नौगढ़ में PM आवास सूची पर भारी बवाल, सचिव के नाम पढ़ते ही भड़के ग्रामीण, 20 नामों पर दर्ज हुई आपत्ति
चन्दौली के नौगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत लौवारी कला में पीएम आवास सूची सार्वजनिक होते ही हंगामा मच गया। ग्रामीणों ने अपात्रों को लाभ देने का आरोप लगाते हुए 357 लाभार्थियों की सूची में से 20 नामों पर मौके पर ही आपत्ति दर्ज करा दी।
नौगढ़ के लौवारी कला में खुली बैठक
357 लाभार्थियों की सूची की गई सार्वजनिक
20 अपात्र नामों पर मौके पर आपत्ति
पहले से मुख्यमंत्री आवास मिलने का दावा
सचिव अश्वनी गौतम करेंगे दोबारा जांच
चंदौली जिले के विकास खंड नौगढ़ से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ब्लॉक के ग्राम पंचायत लौवारी कला में गुरुवार को आयोजित पंचायत की खुली बैठक में पात्रता सूची का सच सबके सामने आ गया। जैसे ही पंचायत सचिवालय में पंचायत सचिव अश्वनी गौतम ने सर्वे के आधार पर तैयार सूची में से लाभार्थियों के नाम जोर-जोर से पढ़ने शुरू किए, वैसे ही बैठक में मौजूद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और वहां हंगामा शुरू हो गया।

पहले से मिला है मुख्यमंत्री आवास, फिर भी सूची में नाम!
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने सूची में शामिल कई नामों पर खुलकर उंगली उठाई। ग्रामीणों का सीधा आरोप था कि इस सरकारी सूची में कुछ ऐसे रसूखदार और अपात्र लोगों के नाम डाल दिए गए हैं जो योजना के दायरे में आते ही नहीं हैं। लोगों ने मौके पर ही दावा किया कि सूची में दर्ज कुछ नाम ऐसे भी हैं, जिन्हें पूर्व में ही मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ मिल चुका है। ग्रामीणों की नाराजगी का असर यह हुआ कि कुल 357 लाभार्थियों की इस सूची में से 20 नामों पर मौके पर ही लिखित आपत्ति दर्ज करवा दी गई।
20 नामों पर अटकी सहमति, अब नए सिरे से होगी पड़ताल
शासन के सख्त निर्देशों के मुताबिक, गांव के हर एक जरूरतमंद तक लाभ पहुंचाने और पूरी पारदर्शिता रखने के लिए यह खुली बैठक बुलाई गई थी। सचिव द्वारा एक-एक नाम पढ़कर सुनाया जा रहा था ताकि गांव वाले खुद पुष्टि कर सकें। लेकिन 20 नामों पर ग्रामीणों के भारी विरोध के कारण सहमति नहीं बन सकी। अब इन विवादित नामों को होल्ड पर रख दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन सभी 20 नामों की जमीनी स्तर पर दोबारा जांच होगी और रिपोर्ट आने के बाद ही फाइनल सूची बनेगी।
'अब गांव की जनता तय करेगी कि कौन है असली हकदार'
इस हंगामे के बीच पंचायत सचिव अश्विनी गौतम ने ग्रामीणों को शांत कराते हुए कहा कि प्रशासन की मंशा बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा, "357 लोगों की यह सूची इसीलिए सार्वजनिक की गई है ताकि गांव वाले खुद तय करें कि कौन पात्र है और कौन अपात्र। जो भी आपत्तियां मिली हैं, उन्हें नोट कर लिया गया है। किसी भी अपात्र को इसका लाभ नहीं लेने दिया जाएगा।"
वहीं ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव ने भी पारदर्शिता का भरोसा देते हुए कहा कि अंतिम सूची बनाने में ग्रामीणों के सुझाव और आपत्तियां सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। किसी भी असली गरीब का हक नहीं मारा जाएगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व प्रधान प्रतिनिधि संतोष कोल, रोजगार सेवक कालिका प्रसाद, पंचायत सहायक बलवंत प्रसाद और ग्राम पंचायत के सभी सदस्यों के साथ भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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