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नौगढ़ में चुनावी रंजिश की भेंट चढ़ी विधवा की नौकरी, प्रधान प्रतिनिधि और हेडमास्टर ने 17 साल की सेवा के बाद स्कूल से निकाला

चंदौली के नौगढ़ में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। पंचायत चुनाव की रंजिश में 17 साल से कार्यरत विधवा रसोइया को नौकरी से निकाल दिया गया। हेडमास्टर की अजीबोगरीब शर्त ने सबको हैरान कर दिया है।

 

17 साल की सेवा के बाद विधवा रसोइया को निकाला

प्रधान प्रतिनिधि पर चुनावी रंजिश का गंभीर आरोप

हेडमास्टर ने नौकरी के लिए रखी बच्चे के एडमिशन की शर्त

पीड़ित महिला का सवाल- "अब बच्चे कहाँ से लाऊं?"

जनकपुर प्राथमिक विद्यालय में सियासी खींचतान का मामला

चंदौली जनपद के नौगढ़ स्थित जनकपुर प्राथमिक विद्यालय में पंचायत चुनाव की आपसी रंजिश के कारण एक विधवा रसोइया की नौकरी छीनने का मामला तूल पकड़ रहा है। आरोप है कि 17 वर्षों से निष्ठापूर्वक सेवा दे रही विधवा कुमारी को प्रधान प्रतिनिधि के इशारे पर बिना किसी पूर्व सूचना के निकाल दिया गया है।

                                                                 

हेडमास्टर की अजीब शर्त और विधवा का दर्द
पीड़ित महिला का कहना है कि जब उन्होंने नौकरी बहाली की गुहार लगाई, तो हेडमास्टर ने कथित तौर पर शर्त रखी कि "अपने बच्चों का एडमिशन स्कूल में कराओ, तभी नौकरी मिलेगी।" इस पर विधवा कुमारी का दर्द छलक उठा; उन्होंने सवाल किया कि इस उम्र और विधवा अवस्था में वह बच्चे कहाँ से पैदा करें?

सियासी रंजिश का शिकार हुई शिक्षा व्यवस्था
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा आम है कि यह पूरा मामला महज प्रशासनिक नहीं बल्कि चुनावी रंजिश से प्रेरित है। सत्ता की खींचतान और स्थानीय राजनीति के चलते एक लाचार महिला की जीविका संकट में डाल दी गई है। फिलहाल इस मामले को लेकर विद्यालय प्रशासन और विभाग के प्रति लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।

नौगढ़ में पंचायत चुनाव की राजनीति में विधवा रसोइया की चली गई नौकरी ......
हेड मास्टर ने कहा, बच्चों का एडमिशन कराओ तभी मिलेगी नौकरी .....
विधवा कुमारी का छलका दर्द,  अब बच्चे कहां से पैदा करूं

जनकपुर प्राथमिक विद्यालय में रसोइया निष्कासन का मामला पंचायत चुनाव की सरगर्मी के बीच सियासी रंग लेता दिख रहा है। आरोप है कि चुनावी रंजिश में 17 साल से कार्यरत विधवा महिला की रोजी-रोटी छीन ली गई। गांव में इसे लेकर चर्चा तेज है और लोग इसे सत्ता की खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं।

17 साल की सेवा के बाद विधवा रसोइया को बिना नोटिस निकाला 
प्रधान प्रतिनिधि पर चुनावी रंजिश में हटवाने का आरोप
“बच्चे का एडमिशन कराओ तभी नौकरी मिलेगी 

 चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में प्राथमिक विद्यालय जनकपुर में 17 वर्षों तक बच्चों के लिए भोजन बनाने वाली एक विधवा महिला आज खुद दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। वर्ष 2008-09 में चयनित कुमारी देवी (पत्नी स्व. राजकुमार) को बिना किसी लिखित नोटिस और बिना कारण बताए अचानक पद से हटा दिया गया। मई 2025 तक नियमित सेवा देने के बाद जब वह ग्रीष्मावकाश समाप्त होने पर जून में विद्यालय पहुंचीं, तो उन्हें कथित रूप से यह कहकर लौटा दिया गया—“आपको निकाल दिया गया है, अब स्कूल मत आइए। 


 17 साल की सेवा का यही इनाम? 
करीब सत्रह वर्षों तक विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों का पेट भरने वाली महिला को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। पीड़िता का कहना है कि न तो उन्हें कोई लिखित आदेश मिला और न ही किसी बैठक की सूचना दी गई। रोज सुबह समय से पहुंचकर चूल्हा जलाने वाली महिला को अब स्कूल के गेट पर ही रोक दिया जाता है। ग्रामीणों में भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक विधवा महिला के साथ ऐसा व्यवहार न्यायोचित है? 


 प्रधान प्रतिनिधि रवि पांडे पर सीधा आरोप 
कुमारी देवी का आरोप है कि प्रधान प्रतिनिधि द्वारा पंचायत चुनाव की रंजिश में उन्हें हटवाया गया। उनका कहना है कि बीच-बीच में उन्हें धमकी दी जाती थी कि “देख लेंगे, नौकरी चली जाएगी।” अब अचानक हटाए जाने के बाद महिला इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही हैं। गांव में भी चर्चा है कि पंचायत चुनाव की तैयारी के बीच यह कार्रवाई हुई है। 


 हेडमास्टर के कथन से छलका दर्द
सबसे मार्मिक क्षण तब आया जब पीड़िता ने बताया कि उनसे कथित रूप से कहा गया— बच्चों का एडमिशन कराओ तभी नौकरी मिलेगी।  यह सुनकर महिला की आंखें भर आईं और उन्होंने दर्द भरे स्वर में कहा—“मेरा पति मर चुका है, अब मैं बच्चे कहां से पैदा करूं?  यह कथन अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। 


 भुखमरी की कगार पर पहुंचा जीवन, इलाज में बिक गई पैतृक जमीन 
पति के इलाज में अधिकांश पैतृक जमीन बिक चुकी है। आज उनके पास केवल घर बनाने भर की जमीन बची है। आय का कोई स्थायी साधन नहीं है और नौकरी छिन जाने के बाद जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया है। महिला का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारी और उपजिलाधिकारी से कई बार गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 

 भीम आर्मी ने लिया संज्ञान
मामले को लेकर भीम आर्मी ने संज्ञान लेते हुए चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की तो जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही सांसद चन्द्रशेखर आजाद को पत्र लिखकर मामला सदन तक उठाने की बात कही गई है। सवाल यह है कि क्या 17 वर्षों तक बच्चों का पेट भरने वाली विधवा महिला को न्याय मिलेगा, या पंचायत की राजनीति उसके जीवन पर भारी पड़ती रहेगी? अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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