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सांप के काटने पर 2 घंटे तक तांत्रिक पढ़ता रहा मंत्र, तड़प-तड़प कर बच्चे ने तोड़ा दम..CHC के लिए 108 एंबुलेंस तैयार थी

चंदौली के नौगढ़ में अंधविश्वास के कारण एक 8 साल के मासूम की जान चली गई। सांप काटने के बाद परिजन एंबुलेंस बुलाने या अस्पताल जाने के बजाय 2 घंटे तक तांत्रिक से झाड़-फूंक कराते रहे, जिससे बच्चे की मौत हो गई।

 
 

उदितपुर सुर्रा गांव में सांप काटने से मासूम की मौत

आंगन में सोने जा रहे 8 वर्षीय कार्तिक को सर्पदंश

अस्पताल ले जाने के बजाय 2 घंटे तक चली झाड़-फूंक

CHC नौगढ़ में डॉक्टरों ने कार्तिक को घोषित किया मृत

स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध है एंटी स्नेक वेनम

चंदौली जिले में बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं और 108 एंबुलेंस के लाख दावों के बाद भी आज के दौर में अंधविश्वास लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। इसका एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला उदाहरण शनिवार की रात नौगढ़ के उदितपुर सुर्रा गांव में देखने को मिला। यहाँ सांप के काटने से 8 साल के मासूम कार्तिक (पुत्र हरवंश) की मौत हो गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटनास्थल से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नौगढ़ सिर्फ 15 किलोमीटर दूर था और 108 एंबुलेंस की सुविधा भी पूरी तरह उपलब्ध थी। इसके बावजूद परिजन आधुनिक इलाज कराने के बजाय करीब 2 घंटे तक बच्चे को तांत्रिक के भरोसे छोड़कर झाड़-फूंक कराते रहे।

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"पहले झाड़-फूंक... फिर अस्पताल" की सोच बनी जानलेवा‌
यह पूरी घटना शनिवार रात करीब 9 बजे की है। 8 साल का कार्तिक खाना खाकर अपने घर के आंगन में सोने जा रहा था, तभी अचानक उसे एक जहरीले सांप ने काट लिया। जैसे ही गांव में यह बात फैली, लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। लेकिन वैज्ञानिक और आधुनिक इलाज को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए परिजनों ने सबसे पहले गांव के ही एक तांत्रिक को बुला लिया। रात 9 बजे से लेकर 11 बजे तक तांत्रिक के मंत्र, टोटके और झाड़-फूंक का खेल चलता रहा। जब जहर पूरे शरीर में फैल गया और बच्चे ने सांस लेना बंद कर दिया, तब जाकर घरवाले आनन-फानन में उसे बाइक पर लादकर CHC नौगढ़ भागे। अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉ. चंद्र कुमार ने बच्चे को तुरंत एंटी स्नेक वेनम के 8 डोज दिए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और बच्चे की मौत हो गई।

डॉक्टर का बड़ा सवाल: जब सुविधा थी, तो इतनी देर क्यों की?
CHC नौगढ़ के डॉक्टर चंद्र कुमार ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा, "हमारे अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की टीम, 108 एंबुलेंस और सांप के जहर को काटने वाली दवा 'एंटी स्नेक वेनम' हर वक्त उपलब्ध रहती है। अगर सांप काटने के 1 घंटे के भीतर मरीज को अस्पताल ले आया जाए, तो 99 प्रतिशत मामलों में उसकी जान बचाई जा सकती है। लेकिन लोग आज भी तांत्रिकों और अंधविश्वास के चक्कर में अपना सबसे कीमती समय बर्बाद कर देते हैं।" उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार की बात नहीं है, बल्कि अब पूरे नौगढ़ क्षेत्र के लोगों को अपनी इस पुरानी सोच को बदलने की सख्त जरूरत है।

रोते हुए पिता बोले- "हमारे अनपढ़ होने और डर ने बच्चे को मार डाला"
कार्तिक की मौत के बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। मृतक के पिता हरवंश सिर पकड़कर फूट-फूट कर रो रहे थे। उन्होंने रोते हुए कहा, "सांप काटते ही गांव वालों ने दबाव बनाया कि पहले झाड़-फूंक करा लो। हम लोग अनपढ़ हैं और डर के मारे सीधे अस्पताल नहीं जा पाए। काश! हम किसी की बात न मानकर सीधे अपने बच्चे को अस्पताल ले आते तो आज हमारा बेटा हमारे साथ होता।" कार्तिक की माँ प्रमिला का भी रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे उदितपुर सुर्रा गांव में इस घटना के बाद मातम पसरा हुआ है।

सांप काटे तो भूलकर भी न करें ये गलतियां, ऐसे बचाएं जान:

तुरंत करने वाले काम:

बिल्कुल घबराएं नहीं, मरीज को सीधा लिटाएं और उसे ज्यादा हिलने-डुलने न दें।

तुरंत 108 नंबर पर कॉल करें, एंबुलेंस बहुत जल्द आपके पास पहुंच जाएगी।

बिना एक सेकंड गंवाए सीधे सरकारी अस्पताल (CHC या जिला अस्पताल) पहुंचें, जहाँ इसका पूरा इलाज मुफ्त है।

भूलकर भी ये न करें:

तांत्रिकों के चक्कर में पड़कर झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें।

सांप काटने वाली जगह पर चीरा न लगाएं और न ही मुंह से जहर चूसने की कोशिश करें।

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