FIR और आदेश के पन्नों में गुम हुई रोहित केशरी की तलाश, 4 महीने से फेल है बबुरी पुलिस, सांसद और विधायक के आश्वासन कोरे
बबुरी कस्बे के कपड़ा व्यवसाई रोहित केशरी 27 सितंबर से रहस्यमय ढंग से लापता हैं। चार महीने बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों के बावजूद जांच की सुस्ती ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
27 सितंबर से लापता है व्यवसाई रोहित केशरी
परिजनों ने शुरू में ही जताई थी अपहरण की आशंका
पुलिस की सुस्त जांच से पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश
सांसद और विधायक की दखल के बाद भी नतीजा शून्य
नए थाना अध्यक्ष के आने पर भी नहीं दिखी सक्रियता
चंदौली जनपद के बबुरी थाना क्षेत्र से पिछले चार महीनों से लापता कपड़ा व्यवसाई रोहित केशरी का मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा दाग बनता जा रहा है। 27 सितंबर की उस मनहूस तारीख के बाद से रोहित का परिवार हर गुजरते दिन के साथ अपनी उम्मीदें खो रहा है। हैरानी की बात यह है कि चार महीने बीत जाने के बाद भी जिले के आला अधिकारी और स्थानीय पुलिस यह बताने की स्थिति में नहीं है कि रोहित केशरी जीवित है या उसके साथ कोई अनहोनी हो चुकी है।
स्थानीय लोगों और परिजनों का सीधा सवाल है कि 27 सितंबर से रहस्यमय ढंग से लापता रोहित का आज तक कोई सुराग नहीं लग सका है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या जिले के कप्तान, इलाके के सीओ या बबुरी के थानेदार साहब बताएंगे कि रोहित केशरी जिंदा है या मर गया है..?...अगर जिंदा है तो उसको सकुशल बरामद करने के लिए क्या कर रहे हैं..?
आश्वासनों की भेंट चढ़ा न्याय, सिस्टम की बेबसी
रोहित की पत्नी पूजा केशरी ने न्याय पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। उन्होंने राज्यसभा सांसदों से लेकर मुगलसराय विधायक तक का दरवाजा खटखटाया। हर जगह से आश्वासन तो भरपूर मिले, लेकिन धरातल पर जांच वहीं की वहीं खड़ी है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने न तो सर्विलांस के जरिए कोई ठोस सुराग निकाला और न ही संभावित संदिग्धों से कड़ी पूछताछ की। नए थाना अध्यक्ष और चौकी प्रभारी की तैनाती के बाद जगी उम्मीदें भी अब निराशा में बदल चुकी हैं।
क्या गुमशुदगी के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
शुरुआत में परिजनों ने अपहरण की आशंका जाहिर की थी, लेकिन बबुरी पुलिस की जांच की सुस्त रफ्तार ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। कस्बे के लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर इतनी 'हाई-टेक' पुलिसिंग एक इंसान को खोजने में इतनी लाचार क्यों है? क्या रोहित केशरी का मामला भी उन अनसुलझी फाइलों का हिस्सा बन जाएगा जो धूल फांक रही हैं?
कप्तान साहब से सीधा सवाल
पीड़ित परिवार और स्थानीय जनता अब सीधे जिले के कप्तान से सवाल पूछ रही है कि आखिर जांच कब मुकम्मल होगी? एक बेबस पत्नी और बिलखते बच्चों को इंसाफ कब मिलेगा? यदि जल्द ही रोहित केशरी की सकुशल बरामदगी नहीं होती, तो पुलिस की साख पर लगा यह काला धब्बा और गहरा जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी नींद से कब जागता है।
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