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चूल्हे की चिंगारी बनी काल: बरवाटाड़ गांव में मजदूर का आशियाना जलकर खाक, दाने-दाने को तरसा पीड़ित परिवार

चंदौली के नौगढ़ तहसील के बरवाटाड़ गांव में चूल्हे की चिंगारी से एक गरीब मजदूर के छप्पर में भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में पूरी गृहस्थी, अनाज और कपड़े जलकर राख हो गए, जिससे परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया है।

 
 

बरवाटाड़ गांव में भीषण अग्निकांड

चूल्हे की चिंगारी से भड़की आग

मजदूर महावीर की गृहस्थी हुई राख

ग्रामीणों ने बाल्टियों से बुझाई आग

खुले आसमान के नीचे आया परिवार

 चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले बरवाटाड़ गांव में मंगलवार को दोपहर के समय एक बेहद दर्दनाक और हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ एक गरीब मजदूर परिवार की जीवन भर की जमा-पूंजी और आशियाना अचानक धुएं के गुबार में तब्दील हो गया। दोपहर में खाना बनाने के बाद जिस चूल्हे को पूरी तरह से बुझा हुआ समझ लिया गया था, वही चूल्हा कुछ ही देर बाद इस गरीब परिवार के लिए तबाही का सबब बन गया।

 दरअसल, चूल्हे के भीतर दबी हुई एक छोटी सी चिंगारी तेज हवा के झोंके के साथ उड़ी और सीधे छप्पर में जा लगी। छप्पर में सुलगती हुई इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे घर को अपनी आगोश में ले लिया।

अंदर आराम कर रहा था परिवार, ग्रामीणों ने सुरक्षित निकाला बाहर
ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, दोपहर का भोजन करने के बाद भीषण गर्मी से बचने के लिए परिवार के सभी सदस्य घर के अंदर आराम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक छप्पर के ऊपर से हल्का धुआं उठता हुआ दिखाई दिया। शुरुआत में आसपास के लोगों ने इसे बहुत ही सामान्य समझा, लेकिन कड़कड़ाती धूप और तेज हवाओं के चलते महज कुछ ही मिनटों के भीतर आग ने भयावह रूप ले लिया। आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं, जिसे देखकर पूरे गांव में चीख-पुकार और शोर मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण तुरंत मौके की तरफ दौड़े और अपनी जान पर खेलकर सबसे पहले घर के अंदर फंसे हुए पीड़ित परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला।

दमकल से पहले पूरा गांव बना रक्षक, बाल्टियों से बुझाई आग
इस भीषण अग्निकांड की त्वरित सूचना तत्काल फायर ब्रिगेड (दमकल विभाग) को दी गई, लेकिन सुदूर इलाका होने के कारण दमकल टीम के पहुंचने से पहले ही गांव के लोग खुद राहत और बचाव की टीम बन गए। गांव का हर नागरिक इस आपदा में मदद के लिए दौड़ पड़ा। कोई बाल्टियों से पानी लाकर आग पर डाल रहा था, तो कोई नजदीकी हैंडपंप चलाकर लगातार पानी की व्यवस्था करने में जुटा हुआ था। इस संकट की घड़ी में गांव की महिलाओं और युवाओं ने भी अदम्य साहस का परिचय देते हुए आग को आगे फैलने से रोकने में अपना पूरा सहयोग दिया। काफी मशक्कत के बाद दमकल की गाड़ी भी मौके पर पहुंची और तब जाकर आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका।

मिनटों में राख हुई जिंदगी की कमाई, अब सरकारी मदद की आस
जब तक आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जाता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस भीषण अग्निकांड में घर के भीतर रखा सारा अनाज, कपड़े, बिस्तर, बर्तन और गृहस्थी का अन्य जरूरी कीमती सामान पूरी तरह जलकर खाक हो चुका था। पीड़ित महावीर पेशे से एक दिहाड़ी मजदूर हैं और कड़ी मेहनत व मजदूरी करके अपने बड़े परिवार का पालन-पोषण करते हैं। 

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि महावीर ने पाई-पाई जोड़कर बहुत ही मुश्किलों से अपनी यह छोटी सी गृहस्थी और रहने के लिए घर तैयार किया था, जिसे किस्मत की एक क्रूर चिंगारी ने मिनटों में तबाह कर दिया। अब इस घटना के बाद बेघर हुआ यह पीड़ित मजदूर परिवार खुले आसमान के नीचे दाने-दाने को तरस रहा है और शासन-प्रशासन से मुआवजे व मदद की गुहार लगा रहा है।

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