नौगढ़ में रेंजर अमित श्रीवास्तव की अनूठी मुहिम, अब सिर्फ पौधे लगेंगे नहीं बल्कि पेड़ बनाने पर फोकस
चंदौली के नौगढ़ में जयमोहनी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव ने 'पौधे लगाकर भूलने' की पुरानी परंपरा को बदल दिया है। यहाँ 40 हेक्टेयर में हुए पौधारोपण को मॉडल बनाने के लिए सिंचाई से लेकर सुरक्षा तक की जिम्मेदारी तय की गई है।
नौगढ़ में बदलेगी पौधारोपण की सूरत
जयमोहनी रेंज बनेगा मॉडल केंद्र
हर पौधे की जिम्मेदारी हुई तय
40 हेक्टेयर में हुआ है पौधारोपण
स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए
अक्सर सरकारी वृक्षारोपण अभियानों पर यह सवाल उठते रहे हैं कि तस्वीरें खिंचवाने और आंकड़े गिनवाने के लिए पौधे तो लगा दिए जाते हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद उनका नामोनिशान नहीं मिलता। ऐसे माहौल में चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में जयमोहनी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) अमित कुमार श्रीवास्तव ने इस पुरानी परंपरा को बदलने का बीड़ा उठाया है। उनका साफ मानना है कि वृक्षारोपण की असली कामयाबी कागजी रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि सालों बाद जमीन पर खड़े पेड़ों से तय होती है। यही वजह है कि यहाँ 40 हेक्टेयर में किए गए पौधारोपण को अब एक "मॉडल वृक्षारोपण केंद्र" के रूप में विकसित किया जा रहा है।

रोपण खत्म होते ही शुरू हुआ असली काम
जयमोहनी रेंज के डुमरिया, मरवटिया और नौडीहवा इलाकों में पौधारोपण का काम पूरा होने के बाद वन विभाग शांत नहीं बैठा है। विभाग ने बिना समय गंवाए पौधों को बचाने का अभियान शुरू कर दिया है। पौधों को समय पर पानी देने के लिए पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई है और उनकी देखभाल के लिए खास तौर पर वाचरों (निगरानीकर्ताओं) की तैनाती की गई है। इसके साथ ही पौधों की समय-समय पर निराई-गुड़ाई, खाद और सुरक्षा की हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी तय कर दी गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा पौधे जीवित रहकर बड़ा पेड़ बन सकें।
ग्रामीणों को अपनी धरोहर मानने की अपील
इस अभियान को कामयाब बनाने के लिए रेंजर अमित श्रीवास्तव ने ग्रामीणों से सीधा संवाद भी शुरू कर दिया है। मंगलवार को मरवटिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में ग्राम प्रधान ब्रह्मा वनवासी की अध्यक्षता में एक बैठक की गई। बैठक में रेंजर ने ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कि पर्यावरण को बचाना सिर्फ वन विभाग का काम नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने हर परिवार से अपने खेत की मेड़ों पर कम से कम एक पौधा लगाने और इन पौधों को अपनी सामुदायिक संपत्ति मानकर इनकी रक्षा करने की अपील की।
स्थानीय पौधों से महकेगा नौगढ़ का जंगल
सामाजिक वानिकी योजना के तहत डुमरिया में 20 हेक्टेयर, जबकि मरवटिया और नौडीहवा में 10-10 हेक्टेयर जमीन पर पर्यावरण के अनुकूल पौधे लगाए गए हैं। इनमें आम, महुआ, इमली, अमरूद, चिलबिल और जंगल जलेबी जैसी स्थानीय प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी गई है। इन सभी पौधों की नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी, जिससे यह पता चल सके कि कौन सा पौधा कितना सुरक्षित है। रेंजर अमित श्रीवास्तव का कहना है कि हमारा मकसद सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि हर हाल में परिणाम देना है। अगर जयमोहनी रेंज का यह मॉडल पूरी तरह सफल रहता है, तो यह पूरे जिले के लिए हरियाली की एक नई मिसाल बनेगा।
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