अदालत ने तहसीलदार से पूछा, बिना दस्तावेज सत्यापन किए कैसे चलाया बुलडोजर, होगी कार्रवाई
तहसीलदार नौगढ़ सहित कई अफसर कोर्ट में तलब किए गए
कानूनगो और लेखपाल के साथ कई को मजिस्ट्रेट ने किया तलब
मलेवरिया गांव में मनमानी कार्रवाई का मामला गरमाया
31 मई की सुबह चला था जेसीबी, न नोटिस न सुनवाई..सीधे ढहाया मकान
चंदौली जिले में तहसील नौगढ़ के मलेवरिया गांव में 31 मई 2025 को राजस्व टीम ने एक गरीब महिला के निर्माणाधीन पक्के मकान पर जेसीबी चला दी। पीड़िता का आरोप है कि कार्रवाई से पहले ना कोई कानूनी नोटिस दिया गया, ना कोई जांच, और ना ही उसे अपना पक्ष रखने का मौका। चहारदीवारी, बिल्डिंग मैटेरियल और पूरा स्ट्रक्चर शून्य कर दिया गया।
पीड़िता गीता तिवारी ने आरोप लगाया कि राजस्व कर्मियों ने फर्जी कागज तैयार कर उसके प्लॉट को अवैध भूमि दिखा दिया, जबकि उसके पास सभी वैध अभिलेख मौजूद थे। उन्होंने कहा—“कार्रवाई पहले की गई, जांच बाद में शुरू हुई। यह सीधी-सीधी शक्ति का दुरुपयोग और कानून का दमन था।
विभागीय जांच में खुली बड़ी गड़बड़ी
आपको बता दें कि मकान ढहने के बाद गीता तिवारी ने डीएम, कमिश्नर और न्यायालय में शिकायत दर्ज की। विभागीय जांच में यह तथ्य सामने आया कि दस्तावेज़ों में हेरफेर कर मकान को जानबूझकर अवैध दिखाया गया, जबकि पीड़िता द्वारा प्रस्तुत कागजात पूरी तरह वैध पाए गए। जांच रिपोर्ट ने राजस्व टीम की मनमानी और प्रक्रिया के उल्लंघन को उजागर कर दिया।
अदालत में 1 दिसंबर को तहसीलदार, लेखपाल–कानूनगो तलब
इस मामले में सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट चंदौली इश्रत परवीन की अदालत ने नायब तहसीलदार प्रवीण नारायण, लेखपाल मनीष सिंह, और कानूनगो अजय कुमार श्रीवास्तव को एक दिसंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने पूछा है कि बिना नोटिस, बिना आदेश और बिना दस्तावेज सत्यापन के बुल्डोज़र क्यों चलाया गया? साथ ही कार्रवाई के आधार पर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
बच्चों का भविष्य खतरे में—अब न्याय ही आखिरी उम्मीद
गीता तिवारी का कहना है कि मकान गिराए जाने से उसका लाखों रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा—“सालों की जमा पूंजी लगी थी, अब हम खुले में हैं। जो हमारे साथ हुआ, वह किसी के साथ नहीं होना चाहिए।” वह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग कर रही हैं।
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