आम के बगीचे में लगी 'गांव की सरकार', कुर्सियां छोड़ ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठीं महिला प्रधान नीलम ओहरी
आम के बगीचे में सजी चौपाल
जमीन पर बैठीं महिला प्रधान नीलम
आवास के 360 नाम पढ़े गए
10 संदिग्ध नामों पर आई आपत्ति
सरकारी योजनाओं के सत्यापन में अक्सर कागजी औपचारिकताएं ही देखने को मिलती हैं, लेकिन चंदौली जिले के विकास खंड नौगढ़ की बाघी ग्राम पंचायत में कुछ अलग ही नजारा दिखा। यहाँ प्रधानमंत्री आवास योजना के पारदर्शी सत्यापन के लिए गुरुवार को आम के बगीचे में एक खुली चौपाल बुलाई गई थी। इस बैठक में प्रोटोकॉल और वीआईपी कल्चर को किनारे रखते हुए महिला ग्राम प्रधान नीलम ओहरी और पंचायत सचिव जितेंद्र प्रताप सिंह यादव कुर्सियां छोड़कर सीधे ग्रामीणों के बीच दरी बिछाकर जमीन पर बैठ गए। जनप्रतिनिधि और अधिकारी को अपने बीच जमीन पर बैठा देख ग्रामीण गद्गद हो गए और कहने लगे कि आज सचमुच 'गांव की सरकार' उनके द्वार आई है।
जनता के सामने खुलेआम पढ़े गए 360 नाम
इस खुली चौपाल में पारदर्शिता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की गई। पंचायत सचिव ने गांव वालों के सामने एक-एक कर कुल 360 संभावित आवास लाभार्थियों के नाम जोर-जोर से पढ़कर सुनाए। सार्वजनिक रूप से नाम पढ़े जाने के दौरान ग्रामीणों ने खुद सामाजिक निगरानी (सोशल ऑडिट) की कमान संभाली। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान ग्रामीणों ने 10 ऐसे नामों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई जो उनके हिसाब से इस योजना के लिए अपात्र थे। मौके पर दर्ज की गई इन 10 आपत्तियों को नोट कर लिया गया है और अब जांच के बाद ही अंतिम सूची तैयार होगी।
सुशासन और जनभागीदारी का बना नया मॉडल
आमतौर पर जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता से दूरी बनाकर मंच पर बैठते हैं, लेकिन बाघी गांव की इस चौपाल ने सामाजिक स्तर पर एक बेहद सकारात्मक संदेश दिया है। बुजुर्गों, महिलाओं और गरीब परिवारों के बीच बैठकर उनकी बातें सुनने की प्रधान की इस सादगी की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर हर सरकारी योजना की समीक्षा इसी तरह पूरी पारदर्शिता के साथ जनता की मौजूदगी में की जाए, तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और केवल जरूरतमंद व पात्र लोगों तक ही सरकारी लाभ पहुंचेगा।
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