नौगढ़ के संपूर्ण समाधान दिवस में 80 में से सिर्फ 6 का हुआ निपटारा, BEO की आंखें बंद किए फोटो वायरल
चंदौली के नौगढ़ समाधान दिवस में 80 में से सिर्फ 6 शिकायतों का मौके पर निपटारा हुआ। इसी बीच बीडीओ की आंखें बंद किए एक तस्वीर वायरल होने से सरकारी दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
80 में से सिर्फ 6 शिकायतें निपटीं
74 फरियादी फिर आश्वासन लेकर लौटे
बीडीओ राकेश सिंह की तस्वीर वायरल
राजस्व विभाग के सबसे ज्यादा मामले
एसडीएम विनय मिश्रा की सख्त हिदायत
सरकार चाहे लाख दावे करे कि 'सम्पूर्ण समाधान दिवस' के जरिए जनता की समस्याओं का तुरंत निपटारा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील में आयोजित समाधान दिवस में एक बार फिर सरकारी दावों की पोल खुल गई। यहां दूर-दराज के गांवों से अपनी फरियाद लेकर पहुंचे 80 लोगों में से सिर्फ 6 लोगों को मौके पर इंसाफ मिला।
बाकी बचे 74 लोग हमेशा की तरह सिर्फ एक नया आश्वासन और अगली तारीख लेकर अपने घर लौटने को मजबूर हो गए। इस जनसुनवाई में उमड़ी भीड़ से साफ है कि लोग परेशान हैं, लेकिन अधिकारियों की सुस्ती के चलते उनकी फाइलों पर धूल जम रही है।

BDO साहब की 'सोती' हुई तस्वीर ने मचाया बवाल
नौगढ़ तहसील का यह कार्यक्रम अपनी सुस्त रफ्तार के लिए तो चर्चा में था ही, लेकिन तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने प्रशासन के आलाधिकारियों की नींद उड़ा दी। समाधान दिवस में जनता की समस्याएं सुनने बैठे खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) राकेश सिंह की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इस तस्वीर में बीडीओ साहब अपनी आंखें बंद किए हुए आराम की मुद्रा में बैठे दिखाई दे रहे हैं।
यह तस्वीर किस समय और किन हालातों में खींची गई, इसकी पूरी पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन इसने जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। लोग कह रहे हैं कि जब अधिकारी ही जनसुनवाई में इस तरह बेपरवाह बैठेंगे, तो गरीबों की समस्याओं को कौन सुनेगा।
74 फरियादी फिर फाइलों के भरोसे, जमीन के सबसे ज्यादा मामले
समाधान दिवस में कुल 80 प्रार्थना पत्र अधिकारियों के हाथों में सौंपे गए थे। मौके पर जिन 6 मामलों का निपटारा हुआ, उन्हें छोड़कर बाकी सभी 74 अर्जियों को संबंधित विभागों को फॉरवर्ड कर दिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे एक हफ्ते के भीतर इन पर कड़ी और निष्पक्ष कार्रवाई करें।
इस बार भी सबसे ज्यादा मामले राजस्व विभाग यानी जमीन-जायदाद और आपसी भूमि विवादों से जुड़े रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर लोगों की छोटी-मोटी समस्याओं का हल उनके ब्लॉक या गांव के स्तर पर हो जाता, तो उन्हें बार-बार भटककर तहसील तक आने की जरूरत ही क्यों पड़ती?
एसडीएम की कड़क चेतावनी, अब काम करके दिखाना होगा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच उप जिलाधिकारी (एसडीएम) विनय मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने वहां मौजूद सभी अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि बार-बार एक ही शिकायत का सामने आना यह साफ दिखाता है कि विभाग अपने काम को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अब कागजी खानापूर्ति नहीं चलेगी।
एसडीएम ने निर्देश दिया है कि अधिकारी खुद मौके पर जाएं, दोनों पक्षों को बिठाएं और समस्या को जड़ से खत्म करें। अब देखना यह होगा कि क्या एक हफ्ते के भीतर इन 74 पेंडिंग फाइलों का सच में कोई हल निकलता है, या फिर यह सिर्फ अगली जनसुनवाई तक मामला टालने की एक कोशिश है।
पूरे प्रशासनिक सिस्टम की साख पर लगा बड़ा दाग
तहसील का संपूर्ण समाधान दिवस वह जगह है जहां एक आम नागरिक बहुत उम्मीद के साथ सीधे बड़े अधिकारियों के सामने अपनी गुहार लगाता है। लेकिन जब ऐसे मंचों पर न्याय की रफ्तार कछुए जैसी हो जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की ऐसी लापरवाह तस्वीरें सामने आने लगें, तो जनता का भरोसा टूटने लगता है।
यह मामला सिर्फ नौगढ़ ब्लॉक का नहीं है, बल्कि यह पूरे सरकारी सिस्टम की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। अब देखना यह है कि जिले का वरिष्ठ प्रशासन इस वायरल तस्वीर और इन लंबित पड़ी शिकायतों पर क्या कड़ा एक्शन लेता है।
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