नौगढ़ हिंसा पर गरजे सांसद छोटेलाल खरवार, कहा- 'गरीबों को उजाड़कर फिर नक्सली बनाने की साजिश'
नौगढ़ के भरदुआ में वन भूमि विवाद पर सोनभद्र सांसद छोटेलाल खरवार ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने गरीबों पर लाठीचार्ज का विरोध करते हुए 2027 के चुनाव में इसका हिसाब करने की चेतावनी दी है।
भरदुआ की घटना पर भड़के सांसद
100 बीघे वालों पर बुलडोजर क्यों नहीं
गरीबों को फिर नक्सली बनाने की कोशिश
सड़क से सदन तक लड़ाई का ऐलान
2027 के चुनाव में होगा हिसाब
चंदौली जिले के नौगढ़ स्थित भरदुआ गांव में हुई कार्रवाई के बाद मामला अब सिर्फ जंगल और जमीन का नहीं रह गया है, बल्कि इसने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। सोनभद्र के सपा सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार ने जिस तरह प्रशासन और सरकार पर हमला बोला है, उससे भरदुआ का विवाद सीधे सियासी गलियारे में पहुँच गया है। पीड़ित महिलाओं से मिलते हुए सांसद ने दिलासा दिया और कहा, "रोइए मत... आपका बेटा अभी जिंदा है।"
सपा सांसद छोटेलाल खरवार का ऐलान
— Chandauli Samachar (@chandaulinews) August 21, 2026
भरदुआ की घटना पर भड़के सांसद
100 बीघे वालों पर बुलडोजर क्यों नहीं
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'100 बीघे वालों पर बुलडोजर क्यों नहीं, 2 बीघे वाले पर लाठी क्यों?'
सांसद छोटेलाल खरवार ने जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सीधा सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर जंगल की जमीन पर कब्जे हटाए जा रहे हैं, तो बड़े-बड़े रसूखदारों के 100-100 बीघे में बने मकानों पर बुलडोजर क्यों नहीं चला? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन सिर्फ गरीब, असहाय और वनवासी परिवारों के घरों और खेतों को ही निशाना बना रहा है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
'गरीबों को उजाड़कर फिर से नक्सली बनाने की कोशिश'
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के दिनों को याद करते हुए सांसद ने कहा कि 2004 में मुलायम सिंह जी ने नौगढ़ आकर मुख्यधारा से भटके लोगों को गले लगाया था और वनवासी बेटी बासमती को अपनी दत्तक पुत्री बनाया था। सांसद का आरोप है कि आज उसी क्षेत्र में गरीबों के साथ मारपीट करके और उन्हें उजाड़कर व्यवस्था के खिलाफ भड़काया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में फिर से असंतोष फैल सकता है।
सड़क से लेकर सदन तक होगी आर-पार की लड़ाई
सांसद ने कड़े लहजे में कहा, "मैं छोटेलाल हूं, किसी से डरता नहीं।" उन्होंने प्रशासन को साफ चेतावनी दी कि अगर गरीब और वनवासी परिवारों के साथ न्याय नहीं हुआ, तो इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक उठाया जाएगा। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में सरकार बदलने पर पीड़ितों को पूरा न्याय दिलाया जाएगा और इस कार्रवाई का हिसाब होगा।
विपक्ष बनाम सरकार का नया चुनावी हथियार
सांसद का यह आक्रामक बयान इस पूरे विवाद को विपक्ष बनाम सरकार की लड़ाई में बदलता दिख रहा है। एक तरफ जहाँ वन विभाग और प्रशासन इसे सरकारी वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने की रूटीन कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी सांसद इसे गरीब-आदिवासी उत्पीड़न का मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रहे हैं। अब देखना यह है कि भरदुआ का यह मामला शांत होता है या आने वाले चुनाव में बड़ा मुद्दा बनता है।
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