नौगढ़ आवास सूची विवाद: डीएम की चेतावनी, बंद कमरे में बैठक हुई तो नपेंगे सेक्रेटरी और एडीओ
चंदौली के नौगढ़ में पीएम आवास योजना की पात्रता सूची पर ग्रामीणों के गंभीर सवालों के बाद प्रशासन हिल गया है। मझगावां में 75 अपात्रों के नाम मिलने पर डीएम ने कड़ा रुख अपनाया है और बैठकों का नया रोस्टर जारी कर दिया है।
नौगढ़ ब्लॉक की ग्राम सभाओं में बदला गया बैठकों का रोस्टर
मझगावां में पहले से आवास पाए 75 लोगों के नाम सूची में मिलने पर हंगामा
बंद कमरे में बैठक करने वाले पंचायत सचिवों पर होगी सख्त कार्रवाई
गांव की खुली बैठक में ग्रामीणों के सामने परखा जाएगा एक-एक नाम
चंदौली जिले के विकास खंड नौगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की पात्रता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम सभाओं में सूची सार्वजनिक होते ही ग्रामीणों ने अपात्रों के नाम शामिल होने पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इसके बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। इस भारी विरोध को देखते हुए प्रशासन ने आनन-फानन में कुछ ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों का रोस्टर (तारीखें) बदल दिया है।

75 अपात्रों के नाम आने से चौंक गए लोग
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा झटका मझगावां पंचायत से लगा है। यहाँ के ग्रामीणों ने पात्रता सूची पर सवाल उठाते हुए एक साथ 75 लोगों के नामों पर कड़ी आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन लोगों को पहले से ही मुख्यमंत्री आवास मिल चुका है और कुछ लोगों के नाम कलक्टर आवास की लिस्ट में भी हैं। इस खुलासे के बाद से ही सर्वे और सत्यापन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
डीएम की सख्त चेतावनी, बंद कमरे में खेल नहीं चलेगा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी (डीएम) चंद्र मोहन गर्ग ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि यदि कहीं भी बंद कमरे में बैठक करने या सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने की शिकायत मिली, तो संबंधित पंचायत सचिव और एडीओ पंचायत के खिलाफ सीधे तौर पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी। आवास योजना में किसी भी गरीब का हक नहीं मरने दिया जाएगा।
नई तारीखें: अब इस दिन होगी खुली बैठक
संशोधित रोस्टर के मुताबिक, अब 15 जून को सेमरा कुसही, जयमोहनी, धनकुंवारी कला, मरवटिया और जनकपुर में खुली बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद 16 जून को जरहर व अमदहां चरनपुर में और 18 जून को लछिमनपुर व गढ़वा में पात्रता सूची का सार्वजनिक सत्यापन होगा। इन बैठकों में वन-पेजर रिपोर्ट सीधे ग्रामीणों के सामने रखी जाएगी ताकि मौके पर ही शिकायत दर्ज हो सके।
जनता की अदालत में तय होगा हर नाम
ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक बीबी सिंह ने बताया कि अब अंतिम सूची केवल सरकारी दस्तावेजों से तय नहीं होगी। पंचायत सचिवों को गांव के बीच में आकर सूची पढ़नी होगी। गांव के हर आदमी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी गलत नाम पर सबूत के साथ अपनी आपत्ति दर्ज करा सके। अब यह प्रक्रिया केवल एक सूची नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम के भरोसे की परीक्षा बन चुकी है।
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