भाजपा विधायकों और सपा नेताओं के सामने गूंजा 'मंथरा' प्रसंग, चापलूसों से सावधान रहने की सीख बनी चर्चा
चंदौली के नौगढ़ में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन मानस मर्मज्ञ पंडित दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने सियासी और सामाजिक चेतना का बड़ा संदेश दिया। उन्होंने नेतृत्व को चापलूसों और गलत सलाहकारों से सावधान रहने की चेतावनी दी।
नौगढ़ में संगीतमय श्रीराम कथा
कथावाचक की सियासत को चेतावनी
चापलूसों को बताया आज की मंथरा
दो भाजपा विधायक रहे मौजूद
चौपालों पर चर्चा का बना विषय
चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में स्थित सतुआ बाबा सेवा आश्रम जमसोती में इन दिनों भक्ति की बयार बह रही है। यहाँ चल रही संगीतमय श्रीराम कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को नजारा कुछ अलग ही था। यह धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक चेतना के मंच में बदल गया। कथा के दौरान प्रभु श्रीराम के वनगमन और दासी मंथरा के प्रसंग का वर्णन करते हुए मानस मर्मज्ञ पंडित दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने एक ऐसा तीखा संदेश दिया, जिसकी चर्चा कथा पंडाल में बैठे दिग्गज नेताओं से लेकर आम जनता तक में होने लगी।
कथावाचक ने अपने पूरे प्रवचन के दौरान किसी भी राजनीतिक दल या नेता का सीधा नाम तो नहीं लिया, लेकिन उन्होंने एक ऐसा वाक्य कहा जिसने पूरे पंडाल में हलचल मचा दी। उन्होंने गंभीर लहजे में कहा, "संकट का क्षण है... सावधान हो जाइए, इस बार नहीं संभले तो 15 साल पीछे चले जाओगे।" महाराज की इस बात को वहां मौजूद लोगों ने सत्ता, विपक्ष और समाज के हर छोटे-बड़े नेतृत्वकर्ता के लिए समय रहते संभलने की एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा।
मंथरा प्रसंग से दी सीख, बाहरी दुश्मनों से नहीं बल्कि अपनों की गलत सलाह से गिरते हैं साम्राज्य
जमसोती आश्रम में चल रही कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने राजा दशरथ द्वारा श्रीराम के राजतिलक की अधूरी तैयारियों का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बेहद मार्मिक ढंग से वर्णन किया कि कैसे दासी मंथरा के बहकावे और कान भरने में आकर रानी कैकेयी ने अपना निर्णय बदल लिया, जिसके कारण मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को 14 वर्ष के वनवास पर जाना पड़ा।
उन्होंने आज के दौर की तुलना करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि दुनिया के बड़े-बड़े साम्राज्य बाहरी दुश्मनों के हमले से नहीं हारे, बल्कि वे अपने ही बीच छिपे स्वार्थी लोगों, भ्रम फैलाने वालों और गलत सलाह देने वाले चापलूसों की वजह से ढह गए। उन्होंने नेताओं को सीख देते हुए कहा कि जब एक राजा या नेतृत्वकर्ता सही और गलत सलाह के बीच का फर्क समझना बंद कर देता है, तब उसका भारी नुकसान पूरे समाज को आने वाले कई वर्षों तक भुगतना पड़ता है।
जब गूंजा "15 साल पीछे चले जाओगे..." तो पंडाल में छा गया सन्नाटा
कथा के बीच जब पंडित दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने कड़े शब्दों में कहा कि "नहीं संभले तो 15 साल पीछे चले जाओगे", तो एक पल के लिए पूरे पंडाल में सन्नाटा पसर गया और फिर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। खास बात यह थी कि जिस वक्त यह संदेश मंच से दिया जा रहा था, उस समय पंडाल की अगली कतार में भारत सरकार के पावर ग्रिड के स्वतंत्र निदेशक व पूर्व विधायक शिव तपस्या पासवान, चकिया विधानसभा के भाजपा विधायक कैलाश आचार्य, मुगलसराय (पीडीडीयूनगर) के विधायक रमेश जायसवाल, ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव और महंत गोविंद श्रीवास्तव सहित भाजपा और समाजवादी पार्टी के कई रसूखदार नेता चुपचाप बैठकर कथा सुन रहे थे।
कथा समाप्त होने के बाद भी पंडाल से बाहर निकलते समय नेताओं और जनता के बीच यही बात चलती रही कि महाराज ने बिना किसी का नाम लिए एक ही झटके में पूरी राजनीति और व्यवस्था को आईना दिखाकर सच से रूबरू करा दिया है।
चौपालों और बाजारों में चर्चा का विषय बनी महाराज की सीख
कथावाचक ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का पावन जीवन हमें सिखाता है कि किसी भी सत्ता से बड़ा धर्म होता है, किसी भी पद से बड़ी मर्यादा होती है और अपने निजी स्वार्थ से बड़ा यह समाज होता है। उन्होंने कहा कि मंथरा का यह प्रसंग सिर्फ त्रेतायुग की एक पुरानी कहानी नहीं है, बल्कि आज के दौर में भी यह हर परिवार, हर सामाजिक संगठन और हर राजनीतिक दल के लिए सबसे बड़ी सीख है।
अगर आज के दौर में भी फैसले निजी स्वार्थ, भ्रम और चापलूसी को देखकर लिए जाएंगे, तो विकास की रफ्तार पूरी तरह थम जाएगी। नौगढ़ की इस पावन रामकथा से निकला यह कड़ा संदेश अब जिले के गाँवों की चौपालों, बाजारों और राजनीतिक गलियारों की बैठकों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह केवल एक प्रवचन नहीं, बल्कि आने वाले समय का सच है जिससे नेतृत्व को बचना होगा।
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