मनोज सिंह डब्लू बोले, पुलिस की ज्यादती के बाद मौके पर गया, हाई वोल्टेज ड्रामे के लिए पुलिस ही जिम्मेदार
चंदौली जिले के सैदराजा में मूर्ति विसर्जन के दौरान रूट को लेकर पुलिस और जनता में ठन गई। पूर्व विधायक और सीओ के बीच बहस और पुलिस लाठीचार्ज के बाद विसर्जन रुक गया।
खबर के Highlights (Long Tail Phrases)
सैदराजा में विसर्जन मार्ग को लेकर भारी बवाल
पूर्व विधायक मनोज डब्लू और सीओ में तीखी बहस
भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस का लाठीचार्ज
आक्रोशित लोगों ने बीच सड़क पर छोड़ी मूर्तियां
भोर में 4 बजे स्थानीय लोगों ने कराया विसर्जन
चंदौली जिले के सैदराजा में सरस्वती मूर्ति विसर्जन के दौरान उस समय भारी हंगामा देखने को मिला। विसर्जन के लिए निकले जुलूस का मार्ग पहले से स्पष्ट रूप से तय न होने के कारण पुलिस और विसर्जन समितियों के बीच ठन गई। जिससे साफ हो गया कि सैयदराजा नगर में शांति समिति की बैठकें कागजों तक ही सीमित रहीं और मौके पर पुलिस की व्यवस्था में बड़ी खामी उजागर हुई। जुलूस को अचानक माल गोदाम रोड पर रोके जाने के कारण पूरा नगर जाम की चपेट में आ गया और शाम 7 बजे से लेकर रात 12 बजे तक विसर्जन प्रक्रिया पूरी तरह ठप रही। वहीं सपा नेता और पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ने सारे मामले के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया।

डीजे की धमक और नियमों का उल्लंघन का दावा
स्थानीय लोगों ने कहा कि मूर्ति विसर्जन में अयोध्या और सीतापुर से मंगाए गए बड़े-बड़े डीजे का उपयोग किया जा रहा था, जिनकी आवाज से धरती में कंपन महसूस हो रहा था। हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बावजूद विसर्जन के दौरान इन डीजे का शोर जारी रहा। पुलिस ने जब वाहनों के आकार और शोर को देखते हुए रास्ता रोका, तो समितियों और पुलिस के बीच विवाद गहरा गया।
पूर्व विधायक और सीओ के बीच अमर्यादित बहस
हंगामे की सूचना मिलते ही पूर्व विधायक मनोज सिंह 'डब्लू' मौके पर पहुंच गए। विधायक के आते ही विसर्जन में शामिल युवाओं का उत्साह बढ़ गया। इसी दौरान सीओ और पूर्व विधायक के बीच तीखी और अमर्यादित बहस शुरू हो गई,। सीओ द्वारा विधायक को कथित तौर पर 'दंगाई' कहने पर मनोज सिंह डब्लू भड़क गए और उन्होंने कहा कि "दंगा कराना होता तो अभी दस हजार लड़के इकट्ठा कर लेता, मैं जेल जाने से नहीं डरता"। विधायक ने यह भी तर्क दिया कि उन पर पहले से ही 16 मुकदमे हैं, एक और सही।
पुलिस का लाठीचार्ज और आक्रोश
बहस के दौरान ही स्थिति अनियंत्रित हो गई और पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया,। इस कार्रवाई में ट्रैक्टर और डीसीएम के चालक सहित कुछ युवाओं को चोटें आईं। पुलिसिया कार्रवाई से नाराज होकर विसर्जन समिति के लोग अपनी मूर्तियां और वाहन बीच सड़क पर ही छोड़कर चले गए। बीच सड़क पर मूर्तियां छोड़े जाने से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
भोर में कराया गया विसर्जन
देर रात तक चले इस तनावपूर्ण घटनाक्रम के बाद स्थानीय संभ्रांत नागरिकों और प्रशासन के बीच बातचीत हुई। काफी मशक्कत के बाद स्थानीय लोगों के सहयोग से सुबह करीब 4 बजे मूर्तियों का विसर्जन शांतिपूर्वक संपन्न कराया गया,। इस पूरी घटना ने पुलिस की पूर्व तैयारियों और भीड़ नियंत्रण की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूर्व विधायक मनोज सिंह 'डब्लू' ने कहा कि वह मामले को हल कराने के लिए गए थे। लोग बवाल कर रहे थे और सीओ-एसओ चेयरमैन के घर में बैठकर चाय-नाश्ता कर रहे थे। सूचना मिलने पर पहुंचा तो वहां थोड़ी बहुत कहासुनी भी हुयी। लेकिन मेरी मंशा मामले को शांत कराने की थी, लेकिन पुलिस की जिद से मामला बिगड़ा। वह लाठी चार्ज होने और कई लोगों के घायल की सूचना पर ही मौके पर गए थे। अब लोग बात का बतंगड़ बना रहे हैं। मामले में सही-सही जानकारी पेश न करने के लिए पत्रकारों पर भी सवाल उठाए।
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