अपराध का केंद्र बना मझगावां पुल: बाइक सवार बदमाशों ने युवक से लूटा मोबाइल और नकदी, पुलिस पर मामले को दबाने का आरोप
नौगढ़ के मझगावां पुल पर सोमवार रात जयमोहनी निवासी अजय यादव से लूट की वारदात हुई। बाइक सवार तीन बदमाशों ने मोबाइल और पैसे छीन लिए। पुलिस की 'अनजान' रहने की भूमिका और सुलह-समझौते की चर्चाओं ने स्थानीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मझगावां पुल पर मोबाइल और नकदी लूट
पीड़ित ने नोट किया बाइक का नंबर
पुलिस पर मोबाइल लौटवाकर मामला रफा-दफा करने का आरोप
7 दिन पहले सेल्समैन के साथ हुई थी मारपीट
चकरघट्टा पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता का अविश्वास
चंदौली जिले के चकरघट्टा थाना क्षेत्र अंतर्गत मझगावां पुल के पास अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार की रात जयमोहनी निवासी अजय यादव के साथ हुई लूट की वारदात ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस इस गंभीर मामले से पूरी तरह अनजान बनने का नाटक कर रही है, जिससे आम जनता में गहरा आक्रोश और असुरक्षा का भाव व्याप्त है।
तीन बाइक सवारों ने अचानक किया हमला
पीड़ित अजय यादव ने पुलिस चौकी पर दी गई अपनी तहरीर में बताया कि सोमवार रात वह दवा लेकर घर लौट रहा था। मझगावां पुल के समीप वह मोबाइल पर बात करने लगा, तभी एक बाइक पर सवार तीन अज्ञात युवकों ने उसे घेर लिया। बदमाशों ने अजय के हाथ से मोबाइल छीन लिया और जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। मोबाइल कवर में अजय के तीन हजार रुपये भी रखे थे, जो बदमाशों के हाथ लग गए। साहस दिखाते हुए अजय ने बदमाशों का पीछा किया और उनकी बाइक का नंबर (UP 64 AW 2345) भी नोट कर लिया, जिसे पुलिस को सौंपा गया है।
पुलिस की 'सेटिंग' या लापरवाही?
इस मामले में सबसे विवादित पहलू पुलिस की भूमिका है। चर्चा है कि पुलिस ने दबाव में आकर अजय को गुप्त रूप से बुलाकर उसका मोबाइल तो वापस करवा दिया, लेकिन बदमाशों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या अपराधी पुलिस के संरक्षण में काम कर रहे हैं? कई बार लोग पुलिस के पास जाने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि न्याय मिलने के बजाय मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा। मझगावां पुल के पास अंधेरे और सुनसान इलाके का फायदा उठाकर लुटेरे सक्रिय हैं, लेकिन पुलिस की गश्त और सक्रियता शून्य नजर आ रही है।
पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
यह कोई पहली घटना नहीं है। ठीक सात दिन पहले मझगावां पुल स्थित कंपोजिट शराब दुकान पर सेल्समैन उज्जवल कुमार जायसवाल के साथ तीन मनबढ़ युवकों ने मारपीट की थी और दुकान की जाली तोड़ दी थी। स्वयं क्षेत्राधिकारी (CO) नामेन्द्र कुमार ने सीसीटीवी फुटेज देखे थे, जिसमें वारदात साफ कैद थी। इसके बावजूद पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजने के बजाय 'सुलह-समझौते' का रास्ता अपनाना बेहतर समझा। इसी ढुलमुल रवैये ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।
दहशत के साये में स्थानीय नागरिक
मझगावां पुल पर हुई इस ताजा लूट के बाद से राहगीरों और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही इस मार्ग से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा है। अगर पुलिस अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के बजाय केवल मामले छिपाने में लगी रहेगी, तो आम नागरिक की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मझगावां पुल पर नियमित पुलिस पिकेट की तैनाती की जाए और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।
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