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नौगढ़ में फैला डायरिया, केसार गांव के भैरवनंद की मौत के बाद पहुंची टीम
 

चंदौली जिले में तहसील नौगढ़ के केसार गांव के चेरो बस्ती में डायरिया का प्रकोप फैल गया है। डायरिया से भैरवानंद की मौत हो जाने से लोगों में आक्रोश है वहीं आधा दर्जन की संख्या में लोग बीमार होकर प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं । गांव के लोगों ने स्वास्थ्य महकमें पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

आपको बता दें कि नौगढ़ डायरिया के प्रकोप की शुरूआत शनिवार की देर शाम केसार गांव के चेरो बस्ती से हुई। गांव का उदय प्रताप (7), गुंजा (13), शिवा ( 6) बच्चों का स्थानीय झोला छाप डॉक्टर से इलाज कर रहे थे, इसी दौरान दिनेश (35), दशरथ चेरो (50), निराशा (55)  को भी उल्टी दस्त शुरू हो गई। एक साथ लगभग दर्जन भर लोगों के बीमार होने से बस्ती के लोग  परेशान हो उठे। सीएचसी नौगढ़ पर सूचना देने  के साथ ही 108 पर गांव के लोगों ने कॉल किया लेकिन न तो एंबुलेंस पहुंची और ना ही चिकित्सकों की टीम पहुंची। बच्चों की हालत गंभीर होने पर आनन-फानन में सोनभद्र के ओइनी में डायरिया से पीड़ित बच्चों का परिजन देर रात ही उपचार के लिए ले जाकर इलाज कराया।

सोनभद्र के एक नर्सिंग होम में इलाज करा रहे डायरिया से पीड़ित भैरवनंद ( 38) ने भोर में दम तोड़ दिया बस्ती के बीमार कुछ लोगों को इलाज के लिए सीएचसी नौगढ़ में भी लाया गया है। पूरे गांव में हड़कंप मचा हुआ है और लोग स्वास्थ्य महकमें पर लापरवाही का आरोप लगा रहे है।

डायरिया के प्रकोप से भैरवनंद (38) की मौत के बाद सो रहा स्वास्थ्य महकमा जाग गया। मौत की जानकारी के बाद सोमवार को सीएचसी नौगढ़ से चिकित्सकों  की टीम गांव में पहुंची और ब्लीचिंग का छिड़काव कराया गया, दवा का वितरण करने के साथ ही बीमारों का इलाज शुरू किया। दो बीमार मरीजों को सीएचसी लाकर भर्ती कराया गया। दिन भर डॉ अमित श्रीवास्तव, डॉ गंगाराम भारती अपनी टीम के साथ गांव में जुटे नजर आए।


 सीएचसी नौगढ़ के चिकित्सा अधीक्षक डॉ अवधेश पटेल की मानें तो गांव में डायरिया का प्रकोप गंदगी और खानपान ठीक न होने के कारण फैला है। गांव के प्रधान ने भी में सूचना नहीं दी, अन्यथा रात में ही स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंच गई होती। जानकारी होते ही चिकित्सकों की टीम ने बस्ती में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया गया है। पीड़ित परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ-साथ दवाइयां भी दी गई है। किया है। फिलहाल सभी पीड़ित खतरे से बाहर है। 


गांव में कभी झांकने नहीं आए स्वास्थ्य कर्मी

  स्वास्थ्य महकमे पर गांव के लोगों ने लापरवाही का आरोप  लगाया है, गांव की एनम काफी दिनों से गायब है, आशा बहुएं भी गांव में लोगों का हाल लेने नहीं आती। आरोप है कि टीकाकरण, दवा का  छिड़काव आदि गांव में कभी कराया ही नहीं गया है। संबंधित जिम्मेदार कभी गांव में झांकने तक नहीं आए है।