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नौगढ़ का राजदरी पर्यटन स्थल बदहाली का शिकार: डॉरमेट्री और नेचर सेंटर बने शोपीस, DFO के आश्वासन निकले खोखले

गणतंत्र दिवस की छुट्टियों में राजदरी जलप्रपात पर सैलानियों का तांता लगने वाला है, लेकिन वन विभाग की कैंटीन और बुनियादी सुविधाएं ठप पड़ी हैं। डीएफओ के आश्वासनों के बीच पर्यटकों को खाने-पीने और ठहरने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

चंदौली जिले के नौगढ़ इलाके की विंध्य पर्वतमाला की गोद में बसा उत्तर प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल राजदरी जलप्रपात एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इसकी सुंदरता नहीं बल्कि प्रशासनिक उदासीनता है। आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर होने वाले सार्वजनिक अवकाश के चलते यहाँ हजारों की संख्या में पर्यटकों के पहुँचने की संभावना है। विडंबना यह है कि प्रशासन के पास इस भीड़ को संभालने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं दिख रही है।

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डीएफओ बी. शिवशंकर के आश्वासन पड़े फीके
नौगढ़ तहसील स्थित राजदरी जलप्रपात की देखरेख का जिम्मा वन विभाग के पास है। प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) बी. शिवशंकर (IFS) की ओर से बार-बार सुविधाओं को बहाल करने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। नए साल की शुरुआत हुए 10 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पर्यटकों के लिए अभी तक कैंटीन जैसी मूलभूत सुविधा भी बहाल नहीं की जा सकी है। स्थानीय लोगों और पर्यटकों का आरोप है कि डीएफओ केवल टालमटोल की नीति अपना रहे हैं।

कैंटीन बंद और खाना बनाने पर रोक: पर्यटकों की बढ़ी मुश्किलें
राजदरी परिसर में पर्यटकों के लिए बनाई गई कैंटीन लंबे समय से बंद है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि विभाग ने परिसर के अंदर स्वयं खाना बनाने (कुकिंग) पर भी कड़ा प्रतिबंध लगा रखा है। पहाड़ी और घना जंगल होने के कारण यहाँ आस-पास कोई बाजार या होटल नहीं है। ऐसे में दूर-दराज से परिवार और छोटे बच्चों के साथ आने वाले सैलानियों के लिए भोजन और पानी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों को घंटों भूखा-प्यासा रहने पर मजबूर होना पड़ता है।

डॉरमेट्री और नेचर सेंटर बने सफेद हाथी
सरकार ने राजदरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लाखों रुपये खर्च कर डॉरमेट्री हॉल और नेचर सेंटर का निर्माण कराया था। उद्देश्य था कि यहाँ आने वाले पर्यटक प्रकृति के सानिध्य में समय बिता सकें और आवश्यकता पड़ने पर विश्राम कर सकें। लेकिन वर्तमान में ये सभी सुविधाएं केवल 'शोपीस' बनकर रह गई हैं। संचालन और निगरानी के अभाव में डॉरमेट्री और नेचर सेंटर निष्क्रिय पड़े हैं। यदि इन सुविधाओं को सक्रिय कर दिया जाए, तो विभाग को राजस्व मिलने के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या में भी भारी इजाफा हो सकता है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के दावों की खुली पोल
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार पर्यटन को रोजगार से जोड़ने और सुविधाओं के विस्तार की बात करती है, लेकिन राजदरी के हालात इन दावों पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। जब विभाग को ज्ञात है कि 26 जनवरी जैसे बड़े पर्व पर लोग भारी संख्या में यहाँ का रुख करेंगे, तो पहले से तैयारियां क्यों नहीं की गईं? क्या प्रशासन किसी अप्रिय स्थिति या पर्यटकों के भारी विरोध का इंतजार कर रहा है?

जमीनी सच्चाई और विभागीय उदासीनता
मौके पर तैनात कर्मचारियों और स्थानीय सूत्रों की मानें तो वन विभाग की ओर से केवल फाइलें दौड़ाई जा रही हैं। कैंटीन संचालन को लेकर अब तक कोई टेंडर या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई है। अंदर खाना बनाने पर रोक होने के कारण जो लोग पिकनिक मनाने की मंशा से आते हैं, उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। 26 जनवरी को उमड़ने वाली संभावित भीड़ के मद्देनजर यदि समय रहते कैंटीन और पेयजल की सुचारू व्यवस्था नहीं की गई, तो राजदरी पर्यटन स्थल की छवि और धूमिल हो सकती है।

अब देखना यह है कि डीएफओ बी. शिवशंकर का 'आश्वासन' कब 'कार्रवाई' में तब्दील होता है और गणतंत्र दिवस पर यहाँ आने वाले मासूम बच्चों व परिवारों को बुनियादी सुविधाएं मिल पाती हैं या नहीं।

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