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Road Accident: नौगढ़ में सैलून संचालक निजामुद्दीन की सड़क हादसे में घायल होने के बाद मौत, 5 दिन बाद वाराणसी के ट्रामा सेंटर में तोड़ा दम

नौगढ़ तहसील के देवखत गांव के सैलून संचालक निजामुद्दीन की डुमरिया मोड़ पर बाइक हादसे में मौत, 5 दिन वाराणसी ट्रामा सेंटर में चला इलाज, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया।

 
 

नौगढ़ में सैलून संचालक की मौत

दो मासूम बच्चे हुए अनाथ

डुमरिया मोड़ पर बाइक हादसा

5 दिन बाद वाराणसी में मौत

पत्नी सहाना का रो-रोकर बुरा हाल

चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील में एक सड़क हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। डुमरिया मोड़ पर बाइक से गिरकर घायल हुए 27 साल के युवक ने 5 दिन बाद वाराणसी में दम तोड़ दिया। हादसे के बाद से पूरे देवखत गांव में मातम पसरा है।

कैसे हुआ हादसा?

देवखत गांव निवासी सिराजुद्दीन का बेटा निजामु अपनी सैलून की दुकान चलाता था। वही उसके परिवार की रोजी-रोटी का सहारा था। 19 अक्टूबर की शाम वह सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज से दुकान का सामान लेकर बाइक से घर लौट रहा था। रात करीब 8 बजे जैसे ही वह डुमरिया मोड़ के पास पहुंचा, अचानक सड़क पर एक जंगली जानवर आ गया। उसे बचाने के चक्कर में बाइक अनियंत्रित हो गई और वह सड़क पर गिर गया। सिर में गंभीर चोट लगने से वह लहूलुहान हो गया।

हादसे के बाद वहां से गुजर रहे राहगीरों ने मानवता दिखाते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलाया और उसे सीएचसी नौगढ़ पहुंचाया। जहां डॉ. चंद्रा ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक देख उसे वाराणसी रेफर कर दिया।

नौगढ़ से वाराणसी तक 5 दिन चला इलाज

परिजन आनन-फानन में उसे लेकर वाराणसी ट्रॉमा सेंटर गए, जहां 5 दिनों तक डॉक्टर उसकी जान बचाने की कोशिश करते रहे। परिवार वाले उम्मीद लगाए बैठे थे कि निजामु ठीक हो जाएगा और घर लौट आएगा, लेकिन शनिवार को भोर में उसने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के काफी प्रयास के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया।

दो छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

निजामु अपने पीछे पत्नी सहाना और दो मासूम बेटों को छोड़ गया है। बड़ा बेटा 4 साल का और छोटा बेटा सिर्फ 2 साल का है। दोनों अभी इतने छोटे हैं कि उन्हें पता भी नहीं कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। पति की मौत की खबर सुनते ही पत्नी सहाना बदहवास हो गई।

छह साल पहले ही उसकी शादी हुई थी। बड़ी मेहनत से दोनों ने अपना छोटा सा परिवार बसाया था। सैलून की दुकान से घर का खर्च चलता था। अब निजामु के जाने के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में मां और पत्नी की चीख-पुकार से हर किसी की आंखें नम हो गईं।

गांव के लोगों ने बताया कि निजामु बहुत ही मिलनसार और मेहनती लड़का था। वह सबसे हंसकर मिलता था। उसके जाने से गांव में भी शोक की लहर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नौगढ़ के जंगली इलाके में सड़क पर अक्सर जंगली जानवर आ जाते हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। सड़क किनारे लाइट और संकेतक लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।

वहीं परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए लोगों ने सरकार से मदद की भी गुहार लगाई है।

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