चंदौली समाचार की खबर का असर : डीएम की सख्ती के बाद दौड़ते-भागते नौगढ़ ब्लॉक पहुंचे बीडीओ विकास सिंह
नौगढ़ ब्लॉक की बदहाली पर खबर चलते ही प्रशासन में खलबली मच गई। ऐसी चर्चा है कि डीएम चंद्र मोहन गर्ग व सीडीओ साहब की नाराजगी के बाद बीडीओ विकास सिंह आनन-फानन में नौगढ़ पहुंचे और बंद पंचायत भवनों को खोलने का कड़ा अल्टीमेटम जारी किया।
'चंदौली समाचार' की खबर का दिखा सबसे बड़ा असर
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की नाराजगी से मचा हड़कंप
महीनों से नदारद बीडीओ अचानक पहुंचे नौगढ़ ब्लॉक
बदहाल और बंद पंचायत सचिवालयों को खोलने का निर्देश
जनता करती रही इंतजार, बंद कमरे में हुई 'खास' बैठक
चंदौली जिले के नौगढ़ विकासखंड की चरमराई और बदहाल प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर जब "चंदौली समाचार" ने प्रमुखता से जनता की आवाज उठाई, तो पूरे ब्लॉक मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक खलबली मच गई। "आखिर किसके भरोसे चल रहा नौगढ़, फाइलों में विकास कर रहे हैं विकास सिंह" शीर्षक से प्रकाशित खोजी खबर ने उस कड़वी हकीकत को उजागर कर दिया, जिसे स्थानीय स्तर पर लंबे समय से दबाने और छिपाने का प्रयास किया जा रहा था।
खबर डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर आते ही तेजी से वायरल हो गई। जैसे ही यह मामला जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग और सीडीओ साहब के संज्ञान में पहुंचा, उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। डीएम की सख्ती का असर यह हुआ कि जो अधिकारी कई दिनों से ब्लॉक से नदारद थे और जनता को नजरअंदाज कर रहे थे, वे शुक्रवार को दौड़े-भागे नौगढ़ ब्लॉक मुख्यालय पहुंच गए। इसके बाद आनन-फानन में पंचायत सचिवों की आपातकालीन बैठक बुलाई गई और बंद पड़े पंचायत भवनों को तुरंत खोलने के सख्त निर्देश दिए गए।
बहानों पर लगी डांट, मातहतों पर दिखाई गई सख्ती
समीक्षा बैठक के दौरान जमीनी हकीकत और बुनियादी कमियों का मामला भी सामने आया। एक स्मार्ट पंचायत सचिव ने जब कंप्यूटर खराब होने, टूटी खिड़कियों और संसाधनों की कमी का रोना रोया, तो खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) विकास सिंह ने इन बहानों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में काम करने की नसीहत दी और हर हाल में कंप्यूटर को चालू रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सहायक विकास अधिकारी (एडो पंचायत) उपेंद्र साहनी को भी ग्रामीण व्यवस्था को दुरुस्त न रख पाने को लेकर कड़ी फटकार लगाई गई। हालांकि, गलियारों में यह चर्चा आम रही कि बुनियादी सुविधाओं के बिना डिजिटल सिस्टम का यह फरमान जमीन से ज्यादा केवल फाइलों में ही मुमकिन दिखता है।
पांच घंटे तक चली 'खास' बैठक पर उठे सवाल
ब्लॉक मुख्यालय पहुंचे बीडीओ साहब की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए जब वे करीब पांच घंटे तक कुछ चुनिंदा प्रधानों और अपने करीबी लोगों के साथ बंद कमरे में 'खास' बैठक करते रहे। ग्रामीण इस बात पर तंज कसते नजर आए कि सुबह से जो जनता अपनी समस्याओं को लेकर साहब का इंतजार कर रही थी, उन्हें समय देने के बजाय खबर के डैमेज कंट्रोल के लिए "खास लोगों" के साथ मीटिंग को प्राथमिकता दी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों की बदहाली महीनों तक फाइलों में घूमती रहती है, लेकिन जैसे ही कुर्सी हिलाने वाली कोई खबर सामने आती है, प्रशासनिक अमला बड़ी तेजी से सक्रिय हो जाता है। "चंदौली समाचार" हमेशा चमचमाती फाइलों के बजाय जनता की जमीनी पीड़ा को दिखाता रहेगा।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*








