एक बारिश और थोड़ी सी हवा में अंधेरे में डूबा पूरा नौगढ़, 42°C की तपिश में 124 गांवों के लोग रहे बेहाल
शनिवार रात हुई तेज बारिश और आंधी ने नौगढ़ की बिजली व्यवस्था की पोल खोल दी है। सोनभद्र में खंभे गिरने से चंदौली के 124 गांवों की बत्ती गुल हो गई। भीषण गर्मी के बीच लोग पानी और नेटवर्क संकट से जूझते रहे।
महज कुछ घंटों की आंधी-बारिश से चरमराई बिजली व्यवस्था
सोनभद्र के पसही क्षेत्र में दो दर्जन से ज्यादा खंभे टूटे
भीषण उमस के बीच घंटों तक अंधेरे में रहे 124 गांव
बिजली कटने से पानी, मोबाइल नेटवर्क और कारोबार ठप
ग्रामीणों ने उठाया वैकल्पिक बिजली लाइन का बड़ा सवाल
शनिवार की रात हुई तेज बारिश और आंधी ने नौगढ़ इलाके की बिजली व्यवस्था की ऐसी हकीकत सामने ला दी है, जिसने बिजली विभाग के बड़े-बड़े दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज कुछ घंटों के मौसम खराब होने से सोनभद्र के पसही क्षेत्र में दो दर्जन से भी ज्यादा बिजली के खंभे (पोल) टूटकर गिर गए। सोनभद्र में हुए इस नुकसान का सीधा असर पड़ोसी जिले चंदौली के नौगढ़ क्षेत्र पर पड़ा, जिससे पूरी तहसील की रफ्तार थम गई। रात में गुल हुई बिजली अगले दिन रविवार की शाम 5 बजे तक भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी थी। 42 डिग्री के आसपास चल रहे पारे और भीषण उमस के बीच 124 गांवों के हजारों लोग घंटों तक तड़पने को मजबूर रहे।

बिजली जाते ही पानी, संचार और धंधा सब हुआ ठप
जैसे ही बिजली कटी, इलाके के पंखे, कूलर और पानी की मोटरें पूरी तरह बंद हो गईं। सरकारी पेयजल (पीने के पानी की) योजनाएं ठप पड़ गईं और घरों में लगे समरसेबल ने भी जवाब दे दिया। हालत यह हो गई कि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को हैंडपंपों पर बाल्टियां लेकर लंबी लाइनों में लगना पड़ा। कई परिवार तो दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोने को मजबूर दिखे। यही नहीं, मोबाइल टावरों का पावर बैकअप खत्म होने से कई गांवों में फोन का नेटवर्क भी पूरी तरह गायब हो गया। आटा चक्कियां, दूध की डेयरियां और छोटी दुकानें बंद रहने से व्यापार ठप रहा और जिन घरों में मरीज थे, उनकी परेशानी तो कई गुना बढ़ गई।

काम तो युद्ध स्तर पर हुआ, पर स्थायी समाधान कब?
रविवार की सुबह से ही बिजली विभाग की कई टीमें पसही से लेकर नौगढ़ तक टूटी हुई लाइनों को ठीक करने में जुट गईं। पावर ग्रिड के सुपरवाइजर देवेश यादव और अवर अभियंता (JE) योगेंद्र पाल ने बताया कि नौगढ़ फीडर से जुड़े कई खंभे क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके कारण सप्लाई रुकी। अतिरिक्त कर्मचारियों को लगाकर टूटे पोल हटाए गए और नए खंभे खड़े कर तारों को जोड़ा गया। विभाग भले ही अपनी पीठ थपथपाए, लेकिन हर साल बरसात की शुरुआत में सामने आने वाली यह तस्वीर यह बताती है कि आज भी एक पूरी तहसील सिर्फ एक फीडर और एक ही मेन लाइन के भरोसे चल रही है।
अब जवाबदेही तय करने का आ गया है समय
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर साल मानसून आते ही नौगढ़ में बत्ती गुल होने का यह खेल शुरू हो जाता है। जर्जर खंभे, बरसों पुराने तार और किसी दूसरे वैकल्पिक फीडर का न होना इस इलाके की सबसे बड़ी कमजोरी है। लोगों का आरोप है कि अधिकारी हर बार सिर्फ कामचलाऊ मरम्मत कर देते हैं, लेकिन समस्या को जड़ से खत्म करने का कोई ठोस उपाय नहीं किया जाता। अब वक्त आ गया है कि जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को सरकार के सामने मजबूती से उठाएं, ताकि नौगढ़ की जनता को हर साल इस तरह के नरक से मुक्ति मिल सके।
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