'सोनभद्र में एसटी, तो चंदौली में ओबीसी क्यों?' नौगढ़ तहसील में महिलाओं का भारी हंगामा, तहसीलदार के बयान पर छिड़ा नया विवाद
चंदौली के नौगढ़ में एसटी प्रमाणपत्र की मांग को लेकर महिलाओं ने तहसील पर जोरदार प्रदर्शन किया। तहसीलदार राहुल सिंह के एक बयान कि 'सोनभद्र के एसटी प्रमाणपत्र भी निरस्त होंगे' ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
परसिया गांव की महिलाओं का हंगामा
एसटी जाति प्रमाणपत्र की उठी मांग
तहसीलदार के बयान से बढ़ा विवाद
300 प्रमाणपत्रों पर मंडराया संकट
1359 फसली रिकॉर्ड बना पेंच
चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील में गुरुवार को अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाणपत्र जारी करने की मांग को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया। तहसील परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब परसिया गांव की दर्जनों महिलाओं ने वहां पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन शुरू कर दिया। महिलाओं का सीधा और तीखा आरोप था कि उनके ही समुदाय के लोगों को पड़ोसी जिले सोनभद्र में अनुसूचित जनजाति (ST) का पूरा लाभ मिल रहा है, जबकि चंदौली जिला प्रशासन उन्हें इस हक से वंचित रख रहा है।
इस प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे तहसीलदार राहुल सिंह ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उनके एक बयान ने जलती आग में घी का काम कर दिया। तहसीलदार ने कहा कि केवल चंदौली ही नहीं, बल्कि सोनभद्र में भी पहले से जारी किए जा चुके एसटी प्रमाणपत्रों की बारीकी से समीक्षा की जा रही है और नियमों के खिलाफ बने ऐसे प्रमाणपत्रों को निरस्त (कैंसिल) करके ओबीसी (OBC) प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया गतिमान है। इस बयान के बाद प्रदर्शन कर रही महिलाओं का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया।
1359 फसली खतौनी का फंसा पेंच, गोड़ और माझी समुदाय के बीच उलझा मामला
यह पूरा विवाद महिला स्वास्थ्य अधिकार मंच की कोऑर्डिनेटर नीतू सिंह के नेतृत्व में शुरू हुआ, जहां करीब 35 महिलाएं अपनी मांगों को लेकर अड़ गईं। महिलाओं ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने सवाल दागा कि जब सूबा एक है और समुदाय भी एक है, तो फिर दो अलग-अलग जिलों में दो तरह के कानून क्यों लागू किए जा रहे हैं?
इस पर प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि शासन के नियमों के मुताबिक, प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदकों से वर्ष 1359 फसली का पुराना खतौनी रिकॉर्ड मांगा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अगर पुराने अभिलेखों और खतौनी में परिवार का विवरण 'गोड़' समुदाय के रूप में दर्ज मिलता है, तो उन्हें नियमानुसार एसटी प्रमाणपत्र दे दिया जाएगा। लेकिन, यदि दस्तावेजों में जाति 'माझी' समुदाय दर्ज पाई जाती है, तो उन्हें ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की श्रेणी में ही रखा जाएगा।
परसिया गांव के 300 प्रमाणपत्रों पर मंडराया संकट
तहसीलदार राहुल सिंह ने महिलाओं के सामने साफ किया कि अकेले परसिया गांव में ही पूर्व में जारी किए गए करीब 300 एसटी प्रमाणपत्रों की एक सूची तैयार की गई है, जिनकी जांच की जा रही है। यदि जांच के दौरान वर्ष 1359 की खतौनी से मिलान सही नहीं पाया गया, तो इन सभी के एसटी प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए जाएंगे और उनकी जगह पात्रता के अनुसार केवल ओबीसी सर्टिफिकेट ही जारी किए जाएंगे।
प्रशासन के इस कड़े रुख को देखते हुए अनीता, रमिता, प्रभावती, सीता और संजना समेत आंदोलन में शामिल महिलाओं ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि उनके समुदाय के साथ यह भेदभाव तुरंत बंद नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को सड़क से लेकर सदन तक ले जाने के लिए मजबूर होंगी। अब यह मामला केवल एक जाति प्रमाणपत्र की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता का एक बड़ा सियासी मुद्दा बनता जा रहा है।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*








