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चंदौली में कांग्रेस का हल्लाबोल: मनरेगा का नाम बदलने और बजट कटौती के खिलाफ सड़कों पर उतरे कांग्रेसी

चंदौली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा योजना के स्वरूप को बदलने के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गरीबों के रोजगार के अधिकार को समाप्त करने की साजिश रच रही है।

 

मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन का विरोध

कांग्रेस का विशाल पैदल मार्च और जिला स्तरीय प्रदर्शन

रोजगार गारंटी अधिकार पर संकट का लगाया है आरोप

भाजपा सरकार की गरीब विरोधी नीतियों को उजागर करने की पहल

चंदौली जिला कांग्रेस कमेटी ने शुरू किया है आंदोलन

 चंदौली जिले में सोमवार, 22 दिसंबर को राजनीतिक सरगर्मी तेज रही। जिला कांग्रेस कमेटी चंदौली और शहर कांग्रेस कमेटी मुगलसराय के संयुक्त तत्वावधान में केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर पैदल मार्च निकाला। कांग्रेस का आरोप है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने की आड़ में सरकार वास्तव में इस क्रांतिकारी योजना को ही समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए इसे गरीबों के पेट पर लात मारने वाला निर्णय करार दिया।

'गांधी के नाम और मूल्यों को मिटाने का राजनीतिक प्रयास'
विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से उपस्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव देवेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा कांग्रेस सरकार की एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। यह विश्व की सबसे बड़ी जनकल्याणकारी योजना है जिसने देश के करोड़ों मजदूरों और गरीबों को सम्मान के साथ जीने का हक दिया। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा सरकार केवल नाम नहीं बदल रही, बल्कि वह महात्मा गांधी की विचारधारा और उनके मूल्यों को देश के मानस पटल से मिटाना चाहती है। उनके अनुसार, जिस विचारधारा ने गांधी की हत्या की, वही अब उनके नाम से जुड़ी योजनाओं को खत्म करने का कुत्सित प्रयास कर रही है।

आर्थिक बोझ और राज्यों की हिस्सेदारी पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान देवेंद्र प्रताप सिंह ने योजना के नए वित्तीय ढांचे पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत अब योजना का 40 प्रतिशत आर्थिक बोझ राज्यों को उठाना होगा। वर्तमान में देश के कई राज्य पहले से ही भारी कर्ज और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, ऐसे में राज्यों के लिए मनरेगा का बजट वहन करना मुश्किल होगा। यह बदलाव सीधे तौर पर योजना को ठंडे बस्ते में डालने जैसा है, क्योंकि फंड की कमी के चलते स्वतः ही मजदूरों को काम मिलना बंद हो जाएगा। कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार की अपनी जिम्मेदारियों से भागने की रणनीति बताया है।

जन आंदोलनों से उपजे कानून को कमजोर करने का आरोप
जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा कोई सामान्य सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह जन आंदोलनों से जन्मा एक कानूनी अधिकार है। 'हर हाथ को काम और काम का पूरा दाम' के वादे को यह योजना मजबूती प्रदान करती थी। भाजपा सरकार द्वारा इसे निरस्त या कमजोर करने का निर्णय एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। उन्होंने कहा कि गरीबों के रोजगार गारंटी के अधिकार को छीनकर सरकार अब कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने की नीति पर चल रही है। शहर अध्यक्ष बृजेश गुप्ता ने भी स्वर मिलाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी और गरीबों के हक की लड़ाई को सड़क से संसद तक लड़ेगी।

भारी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की रही मौजूदगी
मुगलसराय में आयोजित इस विरोध मार्च में जिले के कोने-कोने से आए कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने की और संचालन शिवेंद्र मिश्रा द्वारा किया गया। इस अवसर पर मधु राय, सतीश बिंद, गंगा प्रसाद, राजेंद्र गौतम, रजनी कांत पांडे, रामानंद यादव और दया राम पटेल सहित सैकड़ों पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से मांग की कि मनरेगा के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ बंद की जाए और मजदूरों के रोजगार की गारंटी को अक्षुण्ण रखा जाए। प्रदर्शन के अंत में कांग्रेसियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और भी उग्र होगा।

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