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इन पंचायत भवनों को खुलवा दीजिए BDO साहब, कौन है इसको बंद रखने का गुनहगार ​​​​​​​

चंदौली जिले में विकास क्षेत्र नौगढ़ में पंचायत भवनों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। 43 ग्राम पंचायतों में दो तीन ग्राम पंचायतों को छोड़ बाकी सभी ग्राम पंचायत भवन पर ताला लटके रहते हैं।
 

पंचायत भवन पर लटके रहते हैं ताले

आखिर किसके पास जाएं गांव वाले.

कैसे होंगे ग्रामीणों के कार्य

नौगढ़ के अधिकतर पंचायत भवनों का यही है हाल

प्रधान व सचिव की मनमानी से ग्रामीण हो रहे हैं परेशान  

चंदौली जिले में विकास क्षेत्र नौगढ़ में पंचायत भवनों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। 43 ग्राम पंचायतों में दो तीन ग्राम पंचायतों को छोड़ बाकी सभी ग्राम पंचायत भवन पर ताला लटके रहते हैं। कई पंचायत भवनों पर तो ग्रामीणों का अवैध कब्जा है और उनके संसाधनों का मनमाना उपयोग होता है। 

नौगढ़ इलाके के कई गांवों का हाल यह है कि अधिकतर पंचायत भवनों के बंद होने से ग्रामीणों का कार्य पंचायत भवन में नहीं हो पा रहा है। ग्राम प्रधान पंचायत भवन में लगे कंप्यूटर, कुर्सी, अलमारी सहित अन्य फर्नीचर के सामान अपने घर में रखकर के कार्य कर रहे हैं। ग्रामीणों को पंचायत भवन के बजाए ग्राम प्रधान के पास कार्य कराने के लिए जाना पड़ता है। ग्राम पंचायत अमृतपुर, ठटवा में पंचायत भवन पर ग्रामीणों का ही कब्जा है जिसमें ग्रामीण अपना रैन बसेरा बनाकर रह रहे हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद इसे खाली नहीं कराया जा सका। 


43 ग्राम पंचायत में पंचायत भवन बनाने का 2020-21 में ही निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया। बहुत से पंचायत भवन बन गए, लेकिन उनमें अभी भी ताले लटक रहे हैं। एक तरफ सरकार गांवों को डिजिटल बनाने का सपना देख रही है, दूसरी तरफ प्रधान सपने को धराशायी कर रहे हैं। ग्रामीणों को पंचायत भवन से ही परिवार रजिस्टर नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय जाति, निवास पंचायत भवन से ही मुहैया करना है, लेकिन ग्रामीणों को आज भी जन सेवा केंद्र का चक्कर लगाना पड़ रहा है। 


पंचायत भवन में ताले लटक रहे हैं और ग्रामीणों को इधर-उधर दौड़ भाग करना पड़ रहा है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी अधिकारियों का ध्यान पंचायत भवन सचिवालय तक नहीं पहुंच पा रहा है। शिकायत के बाद भी पंचायत सचिवों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 


ग्रामीणों ने मुख्य विकास अधिकारी रालपल्ली जगत साईं से शिकायत की। मुख्य विकास अधिकारी ने इसकी जांच डीपीआरओ नीरज सिन्हा को सौंपा और एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

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