SDM के तबादले के बाद अब DM के दौरे का खौफ: नौगढ़ तहसील में रातभर जल रहीं बत्तियां, खंगाली जा रही हैं फाइलें
नौगढ़ SDM के तबादले के बाद 20 जून को DM चंद्र मोहन गर्ग के संभावित दौरे से तहसील प्रशासन में हड़कंप है। IGRS पोर्टल की 373 असंतुष्ट शिकायतों ने अफसरों और लेखपालों की रात की नींद उड़ा दी है।
एसडीएम के तबादले के बाद बढ़ी हलचल
20 जून को डीएम का प्रस्तावित दौरा
आईजीआरएस की 373 शिकायतों से बेचैनी
तहसीलदार राहुल सिंह ने खुद संभाला मोर्चा
रात-रात भर खुल रहीं राजस्व फाइलें
चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील में इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में भारी खौफ और हलचल का माहौल है। तीन दिन पहले ही यहाँ के एसडीएम विकास मित्तल का अचानक तबादला कर दिया गया था, जिससे तहसील कर्मी अभी उबर भी नहीं पाए थे कि अब आगामी 20 जून को संपूर्ण समाधान दिवस पर जिलाधिकारी (DM) चंद्र मोहन गर्ग के प्रस्तावित दौरे की आहट ने पूरे तहसील प्रशासन को हाई अलर्ट मोड पर ला दिया है। हालत यह है कि नौगढ़ तहसील कार्यालय में इन दिनों देर रात तक बत्तियां जल रही हैं और अफसर कुर्सियों पर डटे हुए हैं।
373 आईजीआरएस शिकायतों ने बढ़ाई अफसरों की बेचैनी
इस भारी हलचल और बेचैनी की सबसे बड़ी वजह आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर सामने आई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट है। तहसील प्रशासन ने जिन मामलों को पोर्टल पर निस्तारित (हल) दिखाकर फाइल बंद कर दी थी, जब उन पर शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लिया गया तो असलियत सामने आ गई। कुल 373 मामलों में शिकायतकर्ताओं ने पुलिस और राजस्व विभाग की कार्रवाई पर पूरी तरह असंतोष जताया, जिसके बाद ये सभी मामले दोबारा पेंडिंग (लंबित) श्रेणी में आ गए। अब अधिकारियों को डर है कि अगर डीएम ने सीधे पूछ लिया कि मौके पर जांच करने कौन गया था, तो जवाब देना भारी पड़ जाएगा।
तहसीलदार राहुल सिंह ने खुद संभाला मोर्चा
मामले की गंभीरता और शासन स्तर पर होने वाली किरकिरी से बचने के लिए तहसीलदार राहुल सिंह खुद मैदान में उतर गए हैं। वे देर रात तक दफ्तर में बैठकर वरासत, नामांतरण, पैमाइश, अवैध कब्जा विवाद और जमीन से जुड़े अन्य गंभीर राजस्व मामलों की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। जिन 373 प्रकरणों में जनता ने असंतोष जताया है, उनके निस्तारण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए कर्मचारियों की क्लास लगाई जा रही है।
गांव-गांव दौड़ रहे लेखपाल, पुरानी फाइलें हुईं री-ओपन
जिलाधिकारी के कड़े रुख को देखते हुए जो राजस्व अमला महीनों से सुस्त पड़ा था, वह अब गांव-गांव दौड़ता नजर आ रहा है। लेखपालों की अचानक बढ़ी आवाजाही को देखकर ग्रामीण भी हैरान हैं। वन भूमि विवाद से लेकर अतिक्रमण और वरासत की जो पुरानी फाइलें धूल फांक रही थीं, उन्हें फिर से खंगाला जा रहा है। क्षेत्र के लोगों के बीच चर्चा है कि यदि प्रशासन ऐसी ही मुस्तैदी और जवाबदेही पहले दिखाता, तो आज सैकड़ों शिकायतें इस तरह दोबारा पेंडिंग न होतीं।
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