जिले का पहला ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलMovie prime

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा विकास: शहाबगंज के रोहाखी गांव में पंचायत भवन बदहाल, अन्नपूर्णा भवन का बजट डकारने का आरोप ​​​​​​​

चंदौली के रोहाखी गांव में लाखों की लागत से बने पंचायत और अन्नपूर्णा भवन सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। ताले में बंद दफ्तर और अधूरे निर्माण के बीच ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। पढ़िए प्रशासन की लापरवाही की पूरी रिपोर्ट।

 
 

रोहाखी पंचायत भवन में लटका ताला

अधूरा पड़ा 9.75 लाख का अन्नपूर्णा भवन

घर बैठे काम कर रहे पंचायत सहायक

महीनों से लापता है गांव का रोजगार सेवक

एडीओ पंचायत ने दिए जांच के निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत भवनों को डिजिटल हब के रूप में विकसित कर रही है, लेकिन चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत रोहाखी गांव में हकीकत इसके उलट है। यहाँ लाखों रुपये की सरकारी धनराशि खर्च होने के बावजूद विकास योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। गांव का पंचायत भवन आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

Chandauli news Rohaki panchayat scam, Shababganj Chandauli khabar rural development

ताले में बंद व्यवस्था और अधूरे सूचना बोर्ड
करीब पांच लाख रुपये की लागत से निर्मित रोहाखी का पंचायत भवन अधिकतर समय ताले में बंद रहता है। आलम यह है कि भवन पर लगाए गए सूचना बोर्ड आज तक अधूरे हैं, जो विभाग की उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण हैं। भवन के मुख्य द्वार पर ईंट के टुकड़े और कंक्रीट का ढेर लगा हुआ है, जबकि परिसर के सामने पुवाल के ढेर ने इसे डंपिंग यार्ड बना दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें एक छोटे से काम के लिए भी भटकना पड़ता है।

घर बैठे ड्यूटी और अधूरे निर्माण का संकट
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पंचायत भवन की उपलब्धता के बावजूद पंचायत सहायक अपने कार्यों का निस्तारण दफ्तर के बजाय घर से करता है। वहीं, इसी परिसर में 9 लाख 75 हजार रुपये की लागत से बनने वाला अन्नपूर्णा भवन पिछले आठ महीनों से निर्माण की राह देख रहा है। केवल आधी-अधूरी दीवारें खड़ी करके काम रोक दिया गया है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग और बंदरबांट की आशंका जताई जा रही है।

नदारद रोजगार सेवक और ग्रामीणों का आक्रोश
गांव के विकास की एक अहम कड़ी रोजगार सेवक भी पिछले कई महीनों से गांव से नदारद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार सेवक के गांव में न रहने से मनरेगा और अन्य विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। लोगों का सवाल है कि जब जिम्मेदार कर्मचारी ही मौके पर मौजूद नहीं रहेंगे, तो गांव का विकास कैसे होगा? क्या यह शासन की योजनाओं को सीधे तौर पर चुनौती देने जैसा नहीं है?

प्रशासनिक रुख: जांच और कार्रवाई का आश्वासन
इस पूरे प्रकरण पर जब एडीओ पंचायत अरविंद सिंह से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि ग्राम प्रधान से बातचीत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि रोजगार सेवक से संपर्क करने के प्रयास भी अब तक असफल रहे हैं। एडीओ पंचायत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आश्वासन दिया है कि जल्द ही स्थलीय निरीक्षण कर दोषी कर्मचारियों और लापरवाह प्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना यह है कि क्या रोहाखी के ग्रामीणों को उनके हक का पंचायत भवन और अन्नपूर्णा भवन मिल पाता है या यह भ्रष्टाचार की फाइलों में हमेशा के लिए दब जाएगा।

Tags

चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*