UGC की 'इक्विटी कमेटी' पर AIPF का बड़ा बयान; कहा- परिसरों में भेदभाव एक कड़वी सच्चाई, नई व्यवस्था जरूरी
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) ने विश्वविद्यालयों में यूजीसी द्वारा प्रस्तावित इक्विटी कमेटियों का समर्थन किया है। फ्रंट के नेता अजय राय ने कहा कि जातिगत पूर्वाग्रह और भेदभाव को खत्म करने के लिए यह एक जवाबदेह संस्थागत तंत्र साबित होगा।
परिसरों में जातिगत पूर्वाग्रह और अपमान एक हकीकत
इक्विटी कमेटी की संरचना को बताया लोकतांत्रिक और समावेशी
शिक्षा संस्थानों में भेदभाव के विरुद्ध औपचारिक तंत्र की मांग
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुद्दे के पटाक्षेप की अपील
बुनियादी मुद्दों—शिक्षा और रोजगार पर एकजुट होने का आह्वान
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रस्तावित 'इक्विटी कमेटियों' के गठन को लेकर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। फ्रंट के राष्ट्रीय कमेटी सदस्य अजय राय ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव एक कड़वी सच्चाई है, जिससे निपटने के लिए नई नियमावली एक आवश्यक कदम है।
संस्थानों में भेदभाव काल्पनिक नहीं, दैनिक अनुभव: AIPF
अजय राय ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में जातिगत पूर्वाग्रह, सामाजिक बहिष्कार और अपमानजनक व्यवहार कोई काल्पनिक बातें नहीं हैं। जो भी छात्र विश्वविद्यालयों या कॉलेजों से जुड़ा रहा है, वह जानता है कि रैगिंग, मौखिक उत्पीड़न और किसी विशेष वर्ग को निशाना बनाना परिसरों के दैनिक अनुभव का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन समस्याओं को नजरअंदाज करने से वे समाप्त नहीं होतीं, बल्कि इनके समाधान के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह संस्थागत तंत्र की आवश्यकता होती है।
इक्विटी कमेटी की संरचना को बताया संतुलित
प्रस्तावित नियमावली का बचाव करते हुए एआईपीएफ ने स्पष्ट किया कि इक्विटी कमेटी की संरचना किसी भी तरह से पक्षपातपूर्ण नहीं है। इस कमेटी में कुलपति (Vice-Chancellor) अध्यक्ष होंगे और उनके साथ वरिष्ठ प्रोफेसर तथा दो छात्र प्रतिनिधियों को जगह दी जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), महिलाओं और दिव्यांगजनों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है। फ्रंट के अनुसार, ऐसी संरचना परिसरों को अधिक सुरक्षित, लोकतांत्रिक और समावेशी बनाने के लिए अनिवार्य है।
अंतिम फैसले के बाद शांति की अपील
एआईपीएफ का मत है कि इस पहल को किसी भी समुदाय के विरुद्ध मानना पूरी तरह भ्रामक है। यह कदम केवल न्याय, गरिमा और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई और आने वाले फैसले का उल्लेख करते हुए अजय राय ने कहा कि इस मुद्दे पर अब अनावश्यक विवाद बंद होना चाहिए।
उन्होंने अपील की कि किसी भी पक्ष द्वारा भड़काऊ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। अब समय आ गया है कि समाज के सभी तबके और वर्ग एकजुट होकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक अधिकारों जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें और जन पहलकदमी को आगे बढ़ाएं।
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