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नौगढ़ के असली हीरो: आंधी से तबाह हुए 104 गांवों की बिजली देवेश यादव की टीम ने 30 दिन में की बहाल, लोग कर रहे सलाम

नौगढ़ में भीषण आंधी से तबाह हुई 104 गांवों की बिजली व्यवस्था को देवेश यादव और उनके जांबाज संविदा कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रिकॉर्ड 30 दिनों में पूरी तरह दुरुस्त कर दिया है।

 
 

आंधी-तूफान से नौगढ़ के 104 गांवों की बत्ती हुई थी गुल

जमीन पर गिर चुके थे 90 पोल और 15 ट्रांसफार्मर हुए थे फेल

3 महीने का काम जांबाज टीम ने सिर्फ 30 दिन में किया पूरा

व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर देवेश यादव की टीम ने शुरू किया काम

संविदा कर्मियों ने भारी बारिश और कीचड़ के बीच रात-दिन की मेहनत


पिछले दिनों आए भीषण आंधी-पानी की आपदा ने नौगढ़ तहसील के बिजली नेटवर्क को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। इस तबाही के कारण इलाके के 104 गांवों की बत्ती पूरी तरह गुल हो गई थी। हालात यह थे कि 90 बड़े बिजली के खंभे उखड़कर जमीन पर गिर चुके थे और करीब 15 ट्रांसफार्मर पूरी तरह से जवाब दे चुके थे। हजारों परिवार एक झटके में घने अंधेरे में डूब गए और पूरा सरकारी सिस्टम इस संकट के आगे लड़खड़ाता हुआ दिखाई दे रहा था।

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पेयजल और खेती-बाड़ी पर लगा था ब्रेक
बिजली गुल होने का मतलब सिर्फ घरों का अंधेरा नहीं था, बल्कि इससे ग्रामीणों की जिंदगी पूरी तरह थम गई थी। गांवों में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया था, किसानों की खेती-बाड़ी रुक गई थी, छोटे-मोटे धंधे चौपट हो रहे थे और रात के समय बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी पूरी तरह ठप थी। आम जनता की परेशानी को देखते हुए विभाग की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठ रहे थे। हर कोई सोच रहा था कि इस भयानक संकट से आखिर कौन बाहर निकालेगा?

जान की बाजी लगाकर पोल पर चढ़े जांबाज
जब पूरा नौगढ़ सो रहा होता था, तब कुछ जांबाज संविदा कर्मचारी जान की बाजी लगाकर ऊंचे पोल पर टूटे हाई वोल्टेज तारों को जोड़ रहे होते थे। बिहार बॉर्डर से लेकर सोनभद्र और मिर्जापुर की सीमाओं से जुड़े गांवों के लोगों ने बताया कि तेज बारिश, कड़कती आकाशीय बिजली और भारी कीचड़ के बीच भी ये कर्मचारी लगातार काम में जुटे रहे। जिस भारी नुकसान को ठीक करने में अमूमन तीन महीने का समय लगने की आशंका थी, उसे इस जांबाज टीम ने अपनी जिद के आगे मात्र 30 दिनों में पूरा कर दिखाया।

देवेश यादव का डिजिटल 'रैपिड रिस्पांस सिस्टम'
पावर ग्रिड के सुपरवाइजर देवेश कुमार यादव ने इस पूरी आपदा के बीच एक बेहतरीन और आधुनिक रैपिड रिस्पांस सिस्टम तैयार किया। उन्होंने बताया कि खराब बिजली व्यवस्था की पल-पल की लाइव लोकेशन और सूचना पाने के लिए व्हाट्सएप पर एक खास ग्रुप बनाया गया। इसके जरिए कहीं भी पेड़ गिरने, तार टूटने या खंभा क्षतिग्रस्त होने की खबर मिलते ही टीम बिना एक पल गंवाए तुरंत मौके पर पहुंच जाती थी। इसी डिजिटल प्लानिंग की वजह से मरम्मत का काम बिना रुके लगातार चलता रहा।

ये हैं वो चेहरे, जिन्होंने लौटाई नौगढ़ की रौनक
नौगढ़ के इन 104 गांवों के घरों में दोबारा रोशनी लौटाने के पीछे कमलेश, अशोक केसरी, पुष्पेंद्र, विजय यादव, बबलू, गुंजन, बंसी, मनीष, रामभवन, राजेश, राजकुमार, धर्मराज, मुंशी और हंसराज जैसे संविदा कर्मचारियों की दिन-रात की अटूट मेहनत है। इन अनसुने हीरोज ने शिकायत आने पर कभी समय या मौसम नहीं देखा, बल्कि सीधे ग्राउंड पर डटे रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या ऐसे जांबाज कर्मचारियों को सिर्फ संकट के समय ही याद किया जाएगा या इन्हें इनका असली सम्मान भी मिलेगा?

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