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नौगढ़ में दहशत: 25 दिनों में 168 लोगों को जानवरों ने काटा, आवारा कुत्तों के खौफ से सहमे स्कूली बच्चे और अभिभावक

चंदौली के नौगढ़ में आवारा कुत्तों और हिंसक जानवरों का आतंक खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। महज 25 दिनों में 168 लोग इनके हमले का शिकार हो चुके हैं, जिससे स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर परिवार डरा हुआ है।

 
 

नौगढ़ इलाके में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक

महज 25 दिनों में 168 लोग बने शिकार

स्कूल जाने वाले बच्चों के पीछे दौड़ रहे कुत्ते

बिल्ली, बंदर और सियार भी कर रहे हमला

अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन की भारी मांग

 नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही इलाके के स्कूल पूरी तरह खुल चुके हैं और बच्चे रोज सुबह पढ़ाई के लिए घरों से निकल रहे हैं। लेकिन, उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील में इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा पढ़ाई का नहीं, बल्कि मासूम बच्चों की सुरक्षा का बन गया है। नौगढ़ के गांवों की गलियों, स्थानीय बाजारों और स्कूल जाने वाले रास्तों पर आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि लोग घरों से बाहर पैर निकालने में भी कतराने लगे हैं।

सिर्फ 25 दिनों में 168 लोग हुए घायल
इस सुदूर इलाके में हालात कितने ज्यादा गंभीर और डरावने हो चुके हैं, इसका अंदाजा आप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नौगढ़ के सरकारी आंकड़ों से बहुत आसानी से लगा सकते हैं। यहाँ सिर्फ 1 जून से 25 जून के बीच यानी महज 25 दिनों के भीतर ही 168 लोगों को आवारा कुत्तों और अन्य हिंसक जानवरों के काटने के बाद एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगाना पड़ा है। यह चौंकाने वाला आंकड़ा साफ गवाही दे रहा है कि यह कोई आम बात नहीं, बल्कि एक बड़ा जनसुरक्षा संकट है।

अभिभावकों के मन में बैठा गहरा डर
रोज सुबह जब छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं या दोपहर में जब उनकी छुट्टी होती है, तो इन खूंखार आवारा कुत्तों का झुंड उनके पीछे दौड़ने लगता है। ऐसी डरावनी घटनाएं अब यहाँ रोज की बात हो चुकी हैं। यही वजह है कि जब तक बच्चे सही-सलामत स्कूल से घर वापस नहीं लौट आते, तब तक उनके माता-पिता और अभिभावक गहरी चिंता और सहम में डूबे रहते हैं। हर परिवार के मन में बस यही सवाल घूम रहा है कि आखिर इस लापरवाही पर प्रशासन कब जागेगा?

बिल्लियों, बंदरों और सियार का भी हिंसक हमला
जंगल से सटे होने के कारण नौगढ़ क्षेत्र में वैसे तो हमेशा जंगली जानवरों का डर बना रहता है, लेकिन अब घरेलू और आवारा जानवर भी बेहद हिंसक हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो इन 25 दिनों में 92 लोगों को आवारा कुत्तों, 41 लोगों को पालतू कुत्तों, 17 लोगों को बिल्लियों, 13 लोगों को बंदरों और 5 लोगों को जंगली सियार ने अपना शिकार बनाया है। औसतन देखा जाए तो हर दिन कई लोग लहूलुहान होकर तड़पते हुए अस्पताल पहुँच रहे हैं।

अंधविश्वास और झाड़-फूंक से बचें
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को अलर्ट कर रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अवधेश पटेल ने मीडिया को बताया कि गांव-गांव में एएनएम के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। डॉक्टरों की सख्त सलाह है कि किसी भी जानवर के काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के अंधविश्वास वाले चक्कर में न पड़ें। सबसे पहले प्रभावित स्थान को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और तुरंत अस्पताल आकर एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाएं, क्योंकि यही जान बचाने का एकमात्र वैज्ञानिक तरीका है।

अस्पताल में तो दवा है, पर सड़कों पर सुरक्षा कौन देगा?
अस्पताल में जाकर सिर्फ इंजेक्शन लगवा लेना इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़कों पर खुलेआम घूम रहे इन खूंखार कुत्तों से जनता को सुरक्षा कौन देगा? स्थानीय निवासियों की मांग है कि स्कूल के रास्तों, बाजारों और घनी आबादी वाले इलाकों में तुरंत विशेष अभियान चलाकर इन आवारा कुत्तों को पकड़ा जाए। अगर प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो यहाँ कभी भी कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता है।

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