सोलर सब्सिडी के नाम पर बड़ा खेल! BJP नेता के घर लगा पैनल, लोन और सब्सिडी में हेराफेरी जारी
नौगढ़ के पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष भगवान दास अग्रहरि के घर सोलर पैनल लगने के बाद भी सब्सिडी नहीं मिली, जबकि बैंक लोन शुरू हो गया। सीएम पोर्टल पर शिकायत के बावजूद बिना समाधान के मामला बंद कर दिया गया।
सोलर सब्सिडी न मिलने से नाराजगी
सीएम हेल्पलाइन पर कागजी समाधान हुआ
लापरवाही से योजना हो रही बदनाम
बैंक लोन चुका रहे पीड़ित उपभोक्ता
उच्चस्तरीय जांच कराने की उठी मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेहद महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसुनवाई व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ सोलर कंपनियां और अधिकारी मिलकर इन जनहितकारी योजनाओं को बदनाम कर रहे हैं। नौगढ़ के पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष भगवान दास अग्रहरि ने इस पूरी व्यवस्था पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे हड़कंप मच गया है।

सोलर पैनल लग गया, लोन चालू पर सब्सिडी गायब
पूर्व मंडल अध्यक्ष भगवान दास अग्रहरि का कहना है कि 'आरजेकेएस इंफ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी ने उनके घर पर सोलर प्लांट तो लगा दिया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी सरकारी सब्सिडी उनके बैंक खाते में नहीं आई। हैरान करने वाली बात यह है कि उन्हें सोलर प्लांट के लिए लिए गए बैंक लोन की किस्तें अपनी जेब से चुकानी पड़ रही हैं, लेकिन सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद का कहीं अता-पता नहीं है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर हुआ केवल कागजी खेल
पीड़ित भाजपा नेता ने थक-हारकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर इस मामले की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन कमाल की बात देखिए, बिना किसी वास्तविक समाधान के ही उनकी इस गंभीर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। भगवान दास का कहना है कि जब खाते में एक रुपया भी नहीं आया और न ही कोई तकनीकी दिक्कत दूर हुई, तो फिर किस आधार पर शिकायत को बंद कर दिया गया? यह कार्यशैली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साफ-सुथरी छवि को धूमिल कर रही है।
कंपनी ने मानी पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी की बात
इस मामले में जब जांच की गई तो मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर अपलोड की गई रिपोर्ट और आरजेकेएस इंफ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा यूपीनेडा (UPNEDA) के निदेशक को भेजी गई चिट्ठी से एक बड़ी बात सामने आई। कंपनी ने खुद माना है कि एमएनआरई (MNRE) पोर्टल में कुछ तकनीकी बदलाव किए गए हैं। इस वजह से एग्रीमेंट अपलोड होने के बाद भी आगे प्रोसेस करने के लिए "सबमिट" का बटन नहीं दिख रहा है। कंपनी का दावा है कि उन्होंने वाराणसी यूपीनेडा के अधिकारियों को भी बताया, पर मामला अभी तक लटका हुआ है।
भाजपा नेता बोले—जब हमारी नहीं सुनी, तो आम जनता का क्या होगा?
पूर्व मंडल अध्यक्ष ने बेहद दुखी मन से कहा कि जब वह खुद सत्ताधारी दल के एक जिम्मेदार कार्यकर्ता होने के बावजूद महीनों से बैंक और दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और उनकी सुनवाई नहीं हो रही, तो बेचारे आम आदमी का क्या हाल होता होगा? शिकायतों का केवल कागजों पर समाधान करना जनता का भरोसा तोड़ने जैसा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और लापरवाह अधिकारियों व एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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