आंदोलन उग्र होगा। एसडीएम से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में विजय बहादुर सिंह यादव, कृष्णानंद मौर्य, बाबूलाल शर्मा, विभूति नारायण, राजकुमार, अजीत कुमार कोल और दिनेश कुमार समेत भारी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे।

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