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चंदौली के वकीलों के 28 साल के संघर्ष की जीत, कांग्रेस ने पंडित कमलापति त्रिपाठी की प्रतिमा के पास जश्न

चंदौली में जिला न्यायालय भवन के शिलान्यास को कांग्रेस ने अधिवक्ताओं के लंबे संघर्ष का परिणाम बताया है। कार्यकर्ताओं ने विकास पुरुष पंडित कमलापति त्रिपाठी को नमन कर खुशी जताई और कहा कि यह जीत न्यायपालिका की गरिमा की है, किसी राजनीतिक दल की नहीं।

 

अधिवक्ताओं के 28 वर्षों के संघर्ष का हुआ सुखद अंत

पंडित कमलापति त्रिपाठी की प्रतिमा पर भव्य माल्यार्पण

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थन का मिला फल

डिस्ट्रिक्ट एवं सिविल बार एसोसिएशन ने जताया आभार

न्यायालय शिलान्यास को बताया संवैधानिक प्रक्रिया, नहीं है कोई राजनीतिक श्रेय

चंदौली जिले में एकीकृत न्यायालय परिसर के शिलान्यास के बाद कांग्रेस जनों और अधिवक्ताओं के बीच उत्साह का संचार देखा गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिले के 'विकास पुरुष' माने जाने वाले स्वर्गीय पंडित कमलापति त्रिपाठी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि आज जो न्यायालय भवन की सौगात जिले को मिली है, वह किसी राजनीतिक दल का उपकार नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के बीते 28 वर्षों के अनवरत संघर्ष और आंदोलन का परिणाम है।

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आंदोलन की यादें और कांग्रेस का समर्थन 
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी ने याद दिलाया कि करीब तीन दशकों से जिला न्यायालय भवन के अभाव में अधिवक्ता और वादकारी भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। इस मांग को लेकर वकीलों ने धरना-प्रदर्शन से लेकर प्रतीकात्मक शव यात्रा तक निकाली। पिछले वर्ष वकीलों ने पंडित कमलापति त्रिपाठी पार्क में प्रतिमा का अभिषेक कर आशीर्वाद मांगा था, जो आज पूरा हुआ। इस संघर्ष में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने स्वयं धरने में शामिल होकर और शासन को पत्र लिखकर वकीलों की आवाज बुलंद की थी, जिसके लिए बार एसोसिएशन ने कांग्रेस का आभार भी प्रकट किया है।

'राजनीतिक श्रेय नहीं, यह संवैधानिक दायित्व है' 
शिलान्यास के आयोजन पर वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. नारायण मूर्ति ओझा और शशीनाथ उपाध्याय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिला न्यायालयों की स्थापना न्यायपालिका की संस्तुति और संवैधानिक आवश्यकताओं के तहत होती है। इसे किसी एक दल की राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रचारित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वकीलों का कहना है कि यह उनकी वर्षों की तपस्या और शासन पर बनाए गए निरंतर दबाव की जीत है।

जनता और कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर
 कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कांग्रेस पदाधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि पंडित कमलापति त्रिपाठी ने जिस आधुनिक चंदौली का सपना देखा था, यह नया कोर्ट परिसर उसी दिशा में एक मजबूत कदम है। वकीलों ने संकल्प लिया कि वे न्यायिक प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए काम करते रहेंगे

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