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नौगढ़ के महुआ बाबा आश्रम में धूमधाम से उतरी भोलेनाथ की अलौकिक बारात, शिव-सती प्रसंग सुनाकर कथावाचक ने दिया बड़ा संदेश

चंदौली के जमसोती स्थित महुआ बाबा सेवा आश्रम में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन शिव बारात और शिव-सती प्रसंग का जीवंत वर्णन किया गया। वृंदावन के कथावाचक ने भक्ति का ऐसा रस घोला कि पूरा पंडाल शिवमय हो गया। पूरी खबर पढ़ें।

 
 

महुआ बाबा आश्रम में रामकथा

धूमधाम से निकली शिव बारात

वेश बदलना छल का प्रतीक

श्रद्धा का एक फूल सबसे भारी

देर रात तक चला प्रसाद वितरण

चंदौली जिले के नौगढ़ क्षेत्र में आने वाले जमसोती स्थित महुआ बाबा सेवा आश्रम में इन दिनों भक्ति की बयार बह रही है। आश्रम में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन सोमवार की रात पूरा इलाका 'हर-हर महादेव' और 'जय श्रीराम' के जयकारों से गूंज उठा। यहाँ आस्था, भक्ति और अध्यात्म का ऐसा अनोखा संगम देखने को मिला कि कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु देर रात तक ताली बजाकर झूमते रहे।

वृंदावन धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने भगवान शिव की अलौकिक बारात, माता सती की परीक्षा, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का विरह और माता पार्वती के जन्म का ऐसा मार्मिक और जीवंत वर्णन किया कि भक्तों की आंखें सजल हो उठीं।

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मुख्य अतिथियों ने किया पोथी पूजन
कथा के दूसरे दिन के कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि कैलाश जायसवाल, संतोष गुप्ता और खंड संचालक देवेन्द्र सिंह ने व्यास पीठ पर स्थापित पवित्र पोथी का पूजन-अर्चन कर किया। श्रीराम कथा सेवा समिति और महुआ बाबा सेवा आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में आस-पास के ग्रामीण अंचलों से भारी संख्या में पुरुष और महिला श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंचे।

हनुमान जी थे संसार के पहले कथावाचक
कथा की महिमा बताते हुए व्यास पीठ से दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि इस संसार के सबसे पहले कथावाचक स्वयं रामभक्त हनुमान जी थे। उन्होंने ही लंका की अशोक वाटिका में सबसे पहले माता सीता को प्रभु श्री राम की पावन कथा सुनाई थी और उनके दुखों का अंत किया था।

शिव-सती प्रसंग को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब माता सती ने भगवान शिव की बात न मानकर श्रीराम की परीक्षा लेने के लिए माता सीता का रूप धारण किया, तो वहीं से इतिहास की धारा बदल गई। वेश बदलना हमेशा छल और धोखे का प्रतीक होता है, जबकि भगवान केवल सत्य और मर्यादा से ही प्रसन्न होते हैं। यही वजह थी कि इसके बाद भगवान शिव वैराग्य और समाधि में चले गए।

भगवान को दौलत नहीं, सच्ची श्रद्धा चाहिए
कथावाचक ने आज के समाज को एक बहुत बड़ा और सुंदर संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान समय में इंसानों को दूसरों की पीड़ा समझने और निस्वार्थ सेवा-भाव बढ़ाने की सबसे ज्यादा जरूरत है। भगवान के दरबार में आपकी धन-दौलत या पैसों का कोई मोल नहीं है। वहाँ तो केवल सच्ची श्रद्धा और प्रेम का महत्व है।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि कोई भक्त सच्चे और निष्कलुष मन से भगवान को प्रेम का एक फूल भी अर्पित कर देता है, तो वह ईश्वर को तुरंत स्वीकार्य होता है और वह भाव करोड़ों रुपये के चढ़ावे पर भी भारी पड़ता है। इंसान का कर्म का कमंडल जितना बड़ा और साफ होगा, उसका जीवन उतना ही सार्थक बनेगा।

शिव बारात के प्रसंग पर झूम उठे भक्त
कथा के दौरान जैसे ही भगवान भोलेनाथ की अनोखी और अलौकिक बारात का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल मानों साक्षात कैलाश पर्वत बन गया। "मंगल भवन अमंगल हारी" की चौपाइयों और सुमधुर भजनों की स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालु खुद को शिव बारात का बाराती मानकर नाचने-गाने लगे। चारों तरफ घंटियों और जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी।

कथा की आरती और समापन के बाद महुआ बाबा आश्रम के महंत गोविंद श्रीवास्तव की देखरेख में सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस भव्य धार्मिक आयोजन के अवसर पर आचार्य मुक्तेश्वर पांडे, भाजपा विधायक कैलाश आचार्य, वन क्षेत्राधिकारी (चंद्रप्रभा) अखिलेश दुबे, अश्वनी पांडे, प्रधान यशवंत सिंह यादव और अरविंद तिवारी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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