नक्सल मोर्चे पर चंदौली-सोनभद्र और बिहार पुलिस ने मिलाए हाथ, सीमावर्ती जंगलों में चलेगा संयुक्त कॉम्बिंग ऑपरेशन
नौगढ़ थाना परिसर में उत्तर प्रदेश और बिहार सीमा के सुरक्षा अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इसमें सीमाई चौकसी बढ़ाने, खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने और जेल से छूटे नक्सलियों की कड़ी निगरानी की संयुक्त रणनीति तैयार की गई।
नौगढ़ में हुआ बड़ा नक्सल मंथन
जेल से छूटे नक्सलियों पर निगरानी
यूपी-बिहार बॉर्डर पर बढ़ेगी चौकसी
जंगलों में चलेंगे संयुक्त कॉम्बिंग ऑपरेशन
ग्रामीणों के सहयोग पर विशेष जोर
उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं से सटे नक्सल प्रभावित सुदूर क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए बुधवार को नौगढ़ थाना परिसर में एक उच्चस्तरीय अंतरराज्यीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर और बिहार राज्य की सीमा से जुड़े सुरक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रहने वाली संदिग्ध गतिविधियों, खुफिया तंत्र को चाक-चौबंद करने और आपसी समन्वय पर विस्तृत चर्चा की गई।
एडिशनल एसपी और एसडीएम की अध्यक्षता में बनी रणनीति
नौगढ़ थाना सभागार में आयोजित इस रणनीतिक बैठक की अध्यक्षता एडिशनल एसपी सतीश चंद्र और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) विकास मित्तल ने संयुक्त रूप से की। अधिकारियों ने मातहतों को निर्देशित करते हुए साफ कहा कि नक्सली इनपुट और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही अंतरराज्यीय सीमाओं पर सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान ही इस संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार बनेगा।
जेल से लौटे नक्सलियों की आय और संपर्कों पर पैनी नजर
बैठक में तय किया गया कि पूर्व में नक्सली गतिविधियों में संलिप्त रहे और वर्तमान में जेल से रिहा होकर बाहर आए व्यक्तियों की गतिविधियों पर स्थानीय पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रहेगी। इन चिन्हित व्यक्तियों की समय-समय पर स्थानीय थानों में उपस्थिति दर्ज कराई जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उनके आय के स्रोतों, हालिया गतिविधियों और उनके संपर्क में रहने वाले संदिग्ध लोगों की गुप्त निगरानी का एक मजबूत खाका खींचा गया है ताकि वे दोबारा मुख्यधारा से न भटकें।
जंगलों में पीएसी और पुलिस चलाएगी संयुक्त कॉम्बिंग
सुरक्षा अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा और सोनभद्र से जुड़े संवेदनशील जंगली रास्तों व दुर्गम इलाकों में तत्काल प्रभाव से पुलिस और पीएसी (प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी) के जवानों द्वारा नियमित रूप से संयुक्त कॉम्बिंग अभियान चलाने की रणनीति बनाई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में आपसी तालमेल के जरिए जोनल इंटेलिजेंस और स्थानीय एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) के नेटवर्क को और अधिक सक्रिय किया जाएगा, जिससे कोई भी संदिग्ध गतिविधि छिपी न रह सके।
सुरक्षा को लेकर जागरूक किए जाएंगे ग्रामीण
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि दूरस्थ पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में निवास करने वाले ग्रामीणों को सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रति निरंतर जागरूक किया जाए। ग्रामीणों को प्रेरित किया जाए कि यदि उनके आस-पास कोई भी अपरिचित, संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु दिखाई दे, तो वे इसकी तत्काल जानकारी पुलिस के सरकारी नंबरों पर साझा करें। अधिकारियों ने आम नागरिकों के सहयोग को नक्सल विरोधी अभियान की सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत कड़ी बताया।
प्राकृतिक आपदा और जनसमस्याओं के निस्तारण के निर्देश
नक्सल सुरक्षा की समीक्षा के साथ-साथ हाल के दिनों में आंधी, तेज बारिश और आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया कि वे ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को खराब मौसम के दौरान बड़े पेड़ों और कच्चे मकानों के नीचे न रुकने तथा सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए जागरूक करें। इसके अलावा वन क्षेत्र के निवासियों की बुनियादी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए।
बैठक में यह अधिकारी रहे मुख्य रूप से मौजूद
इस उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक में पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) नामेंद्र कुमार रावत, सोनभद्र नक्सल सेल के प्रभारी त्रिभुवन राय, जोनल इंटेलिजेंस प्रभारी रमेश कुमार, थानाध्यक्ष नौगढ़ प्रमोद यादव और चकरघट्टा थानाध्यक्ष संतोष कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ ही उपनिरीक्षक अभय सिंह सहित एलआईयू, स्वास्थ्य विभाग, बेसिक शिक्षा, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) एवं विद्युत विभाग के तमाम जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*








