आधी संसद, पूरा अधिकार: दर्शना सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बताया महिला सशक्तिकरण का ऐतिहासिक मील का पत्थर
राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को भारतीय लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय करार दिया है। उन्होंने कहा कि 33% आरक्षण से अब महिलाएं नीति निर्धारण में अग्रणी भूमिका निभाएंगी, जिससे देश के विकास को नई दिशा मिलेगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम ऐतिहासिक पहल
संसद और विधानसभा में 33% आरक्षण
प्रधानमंत्री मोदी का महिला केंद्रित विजन
विपक्षी सरकारों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर प्रहार
विकास योजनाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
नारी शक्ति का उदय: आधी आबादी से आधी संसद तक सशक्त भारत की ओर ऐतिहासिक कदम - सांसद दर्शना सिंह
भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक युग परिवर्तनकारी कदम है। उत्तर प्रदेश के चंदौली से राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह ने इस अधिनियम को लेकर अपने विचार साझा करते हुए इसे विकसित भारत की नींव बताया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में पारित यह अधिनियम देशभर की महिलाओं के लिए समान अधिकार और निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबरी सुनिश्चित करने का एक क्रांतिकारी माध्यम सिद्ध होगा।
दशकों का इंतजार हुआ खत्म
सांसद दर्शना सिंह ने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान लंबे समय से लंबित था। पूर्ववर्ती सरकारों ने दशकों तक इस मुद्दे को केवल चर्चाओं और चुनावी वादों तक सीमित रखा। ठोस निर्णय लेने के बजाय राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में इस महत्वपूर्ण कानून को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके दृढ़ संकल्प ने ही करोड़ों महिलाओं के इस सपने को हकीकत में बदला है।
नीति निर्माण में महिलाओं का दृष्टिकोण
वर्तमान में संसद में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14-15 प्रतिशत है, जो उनकी जनसंख्या के अनुपात में काफी कम है। सांसद दर्शना सिंह ने उल्लेख किया कि यह अधिनियम न केवल इस लैंगिक असंतुलन को दूर करेगा, बल्कि कानून बनाने की प्रक्रिया में महिलाओं के संवेदनशील और समावेशी दृष्टिकोण को भी शामिल करेगा। जब महिलाएं नीति निर्धारण में अग्रणी होंगी, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलेगी। इससे समाज की संरचना में सकारात्मक बदलाव आएगा।
योजनाओं का जाल और महिला सशक्तिकरण
दर्शना सिंह ने जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने सरकार की प्रमुख योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' ने समाज की सोच बदली है, वहीं 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' ने महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा की है। 'सुकन्या समृद्धि योजना' और 'मुद्रा योजना' के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। ये सभी प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार महिलाओं को हर स्तर पर मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि
सांसद ने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन स्पष्ट करते हैं कि जहां राजनीति और प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी अधिक होती है, वहां भ्रष्टाचार कम होता है और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी तरीके से होता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम से राजनीति में जवाबदेही बढ़ेगी। यह कानून आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। जब देश की बेटियां महिला नेताओं को बड़े निर्णय लेते हुए देखेंगी, तो उनका आत्मविश्वास नई ऊंचाइयों को छुएगा।
वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख
अंत में सांसद दर्शना सिंह ने कहा कि यह अधिनियम भारत को वैश्विक मंच पर एक प्रगतिशील और समावेशी लोकतंत्र के रूप में स्थापित करता है। यह कानून उस भविष्य की नींव रख रहा है जहां महिलाएं केवल 'वोट बैंक' नहीं होंगी, बल्कि देश की दिशा और दशा निर्धारित करने वाली सशक्त नेतृत्वकर्ता होंगी। उन्होंने आह्वान किया कि सभी को मिलकर इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करना चाहिए ताकि नारी शक्ति वास्तव में राष्ट्र शक्ति में परिवर्तित हो सके। यह अधिनियम "सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" की भावना को चरितार्थ करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।
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