चंदौली की बेटी अनामिका ने जापान की क्यूशू यूनिवर्सिटी से हासिल की PhD,जिले का बढ़ाया मान
चंदौली के सदर ब्लॉक के मैढ़ी गांव की बेटी अनामिका ने जापान की प्रतिष्ठित क्यूशू यूनिवर्सिटी फुकुओका से अनुप्रयुक्त रसायन में PhD हासिल कर जिले और देश का गौरव बढ़ाया। 25 सितंबर को उपकुलपति से उपाधि प्राप्त की।
चंदौली के मैढ़ी गांव की अनामिका ने बढ़ाया जिले का मान
जापान की क्यूशू यूनिवर्सिटी से अनुप्रयुक्त रसायन में PhD
25 सितंबर को विश्वविद्यालय के उपकुलपति से मिली उपाधि
प्रारंभिक शिक्षा गांव के मालवीय विद्या मंदिर से हुई
DRDO वैज्ञानिक चाचा बचऊ प्रसाद का रहा विशेष मार्गदर्शन
चंदौली जिले के सदर ब्लॉक के मैढ़ी गांव की प्रतिभाशाली बेटी कुमारी अनामिका ने जापान की प्रतिष्ठित क्यूशू यूनिवर्सिटी, फुकुओका से अनुप्रयुक्त रसायन विभाग में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर अपने जिले और देश का नाम रोशन किया है। अनामिका ने 25 सितंबर को विश्वविद्यालय के उपकुलपति से अपनी पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
परिवार और गांव में खुशी का माहौल
अनामिका की इस उपलब्धि से उनके परिवार, परिजनों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। उनकी सफलता से उनके गांव में भी हर्ष का वातावरण है। पूरे गांव में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना सभी के लिए गर्व की बात है।

प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से
अनामिका की प्रारंभिक शिक्षा कक्षा 1 से 7 तक उनके अपने गांव मैढ़ी स्थित मालवीय विद्या मंदिर, चंदौली से हुई है। गांव के विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली अनामिका की इस उपलब्धि से उनके विद्यालय के गुरुजनों में भी खुशी का माहौल है। शिक्षकों ने उनकी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। शिक्षकों का कहना है कि अनामिका शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थी और उसकी लगन आज रंग लाई है।
DRDO वैज्ञानिक चाचा का रहा मार्गदर्शन
कुमारी अनामिका को इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके चाचा बचऊ प्रसाद का विशेष सहयोग और मार्गदर्शन रहा है। बचऊ प्रसाद हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में वैज्ञानिक पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अनामिका को निरंतर प्रोत्साहित किया और उनकी शैक्षणिक और शोध यात्रा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
25 सितंबर को जापान में कुमारी अनामिका के साथ उनके चाचा बचऊ प्रसाद की पत्नी और अनामिका की चाची ज्योत्सना रवि भी मौजूद रहीं। इस अवसर पर परिवार के लिए यह उपलब्धि बेहद गौरव और खुशी का क्षण रहा।
जापान और भारत के वैज्ञानिकों का योगदान
अनामिका की शोध और शैक्षणिक यात्रा में जापान और भारत के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके मार्गदर्शन में डॉ. सोजि शिमिज़ु, एसोसिएट प्रोफेसर, अनुप्रयुक्त रसायन विभाग, अभियांत्रिकी स्नातकोत्तर विद्यालय, क्यूशू यूनिवर्सिटी, फुकुओका, जापान और डॉ. ताकानोरी इवासाकी, प्रोफेसर, अनुप्रयुक्त रसायन विभाग, अभियांत्रिकी स्नातकोत्तर विद्यालय, क्यूशू यूनिवर्सिटी, फुकुओका, जापान का नाम प्रमुख है। इन दोनों प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और सहयोग का कुमारी अनामिका की शैक्षणिक और शोध यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा
कुमारी अनामिका ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर जापान की प्रतिष्ठित क्यूशू यूनिवर्सिटी से अनुप्रयुक्त रसायन के क्षेत्र में पीएचडी की उपाधि हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि उनके परिवार के साथ-साथ उनके जिले, गांव और देश के लिए भी गर्व का विषय है।
अनामिका की सफलता इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा, कठिन परिश्रम, उचित मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प के साथ भारतीय विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। गांव के विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर जापान की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से पीएचडी हासिल करना क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है।
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