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मौत के मुंह से मां को खींच लाई नौगढ़ की 'शेरनी बेटी', 100 KM दूर BHU पहुंचकर बचाई जान

नौगढ़ की ममता कोल ने सिर से पिता का साया उठने के बाद मां को जहरीले सांप के डसने पर हिम्मत नहीं हारी। अंधविश्वास की बजाय 100 किलोमीटर दूर BHU अस्पताल ले जाकर मां की जान बचाई। सलाम है इस शेरनी बेटी को!

 
 

सांप के काटने पर दिखाई बहादुरी

100 किलोमीटर का सफर तय किया

झाड़-फूंक की जगह चुना अस्पताल

समय पर इलाज से बची जान

पूरे इलाके में हो रही चर्चा

चंदौली जिले के नौगढ़ इलाके से एक ऐसी दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है, जिसे पढ़कर आप भी इस बेटी को सलाम करेंगे। बसौली गांव की रहने वाली ममता कोल के सिर से पिता का साया पहले ही उठ चुका था। एक दिन अचानक उसकी मां को एक जहरीले सांप ने डस लिया। घर में चीख-पुकार मच गई और हर बीतते पल के साथ मां की जिंदगी पर खतरा बढ़ता जा रहा था।

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अंधविश्वास छोड़ अस्पताल का थामा हाथ
ऐसे मुश्किल समय में अक्सर लोग घबरा जाते हैं या फिर झाड़-फूंक के चक्कर में पड़कर कीमती समय बर्बाद कर देते हैं। लेकिन ममता ने गजब का हौसला दिखाया। उसने अपने आंसू पोंछे और बिना वक्त गंवाए मां को अस्पताल ले जाने का फैसला किया। उसने ठान लिया था कि वह अपनी मां को कुछ नहीं होने देगी।

100 किलोमीटर का सफर और मौत से जंग
नौगढ़ से बनारस के बीएचयू (BHU) अस्पताल की दूरी करीब 100 किलोमीटर है। यह सफर कोई आम सफर नहीं था, बल्कि हर किलोमीटर पर मौत से सीधी जंग थी। रास्ते भर ममता अपनी मां का हाथ थामे उनका हौसला बढ़ाती रही। अस्पताल पहुंचने के बाद भी उसने दिन-रात डॉक्टरों के साथ लगकर मां की सेवा की। आखिरकार समय पर सही इलाज मिलने से उसकी मां की जान बच गई।

इलाके में 'शेरनी बेटी' की चर्चा
ममता की इस बहादुरी की खबर जैसे ही गांव और आसपास के इलाकों में फैली, हर कोई उसकी तारीफ करने लगा। आज पूरे नौगढ़ क्षेत्र में लोग उसे 'शेरनी बेटी' कहकर बुला रहे हैं। संकट की इस घड़ी में ममता ने यह साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होतीं और वे पूरे परिवार की सबसे बड़ी ताकत होती हैं।

सर्पदंश और जागरूकता की बड़ी जरूरत
चंदौली का पहाड़ी और जंगली इलाका ऐसा है, जहां हर साल सांप काटने की कई घटनाएं होती हैं। इसके बावजूद लोग सही जानकारी न होने की वजह से झाड़-फूंक और जड़ी-बूटी के चक्कर में मरीज की जान जोखिम में डाल देते हैं। ममता की यह कहानी सबक है कि सांप के काटने पर केवल और केवल अस्पताल का इलाज ही जिंदगी बचा सकता है।

'चंदौली समाचार' की बात
ममता कोल ने केवल अपनी मां की जान नहीं बचाई है, बल्कि पूरे समाज को एक बहुत बड़ा संदेश दिया है। मुसीबत के समय अंधविश्वास पर नहीं, बल्कि सही फैसले और विज्ञान पर भरोसा करना चाहिए। अगर इस बहादुर बेटी की कहानी पढ़कर एक भी परिवार सांप काटने पर सीधे अस्पताल भागता है, तो ममता की यह जंग सफल हो जाएगी।

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