ग्राम प्रधान ने भेजी GPS फोटो तो खुली पोल, ताले में बंद मिले 2 सरकारी स्कूल, 6 शिक्षकों का वेतन रुका
चंदौली के नौगढ़ में ग्राम प्रधान ने ताले में बंद दो सरकारी स्कूलों की GPS फोटो सीधे डीएम को भेज दी। इस बड़ी लापरवाही पर एक्शन लेते हुए विभाग ने 6 शिक्षकों का वेतन रोककर जवाब मांगा है।
नौगढ़ के दो स्कूलों में लटका मिला ताला
ग्राम प्रधान ने डीएम को भेजी GPS फोटो
लापरवाह 6 शिक्षकों का वेतन तत्काल रोका
खंड शिक्षा अधिकारी की निगरानी पर सवाल
गरीब बच्चों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़
चंदौली जिले से सरकारी सिस्टम को आइना दिखाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। नौगढ़ विकासखंड के दो सरकारी स्कूलों में शनिवार की सुबह एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने शिक्षा विभाग के बड़े-बड़े दावों की हवा निकाल दी। स्कूल खुलने का समय कब का बीत चुका था, लेकिन स्कूलों के मुख्य गेट पर ताला लटक रहा था।
मासूम बच्चे बाहर खड़े होकर अपने गुरुजी और स्कूल खुलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन शिक्षक गायब थे। यह पूरी लापरवाही फाइलों में ही दबी रह जाती, अगर इलाके के ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव मौके पर नहीं पहुंचते। प्रधान ने बिना देर किए इस लापरवाही को अपने मोबाइल में कैद कर लिया।

डीएम के व्हाट्सएप पर पहुंची स्कूल की लाइव फोटो
लौवारी कलां गांव के ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव सुबह करीब 8:30 बजे प्राथमिक विद्यालय लौवारी खुर्द और प्राथमिक विद्यालय लेड़हा के पास पहुंचे थे। जब उन्होंने दोनों स्कूलों को पूरी तरह बंद देखा, तो उन्होंने एक अनोखा तरीका अपनाया। प्रधान ने मौके की लोकेशन के साथ जीपीएस (GPS) तस्वीरें खींचीं।
प्रधान ने इन लाइव तस्वीरों को सीधे जिले के कमांडर यानी जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के व्हाट्सएप नंबर पर भेज दिया। डीएम के मोबाइल पर ताले लटके स्कूल की फोटो पहुंचते ही बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए और तुरंत ही कार्रवाई की फाइल दौड़ने लगी।
10 बार शिकायत के बाद भी नहीं सुधरे हालात
ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव का आरोप है कि इन स्कूलों के शिक्षकों की मनमानी कोई नई बात नहीं है। वे अक्सर स्कूल देर से आते हैं या गायब रहते हैं। इसकी शिकायत पहले भी करीब 10 बार की जा चुकी है।
शिकायत मिलने पर खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) नोटिस तो जारी करते हैं, लेकिन उसका असर सिर्फ तीन से चार दिनों तक ही रहता है। इसके बाद मास्टर साहब फिर से अपनी पुरानी आदतों पर आ जाते हैं। प्रधान का कहना है कि इस लापरवाही का सबसे बड़ा नुकसान उन गरीब बच्चों को उठाना पड़ रहा है, जिनके लिए सरकारी स्कूल ही पढ़ाई का इकलौता सहारा हैं।

सिर्फ टीचर ही क्यों, बड़े अधिकारी क्यों नहीं नापे गए?
अब यह पूरा मामला सिर्फ छह शिक्षकों के स्कूल न आने तक सीमित नहीं रह गया है। लोग अब सीधे तौर पर शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग और एबीएसए (ABSA) की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल उठा रहे हैं। जब स्कूलों की शिकायतें पहले से मिल रही थीं, तो अधिकारी कभी अचानक जांच करने क्यों नहीं गए?
क्या शिक्षा विभाग का औचक निरीक्षण सिर्फ कागजी कागजों तक ही सीमित है? अगर बड़े अधिकारी समय-समय पर स्कूलों का दौरा करते, तो शायद शिक्षकों में कानून का डर होता। यही वजह है कि अब इस मामले में केवल शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों की ढीली निगरानी पर भी जांच की मांग उठ रही है।
डीएम के हंटर चलते ही रुका 6 शिक्षकों का वेतन
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग तक जैसे ही यह शिकायत सबूतों के साथ पहुंची, उन्होंने तुरंत एक्शन लेने का निर्देश दिया। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी लालमणि राम ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू कर दी। विभाग ने प्राथमिक विद्यालय लौवारी खुर्द की नीतू, निशा केशरी और लक्ष्मण प्रसाद का वेतन रोक दिया है।
इसके साथ ही प्राथमिक विद्यालय लेड़हा के शिक्षक वेद प्रकाश, सुरेश कुमार और हृदय नाथ का वेतन भी तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। विभाग ने इन सभी 6 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर लिखित में जवाब देने को कहा है।
गरीब बच्चों के भविष्य के साथ कब तक होगा खिलवाड़?
नौगढ़ ब्लॉक के इन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे बेहद गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। जब शिक्षक ही समय पर स्कूल नहीं आएंगे, तो देश का भविष्य कहे जाने वाले इन बच्चों को अच्छी शिक्षा कैसे मिलेगी? सरकार इन योजनाओं पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इस घटना के बाद नौगढ़ ब्लॉक के बाकी स्कूलों की भी अचानक जांच होगी? क्या विभाग की यह कार्रवाई सिर्फ इन छह शिक्षकों तक ही सिमट कर रह जाएगी, या फिर लापरवाह मॉनिटरिंग सिस्टम को भी सुधारा जाएगा? क्योंकि यह सवाल सिर्फ कुछ शिक्षकों का नहीं, बल्कि हजारों नौनिहालों के भविष्य का है।
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