प्रधान बने प्रशासक तो गरमाई सियासत: सरकार के फैसले पर कहीं बंटी मिठाइयां, तो कहीं उठे गंभीर सवाल!
चंदौली में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकार ने उन्हें ही गांवों का प्रशासक बना दिया है। इस फैसले से जिले की 734 पंचायतों में सियासत गरमा गई है। विपक्ष इसे लोकतंत्र के खिलाफ बता रहा है, तो भाजपा इसे विकास के लिए जरूरी कह रही है। पूरी खबर पढ़ें।
चंदौली की 734 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति
अधिकांश पूर्व प्रधानों को दोबारा मिली गांवों की कमान
7 ग्राम पंचायतों में एडीओ को सौंपी गई जिम्मेदारी
विपक्ष ने सरकार पर लगाया पंचायत चुनाव टालने का आरोप
फाइलों के चक्कर में कमीशनखोरी बढ़ने की प्रधानों को आशंका
चंदौली जिले में ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें ही गांवों का 'प्रशासक' नियुक्त किए जाने के फैसले ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। इस फैसले के बाद गांवों की चौपालों से लेकर जिला मुख्यालय के राजनीतिक गलियारों तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जहां एक तरफ पूर्व प्रधान इस फैसले से गदगद हैं और इसका स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ बताकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
734 पंचायतों का गणित: कहीं प्रधान तो कहीं एडीओ राज
चंदौली जनपद में कुल 734 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से ज्यादातर पंचायतों में पुराने निर्वाचित प्रधानों को ही प्रशासक के तौर पर दोबारा कमान सौंप दी गई है। हालांकि, 7 ग्राम पंचायतों में प्रधानों की अनुपस्थिति या तकनीकी कारणों की वजह से सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ) को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है।
अगर ब्लॉकवार बात करें, तो धानापुर ब्लॉक के शांतिपुर तोरवा, जीयनपुर और मिश्रपुरा में एडीओ को प्रशासक बनाया गया है। इसके अलावा सदर विकास खंड के पूर्वतालुके चकिया और नेगुरा, सकलडीहा ब्लॉक के कोडरिया और चकिया ब्लॉक के तियरी ग्राम पंचायत में भी सरकारी बाबुओं (एडीओ) के हाथ में गांव की चाबी सौंप दी गई है। सरकार का तर्क है कि जब तक नए चुनाव नहीं होते, तब तक गांवों के विकास कार्य न रुकें, इसलिए यह फैसला लिया गया है।
प्रधानों को राहत, पर कमीशनखोरी का सता रहा डर
इस फैसले पर प्रधान संघ के जिला अध्यक्ष पवन सिंह ने साफ कहा कि हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं। कई प्रधानों को लग रहा है कि चुनाव टलने से उन्हें काम करने का और मौका मिल गया है, क्योंकि अगली बार आरक्षण बदलने से उनकी सीट हाथ से जा सकती थी। हालांकि, कुछ प्रधानों के मन में एक बड़ा डर भी है। उनका कहना है कि अब काम की मंजूरी और भुगतान के लिए डीपीआरओ के माध्यम से जिलाधिकारी की अनुमति लेनी होगी। प्रधानों का दर्द है कि फाइल जितने ज्यादा टेबल पर घूमेगी, उतनी ही ज्यादा कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका रहेगी।
सपा जिलाध्यक्ष का तीखा हमला: संविधान अंतिम सांसें गिन रहा है
सरकार के इस फैसले पर समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सतनारायण राजभर ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में सभी संवैधानिक संस्थाएं और पद अपनी अंतिम सांसें गिन रहे हैं। सत्ता की लालसा में नियमों को ताक पर रखकर प्रधानों को प्रशासक बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी कोर्ट में है और न्यायालय जो भी तय करेगा, सपा उसका सम्मान करेगी।
बसपा और कांग्रेस ने घेरा: हार के डर से भाग रही है भाजपा
बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष घनश्याम प्रधान ने कहा कि प्रदेश में बसपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है, इसी डर से भाजपा पंचायत चुनाव कराने से भाग रही है। उन्होंने दावा किया कि 2027 में बसपा बड़ा उलटफेर करेगी। वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी संभावित हार से बुरी तरह डर गई है। अगर अभी पंचायत चुनाव होते, तो जनता का मूड साफ हो जाता, इसीलिए सरकार ने कार्यकाल पूरा कर चुके लोगों को ही कुर्सी पर बिठा दिया।
भाजपा का पलटवार: विपक्ष का काम सिर्फ मीन-मेख निकालना
विपक्ष के इन सभी तीखे आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दो टूक कहा, "अगर हम दो दूना चार भी कहेंगे, तो विपक्ष उसे गलत ही बताएगा।" राणा सिंह ने कहा कि सरकार गांवों के विकास को रोकने की विरोधी है। कुछ कानूनी अड़चनों के कारण चुनाव में देरी हुई है।
उन्होंने साफ किया कि प्रशासक बनाए गए सभी प्रधान भाजपा के नहीं हैं, बल्कि वे सभी विचारधाराओं के हैं। सरकार ने यह फैसला सिर्फ और सिर्फ ग्रामीण जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिया है। फिलहाल, चंदौली की ग्रामीण राजनीति में यह मुद्दा पूरी तरह छाया हुआ है और हर किसी की नजर अब इस पर कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी है।
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