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औरवाटाड़ फॉल पर पिकनिक मनाने गए युवकों से भिड़े वनकर्मी, पिस्टल दिखाने और थप्पड़ मारने के आरोप से मचा बवाल

चंदौली के औरवाटाड़ जलप्रपात पर 15 अगस्त को नहाने को लेकर पर्यटकों और वनकर्मियों के बीच तीखा विवाद हो गया। थप्पड़ मारने, पिस्टल दिखाने और 'वर्दी उतरवाने' की धमकी के बाद मामला थाने पहुंचा, जहां चेतावनी के बाद समझौता कराया गया।

 
 

औरवाटाड़ जलप्रपात में नहाने को लेकर बढ़ा विवाद

पर्यटकों ने वनकर्मी पर थप्पड़ मारने का लगाया आरोप

वन कर्मचारियों को वर्दी उतरवाने की मिली धमकी

नौगढ़ थाने में घंटे भर चली पंचायत के बाद समझौता

पुलिस ने सुरक्षा नियम तोड़ने पर एफआईआर की दी चेतावनी

चंदौली जिले के नौगढ़ स्थित प्रसिद्ध औरवाटाड़ जलप्रपात पर 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाने पहुंचे पर्यटकों के लिए पानी में नहाना भारी पड़ गया। स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी पर पिकनिक मनाने आए युवकों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच नहाने की पाबंदी को लेकर तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकियां तक दी जाने लगीं। घटना के बाद दोनों पक्ष अपनी शिकायत लेकर नौगढ़ थाने पहुंच गए।

नौगढ़ कस्बे के रहने वाले उत्कर्ष जायसवाल ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि वे अपने दोस्तों के साथ दोपहर के वक्त औरवाटाड़ फॉल गए थे। झरने में पानी कम देखकर वे सभी नहाने लगे। इसी दौरान वन विभाग के कर्मचारी जेपी यादव वहां पहुंचे और बिना किसी पूर्व चेतावनी के गाली-गलौज करने लगे। उत्कर्ष का दावा है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो वनकर्मी ने उन्हें थप्पड़ मार दिया और पिस्टल दिखाकर जेल भेजने की धमकी दी।

वर्दी उतरवाने की धमकी और वन विभाग का रुख

दूसरी तरफ वन विभाग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए पर्यटकों पर ही अभद्रता का आरोप लगाया है। वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) संजय श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश के मौसम में औरवाटाड़ जलप्रपात में डूबने की कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसी वजह से पर्यटकों की सुरक्षा के लिए वहां नहाने पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। वनकर्मी केवल इसी सुरक्षा नियम की जानकारी देकर युवकों को पानी में जाने से रोक रहे थे।

रेंजर का आरोप है कि मना करने पर उत्कर्ष जायसवाल और उनके साथियों ने ड्यूटी पर तैनात वनकर्मियों के साथ बदसलूकी की। युवकों ने कर्मचारियों को "तुम लोगों की वर्दी उतरवा दूंगा" कहकर खुलेआम धमकी दी। वन अधिकारियों ने साफ कहा कि सरकारी कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी करने से रोकना या उन्हें धमकाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

थाने में घंटे भर चली पंचायत, अल्टीमेटम के बाद बना समझौता

मामला गरमाने के बाद दोनों पक्ष नौगढ़ पुलिस थाने पहुंचे। थाने में करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों की बातें सुनी गईं और पुलिस अधिकारियों ने मामला सुलझाने की कोशिश की। काफी समझाने-बुझाने के बाद दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता कराया गया। हालांकि, इस दौरान थानाध्यक्ष और रेंजर ने साफ कर दिया कि यह पहला और आखिरी मौका है जब मामले को बातचीत से सुलझाया जा रहा है।

नौगढ़ थानाध्यक्ष संतोष कुमार ने दोनों पक्षों को सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थल घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने के लिए होते हैं, आपस में दंगल करने के लिए नहीं। अगर किसी ने भी सुरक्षा नियमों को तोड़ा या सरकारी कर्मचारी से हाथापाई की, तो अगली बार समझौते की कोई गुंजाइश नहीं होगी। पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजने की कार्रवाई करेगी।

सुरक्षा नियमों के साथ जरूरी हैं पुख्ता इंतजाम

इस विवाद के शांत होने के बाद अब औरवाटाड़ जलप्रपात पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर मानसून में जलप्रपात में नहाना प्रतिबंधित है, तो एंट्री गेट पर बड़े चेतावनी बोर्ड और मजबूत बैरिकेडिंग होनी चाहिए। पर्याप्त सुरक्षा गार्ड मौजूद न होने की वजह से आए दिन पर्यटकों और कर्मचारियों में इस तरह की नोकझोंक होती रहती है।

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