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नौगढ़ के किसान के बेटे की बड़ी कामयाबी: 41 साल की उम्र में क्रैक किया TGT, 121 सवाल सही कर युवाओं को दी सीख

चंदौली के नौगढ़ निवासी 41 वर्षीय तीरथनाथ यादव ने खेती-किसानी के साथ पढ़ाई कर TGT हिंदी परीक्षा पास की है। 121 सवाल सही कर उन्होंने साबित कर दिया कि सफलता उम्र से नहीं, मजबूत हौसले से मिलती है।

 
 

41 साल की उम्र में TGT परीक्षा पास

नौगढ़ के बोदलपुर गांव में जश्न का माहौल

खेती के साथ रोज 4-5 घंटे की पढ़ाई

TGT हिंदी परीक्षा में 121 सवाल सही

ओवरएज की निराशा में डूबे युवाओं को संदेश

सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं के मुंह से अक्सर यही सुनने को मिलता है—"अब तो उम्र निकल गई, अब क्या होगा?" लेकिन चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील स्थित बोदलपुर गांव के रहने वाले तीरथनाथ यादव ने इस सोच को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है।
उन्होंने साबित कर दिया है कि इंसान की हार उम्र से नहीं, बल्कि हिम्मत हारने से होती है। 41 साल की उम्र में तीरथनाथ ने टीजीटी (TGT) हिंदी परीक्षा में 121 सवाल सही कर न केवल सफलता हासिल की है, बल्कि निराश हो चुके युवाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण भी जगाई है।

खेत भी संभाला, परिवार भी... और सपना भी नहीं छोड़ा
बोदलपुर गांव के रहने वाले मंगल यादव के बेटे तीरथनाथ यादव खुद भी खेती-किसानी का काम करते हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों और घर की आर्थिक तंगी की वजह से उनकी पढ़ाई बीच में काफी प्रभावित हुई थी। लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य को आंखों से ओझल नहीं होने दिया।
जीआईसी नौगढ़ से हाईस्कूल, आदित्य इंटर कॉलेज चकिया से इंटरमीडिएट और सावित्रीबाई फुले महाविद्यालय चकिया से ग्रेजुएशन करने के बाद भी उनका संघर्ष जारी रहा। वे दिन भर खेत-किसानी का काम संभालते और रोज 4 से 5 घंटे पढ़ाई के लिए निकालते थे। उन्होंने पुराने क्वेश्चन पेपर हल किए, अपनी कमियों पर मेहनत की और आखिरकार टीजीटी में सफलता पा ली।

क्या युवाओं तक पहुंचेगी यह मिसाल?
तीरथनाथ की यह शानदार सफलता ऐसे समय में आई है जब बेरोजगारी, परीक्षाओं में देरी और उम्र सीमा खत्म होने को लेकर युवाओं के बीच काफी निराशा का माहौल है। ऐसे कठिन समय में नौगढ़ के तीरथनाथ की यह उपलब्धि बताती है कि लगातार मेहनत और पक्का इरादा ही सफलता की असली चाबी है। उनकी यह कहानी सरकार और प्रशासन के लिए भी एक बड़ा संदेश है। अगर ग्रामीण इलाकों के हुनरमंद युवाओं को सही मार्गदर्शन, समय पर नौकरियां और पढ़ाई का अच्छा माहौल मिले, तो हमारे गांवों से भी ऐसी कई बड़ी सफलताएं निकलकर सामने आ सकती हैं।

गांव में जश्न, प्रतियोगियों में नई उम्मीद... तीरथनाथ बने नौगढ़ की पहचान
जैसे ही तीरथनाथ की सफलता की खबर गांव पहुंची, पूरे बोदलपुर में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव वालों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर बधाई दी। खबर मिलते ही आसपास के इलाकों से प्रतियोगी छात्र भी तीरथनाथ से मिलने और उनका मार्गदर्शन लेने पहुंचने लगे। 

छात्रों का कहना है कि जब किसान परिवार का एक व्यक्ति 41 साल की उम्र में इतनी बड़ी परीक्षा पास कर सकता है, तो कोई भी सिर्फ उम्र का बहाना बनाकर हार नहीं मान सकता। नौगढ़ के तीरथनाथ की यह कामयाबी अब केवल एक इंसान की जीत नहीं है, बल्कि पूरे चंदौली जिले के युवाओं के लिए आत्मविश्वास और संघर्ष का नया प्रतीक बन चुकी है।

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