चंदौली के स्कूल में 'रीलबाज' का आतंक या पोल खुलने का डर? पुलिस स्टेशन पहुंचा मामला
चंदौली के नौगढ़ में कंपोजिट विद्यालय बरबसपुर के अंदर एक युवक द्वारा लगातार रील बनाने से हड़कंप मचा है। हेडमास्टर ने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है, जबकि इलाके में चर्चा है कि मास्टर साहब पोल खुलने से डर रहे हैं।
नौगढ़ स्कूल में रीलबाज का खौफ
छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा खतरा
चकरघट्टा थाने पहुंची स्कूल की तहरीर
मिड डे मील व्यवस्था पर निगरानी
गांव की राजनीति से जुड़ा विवाद
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा आखिर किसके भरोसे है? चंदौली जिले के नौगढ़ विकासखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग से लेकर पुलिस महकमे तक खलबली मचा दी है। कंपोजिट विद्यालय बरबसपुर का यह पूरा विवाद अब थाने की चौखट तक पहुंच चुका है। स्कूल के प्रधानाध्यापक ने चकरघट्टा थाने में एक तहरीर देकर सुरक्षा की गुहार लगाई है।
प्रधानाध्यापक अभिषेक श्रीवास्तव का आरोप है कि मुबारक अली नाम का एक नाबालिग युवक पिछले तीन-चार दिनों से लगातार स्कूल परिसर में बिना इजाजत घुस रहा है। वह मोबाइल से स्कूल की हर गतिविधि का वीडियो बना रहा है। हेडमास्टर का कहना है कि इन वीडियो को सोशल मीडिया पर डालकर स्कूल का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।
छात्राओं की सुरक्षा और मिड डे मील पर मंडराया खतरा
पुलिस को दी गई शिकायत में प्रधानाध्यापक ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि इस स्कूल में छोटे-छोटे बच्चे और कक्षा आठ तक की छात्राएं पढ़ाई करती हैं। ऐसे में किसी भी बाहरी अनजान व्यक्ति का बार-बार स्कूल के अंदर आकर घूमना और वीडियो बनाना सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
तहरीर में यह भी आशंका जताई गई है कि स्कूल की बेहद संवेदनशील व्यवस्थाओं, जैसे कि बच्चों के लिए बनने वाले मिड डे मील (मध्यान्ह भोजन) पर भी इस तरह की हरकतों से बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि, गांव में इस बात की भी खूब चर्चा हो रही है कि मास्टर साहब को रीलबाज से असली डर है या फिर उन्हें अपनी पोल खुलने का खतरा सता रहा है।
शिक्षा विभाग की लापरवाही या गांव की राजनीति
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब सीधे तौर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि अगर कोई बाहरी शख्स कई दिनों तक स्कूल के अंदर बेधड़क आता-जाता रहा, तो वहां के स्टाफ और सुरक्षा इंतजाम क्या कर रहे थे? क्या सरकारी स्कूलों में आने-जाने वालों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता?
शिकायत में यह बात भी कही गई है कि यह पूरा मामला गांव की आपसी राजनीति से जुड़ा हुआ हो सकता है। दूसरी तरफ, आम लोगों का मानना है कि अगर कोई शख्स सरकारी स्कूल की कमियों या अव्यवस्थाओं को उजागर कर रहा है, तो उसका पक्ष भी सामने आना चाहिए। अब यह पूरी तरह से पुलिस की निष्पक्ष जांच का विषय है कि आखिर सच क्या है।
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