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नौगढ़ समाधान दिवस में आ धमके सांसद छोटेलाल खरवार: बोले- अधिकारी बात सुन लें, हमें सुनाने पर मजबूर न करें

नौगढ़ तहसील के संपूर्ण समाधान दिवस में सोनभद्र सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार के कड़े तेवर देखने को मिले। जनता की शिकायतें सुन भड़के सांसद ने अधिकारियों को जमकर लताड़ा, जिसके बाद डीएम ने एसडीएम को गांव-गांव जाकर चौपाल लगाने का फरमान सुनाया।

 
 

समाधान दिवस में पहुंचे सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार

सड़क, मनरेगा और पानी के मुद्दों पर फूटा जनता का गुस्सा

भुगतान के बाद भी सड़क पटरी गायब होने पर उठे सवाल

डीएम ने दिए नौगढ़ एसडीएम को गांव-गांव चौपाल लगाने के निर्देश

लापरवाही बरतने वाले लेखपालों और अभियंताओं को दी गई सख्त चेतावनी

चंदौली  जिले के नौगढ़ तहसील में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस उस समय एक बड़ी जनचौपाल में बदल गया, जब सोनभद्र के सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार अचानक फरियादियों की भीड़ के बीच से होते हुए सीधे अधिकारियों के मंच पर पहुंच गए। वर्षों से अपनी जायज शिकायतों का बोझ ढो रहे गरीब ग्रामीणों को जैसे ही अपने 'गांव के बेटे' का साथ मिला, उनका हौसला बढ़ गया।

एक के बाद एक कतार में जब ग्रामीण अपनी पीड़ा बताने लगे, तो सांसद का भी धैर्य जवाब दे गया। कलेक्ट्रेट के बड़े अधिकारियों और जिलाधिकारी (DM) की मौजूदगी में सांसद ने साफ शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर अधिकारी जनता की बात समय पर सुन लें, तो हमें यहाँ आकर सुनाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। जनता की जो भी समस्याएं हैं, वे सिर्फ फाइलों में बंद नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीन पर हल होनी चाहिए।"

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'गांव का बेटा' सामने आया तो आधे घंटे बढ़ गया वक्त
नौगढ़ इलाके के दूर-दराज के गांवों से आए फरियादियों के बीच जब उनके सांसद खुद जमीन पर बैठ गए, तो पूरा माहौल ही बदल गया। कई बुजुर्ग और बेबस महिलाएं सीधे अपनी अर्जियां लेकर सांसद के पास पहुंच गईं। लोगों के बीच इस बात की चर्चा थी कि शिकायतें तो वे कई वर्षों से दे रहे थे, लेकिन पहली बार ऐसा मौका आया है जब उनकी बात सीधे उनके जनप्रतिनिधि के सामने खुलकर सुनी जा रही है।

यही वजह रही कि दोपहर के 2 बजे खत्म होने वाला सरकारी समाधान दिवस का समय करीब आधा घंटा और आगे बढ़ गया। सांसद की मौजूदगी और उनके कड़े रुख को देखते हुए वहां मौजूद सभी विभागों के जिम्मेदार अधिकारी भी पूरी गंभीरता से एक-एक फरियादी की शिकायत को नोट करते हुए नजर आए।

सड़क पटरी का पैसा खा गए इंजीनियर, डीएम ने किया तलब
सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा और गंभीर मामला कोईलरवा हनुमान मंदिर मार्ग का सामने आया। ग्रामीणों ने सांसद को सबूतों के साथ बताया कि इस मुख्य सड़क की पटरी मरम्मत के नाम पर सरकारी बजट से भारी धनराशि खर्च दिखा दी गई है। लेकिन हकीकत यह है कि कागजी भुगतान के एक साल बाद भी जमीन पर पटरी का कहीं कोई नामोनिशान तक नहीं है।

सड़क के किनारे जगह-जगह गहरे रेनकट बन चुके हैं और टूटे हुए किनारे रोज बड़े हादसों को खुला न्योता दे रहे हैं। इस रास्ते से गुजरने वाले श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। इस धांधली को सुनते ही सांसद ने डीएम से कड़ा सवाल किया कि आखिर भुगतान होने के बाद भी काम क्यों अधूरा है? इस पर डीएम ने मौके पर ही संबंधित अधिशासी अभियंता को तलब किया और एक हफ्ते के भीतर काम शुरू करने की डेडलाइन तय कर दी।

महिलाओं ने सुनाई दर्दभरी दास्तान: न काम है, न दवा और न पानी
सेमर साधोपुर गांव से बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने जब रोते हुए अपने गांव की बदहाली की दर्दनाक तस्वीर बयां की, तो पूरा सभागार सन्न रह गया। महिलाओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि उनके गांव में मनरेगा के तहत कोई काम नहीं दिया जा रहा है। गर्मियों के इस मौसम में पेयजल (पानी) का संकट लगातार गहराता जा रहा है और सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं भी उनके गांव तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

महिलाओं की इस मार्मिक पीड़ा को सुनकर सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार भावुक हो गए। उन्होंने अधिकारियों की तरफ देखते हुए कहा कि सरकार की इन बड़ी योजनाओं का असली उद्देश्य केवल सरकारी फाइलों में आंकड़े बढ़ाना नहीं है, बल्कि गरीब लोगों के जीवन स्तर में वास्तविक बदलाव लाना है।

DM का बड़ा एक्शन; SDM नौगढ़ को दिया गांव-गांव चौपाल का आदेश
ग्रामीणों और महिलाओं की इन लगातार आ रही गंभीर शिकायतों को बेहद गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मौके पर ही बड़ा फैसला सुनाया। डीएम ने तुरंत नौगढ़ के उपजिलाधिकारी (SDM) को अपने पास बुलाया और कड़े निर्देश जारी किए। डीएम ने आदेश दिया कि ग्राम विकास, स्वास्थ्य, पेयजल, राजस्व और अन्य सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाई जाए।

यह टीम अब सीधे गांवों का रुख करेगी और एसडीएम साहब खुद हर गांव में जाकर जनचौपाल लगाएंगे। वहां मौके पर ही ग्रामीणों की हर समस्या को सुना जाएगा और उसका तुरंत निस्तारण पक्का किया जाएगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेताया कि जनता को राहत देना ही प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है।

लापरवाह लेखपालों को चेतावनी; सिर्फ सुनवाई नहीं, आज था न्याय का दिन
इसके साथ ही, समाधान दिवस की इस जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने राजस्व विभाग के कुछ लेखपालों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए। लोगों का कहना था कि नामांतरण, जमीन की पैमाइश और आपसी भूमि विवाद से जुड़े छोटे-छोटे मामलों को भी ये कर्मचारी महीनों तक लटका कर रखते हैं और अनावश्यक देरी करते हैं।

सांसद ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से कहा कि जनता के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए और सभी शिकायतों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर ही होना चाहिए। कुल मिलाकर, नौगढ़ का यह समाधान दिवस केवल एक औपचारिक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह जनता के सब्र, जनप्रतिनिधि की ताकत और प्रशासनिक जवाबदेही की एक खुली परीक्षा का गवाह बन गया। परिसर से बाहर निकलते हुए लोग यही कह रहे थे कि आज पहली बार लगा कि सरकार ने हमारी बात सच में सुनी है।

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