जिले का पहला ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलMovie prime

चंदौली में बड़ा आवास घोटाला? बिना छत वाले मकानों को भेज दी तीसरी किस्त, नौगढ़ में फाइलों में बने गरीबों के आशियाने

चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक में मुख्यमंत्री आवास योजना में बड़ी धांधली का मामला गरमाया है। मानसून की दस्तक के बीच जमीनी स्तर पर गरीबों के घरों पर छत तक नहीं पड़ी है, जबकि फाइलों में दूसरी और तीसरी किस्त भी जारी हो चुकी है।

 
 

मुख्यमंत्री आवास योजना में बड़ी धांधली

अधूरे आवासों पर जारी हुई किस्त

भाजपा नेताओं ने उठाए गंभीर सवाल

खंड विकास अधिकारी की कार्यशैली संदिग्ध

फाइलों में प्रगति, जमीन पर अधूरी दीवारें

चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र से मुख्यमंत्री आवास योजना में एक बहुत बड़ी वित्तीय अनियमितता और लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है। क्षेत्र में मानसून की आहट शुरू हो चुकी है, लेकिन आज भी नौगढ़ ब्लॉक के कई गरीब परिवार बिना छत के महज अधूरी दीवारों के बीच अपनी जिंदगी काटने को विवश हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन आवासों में अभी तक लिंटर यानी छत तक नहीं डाली गई है, सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें पूर्णता की ओर दिखाकर उनकी दूसरी और तीसरी किस्त का भुगतान भी कर दिया गया है। 

जमीनी स्तर पर केवल ईंटों के ढांचे खड़े हैं, जबकि डिजिटल फाइलों में योजना तेजी से प्रगति कर रही है। अब स्थानीय जनता सीधे ब्लॉक प्रशासन से पूछ रही है कि बिना सही भौतिक सत्यापन के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) का डिजिटल सिग्नेचर (डोंगल) कैसे लग गया?

सत्ताधारी दल के नेताओं ने अपनी ही सरकार के अफसरों को घेरा
अधूरे आवासों पर धड़ाधड़ भुगतान जारी होने की यह खबर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस गंभीर मुद्दे पर अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय पदाधिकारियों ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी ही सरकार की छवि धूमिल करने वाले अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। 

पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष भगवान दास अग्रहरि ने गांवों का दौरा करने के बाद साफ कहा कि धरातल पर गरीबों के मकान अधूरे पड़े हैं और वे कड़कड़ाती धूप व बारिश के बीच पक्की छत का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, भाजपा जिला प्रतिनिधि देवेंद्र साहनी ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बिना काम पूरा हुए भुगतान की फाइलें आगे बढ़ाना सरासर गलत है। इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली से सरकार की साफ-सुथरी छवि खराब होती है और उच्चाधिकारियों को इसमें पारदर्शिता लानी चाहिए।

खंड विकास अधिकारी की कार्यशैली और डोंगल प्रक्रिया संदेह के घेरे में
यह पूरा मामला अब सीधे नौगढ़ ब्लॉक प्रशासन की ढीली निगरानी व्यवस्था की पोल खोल रहा है। ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों के बीच इस बात की गहरी चर्चा है कि खंड विकास अधिकारी विकास सिंह के कार्यालय आने-जाने का कोई निश्चित समय सारणी नहीं है। जब जिम्मेदार अधिकारी ही दफ्तर से गायब रहेंगे, तो योजनाओं की जमीनी हकीकत कौन परखेगा? बिना किसी वास्तविक निरीक्षण और बिना साइट जियो-टैगिंग के ऑनलाइन सिस्टम में सीधे डोंगल लगाकर सरकारी धन को लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। 

पंचायत स्तर पर दबी जुबान में यह भी बात सामने आ रही है कि कुछ उच्चाधिकारियों द्वारा पंचायत सचिवों पर जल्दबाजी में फर्जी रिपोर्ट लगाने का मानसिक दबाव बनाया गया था, जिसके चलते कार्रवाई के डर से कर्मचारियों को ये फाइलें आगे बढ़ानी पड़ीं।

दिखावे के निरीक्षण से दबाया गया मामला, गरीब अब भी बेघर
स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जब भी जिले से कोई बड़ा अधिकारी जांच या निरीक्षण के लिए आता है, तो ब्लॉक के कर्मचारी पहले से तैयार कुछ चुनिंदा मकानों को दिखाकर पूरी योजना की फर्जी और चमचमाती तस्वीर पेश कर देते हैं। इस तरह "ऊपर" तक सब कुछ ठीक होने का गुमराह करने वाला संदेश भेज दिया जाता है।

 हकीकत यह है कि आज भी सैकड़ों पात्र लाभार्थी बिना छत के टूटे कमरों में रहने को मजबूर हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बरसात का मौसम सिर पर है और ये गरीब परिवार प्रशासन की इस घोर लापरवाही के कारण तिरपाल के सहारे दिन काटने की चिंता में डूबे हुए हैं। अब इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*