इसलिए नौकरी छोड़ धनंजय सिंह का करीबी बना आलोक सिंह, करोड़ों की संपत्ति का खुलासा
बर्खास्त सिपाही से अंडरवर्ल्ड तक का सफर
आलोक सिंह अंडरवर्ल्ड कनेक्शन भी तगड़ा
कफ सिरप सिंडीकेट की ईडी जांच में होगा खुलासा
आलोक सिंह करोड़ों की संपत्ति का पता चला
पूर्वांचल के कई माफियाओं से भी संबंध
बिहार शराब तस्करी का राजनीतिक गठजोड़ भी उजागर
चंदौली जिले के रहने वाले आलोक सिंह, जो कभी एसटीएफ में सिपाही थे, बर्खास्त होने के बाद अपराध जगत में तेजी से उभरे। पुलिस सेवा से बाहर होने के बाद उन्होंने पूर्व सांसद और बाहुबली धनंजय सिंह का गनर बनकर अपनी नई पहचान बनाई। इसी दौरान उन्होंने पूर्वांचल के अंडरवर्ल्ड में गहरी पैठ बना ली।
कफ सिरप सिंडीकेट से जुड़ाव
आलोक सिंह का नाम नशीले कफ सिरप सिंडीकेट से जुड़ने के बाद तेजी से सुर्खियों में आया। इस सिंडीकेट के जरिए उन्होंने करोड़ों रुपये की संपत्तियां अर्जित कीं। पुलिस में अपने पुराने संपर्कों और प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्होंने शराब, खनन और नशीले पदार्थों के कारोबार में हिस्सेदारी बढ़ाई।
करोड़ों की संपत्ति और आलीशान जीवन
आलोक सिंह ने लखनऊ के सुल्तानपुर रोड पर धनंजय सिंह के घर के सामने महलनुमा मकान बनवाया है, जिसकी कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये बताई जाती है। वह कई लग्जरी एसयूवी के साथ चलते हैं और जौनपुर की वोटर लिस्ट में उनका पता धनंजय सिंह के घर से जुड़ा हुआ दर्ज है। सूत्रों के अनुसार, आलोक सिंह पूर्व सांसद का दाहिना हाथ माना जाता है।
विवादों से पुराना रिश्ता
करीब 20 साल पहले आलोक सिंह सोना लूट कांड में बर्खास्त किए गए थे, हालांकि बाद में बरी हो गए। इसके बाद भी वह लगातार विवादों में बने रहे। पुलिस को कई बार उन्होंने अंडरवर्ल्ड से जुड़ी अहम सूचनाएं दीं, जिसके कारण उन पर कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह रही कि उनका प्रभाव अंडरवर्ल्ड में लगातार बढ़ता गया।
तिकड़ी का नेटवर्क
इस मामले में धनंजय सिंह का सीधा संबंध तीन आरोपियों – शुभम सिंह, अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह – से बताया जा रहा है। आलोक सिंह एक एमएलसी का भी करीबी है। सूत्रों के अनुसार, पूर्वांचल के कई माफिया आलोक के जरिए शुभम सिंह में हिस्सेदारी कर रहे थे।
विकास सिंह विक्की और काली कमाई
जौनपुर के विकास सिंह विक्की, जो शुभम जायसवाल, अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह के करीबी हैं, सिंडीकेट की काली कमाई को रियल एस्टेट में निवेश कर रहे थे। एक पूर्व ब्यूरोक्रेट ने विकास के जरिए लखनऊ में बेशकीमती संपत्तियां खरीदीं। ईडी ने इस पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
ईडी और एसटीएफ की जांच
कफ सिरप सिंडीकेट में कई माफिया की हिस्सेदारी की जांच प्रवर्तन निदेशालय और एसटीएफ कर रही हैं। एजेंसियां कंपनियों के संदिग्ध लेन-देन की पड़ताल में जुटी हैं। ईडी की टीम ने राजधानी में एक माफिया के घर की रेकी की है, जबकि प्रयागराज यूनिट की टीम वाराणसी में आरोपियों से जुड़े केस और जानकारियां जुटा रही है। जल्द ही मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर बड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
शराब कारोबार और बिहार कनेक्शन
जांच में यह भी सामने आया है कि शुभम जायसवाल शराब का कारोबार करता था। वाराणसी के कुछ माफिया से संपर्क के बाद उसने बिहार में शराब की तस्करी शुरू की। बिहार में शराबबंदी के कारण उसे भारी मुनाफा हुआ। इस कारोबार में उसका संपर्क बिहार के एक विधायक (वर्तमान में मंत्री) से कराया गया, जो सीमा पर पकड़ी गई शराब की खेप छुड़ाने में मदद करता था।
जांच एजेंसियों के लिए चुनौती
कफ सिरप सिंडीकेट और शराब तस्करी का नेटवर्क पूर्वांचल से लेकर बिहार तक फैला हुआ है। इसमें राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण की भूमिका भी सामने आ रही है। ईडी और एसटीएफ के लिए यह जांच बड़ी चुनौती है क्योंकि इसमें कई स्तरों पर माफिया और नेताओं का गठजोड़ उजागर हो रहा है।
आलोक सिंह का सफर एक बर्खास्त सिपाही से अंडरवर्ल्ड के बड़े खिलाड़ी तक का है। धनंजय सिंह से करीबी संबंधों ने उन्हें अपराध जगत में ताकतवर बना दिया। करोड़ों की संपत्तियां, लग्जरी जीवन और माफिया से जुड़ाव ने उन्हें जांच एजेंसियों के रडार पर ला दिया है। ईडी और एसटीएफ की कार्रवाई से आने वाले दिनों में इस सिंडीकेट का बड़ा खुलासा हो सकता है।
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