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अलविदा की नमाज में नन्हें उमैर ने आजम खान की रिहाई व शिफा के लिए मांगी दुआ
देश व दुनिया पर आए आफत के बीच शुक्रवार को माह-ए-रमजान के अंतिम जुमा यानि अलविदा की नमाज अदा की गयी। इस दौरान हर शख्स समाज में तेजी से फैली रही किल्लत को दूर करने के साथ लोगों के बीच कायम मिल्लत के दायरे मजबूत करने की दुआ करता नजर आया। ऐसे में धानापुर पठान टोली निवासी उमैर पठान ने भी परिवार के साथ अलविदा की नमाज पूरी अकीदत के साथ अदा की
 

उमैर पठान ने बीमार लोगों के सेहत आफ्ता होने की दुआ की

विश्व व देश में फैलती अशांति व तेजी से संकुचित होते अमन-चैन के दायरे के विस्तार की दुआ मांगी

 देश व दुनिया पर आए आफत के बीच शुक्रवार को माह-ए-रमजान के अंतिम जुमा यानि अलविदा की नमाज अदा की गयी। इस दौरान हर शख्स समाज में तेजी से फैली रही किल्लत को दूर करने के साथ लोगों के बीच कायम मिल्लत के दायरे मजबूत करने की दुआ करता नजर आया। ऐसे में धानापुर पठान टोली निवासी उमैर पठान ने भी परिवार के साथ अलविदा की नमाज पूरी अकीदत के साथ अदा की। बाद नमाज उन्होंने तमाम उन गरीब, असहाय व बेबस लोगों के लिए दुआ की, जो पैसों व संसाधनों के अभाव में रमजान व ईद की खुशियों से महरूम हैं। साथ ही लम्बे समय से जेल में निरूद्ध चल रहे सपा के कद्दावर नेता आजम खां के शिफा और उनकी रिहाई के लिए भी उमैर पठान ने दुआ की। 

उमैर पठान ने बीमार लोगों के सेहत आफ्ता होने की दुआ की। साथ ही कोरोना जैसी वैश्विक बीमारी से आदतजात को बचाने की दुआएं की। वहीं विश्व व देश में फैलती अशांति व तेजी से संकुचित होते अमन-चैन के दायरे के विस्तार की दुआ मांगी। अपनी दुआओं में उन्होंने सर्वधर्म के अशक्त लोगों की बेहतरी, भलाई व उनके दिनी जरूरतों को पूरा करते हुए उनकी मुश्किलों को आसान करने की दुआ की।

 दरअसल छह साल के नन्हें उमैर हर बार जब भी वे नमाज अदा करते हैं कि उन तमाम गरीब लोगों के लिए दुआएं करते हैं जो अपने जीवन को जीने के लिए हर दिन तमाम दुश्वारियों व मुश्किल भरे हालात से जूझते हैं।

 उन्होंने कोरोना काल को देखा और अपने पास पड़ोस के इलाके में लोगों को कोविड-19 संक्रमण के कारण मौत को आगोश में जाते हुए देखा और उस तकलीफ को बेहद करीब से महसूस किया है, लिहाजा वह हर किसी की सलामती की दुआ करते हैं और इस वैश्विक महामारी के समूल नाश की खुदा से दुआ करते हैं ताकि अब आगे आने वाले दिनों में इस जानलेवा बीमारी से किसी और की जान न जाने पाए। 

अलविदा की नमाज के बाद उन्होंने उन गरीब मुस्लिम भाई-बहनों के लिए खुशियां दुआ में मांगी, जो मुश्किलों से घिरे हैं और आर्थिक संकट के कारण ईद व रमजान की खुशियां चाहकर भी मना नहीं पा रहे हैं। उन्होंने ऐसे भाई-बहनों की मदद के लिए दुआएं मांगी।