चंदौली के लाल डॉ. अरविंद पांडे ने BHU में रचा इतिहास, बिना पसली की हड्डी काटे की ऐतिहासिक बायपास सर्जरी, मरीज 5 दिन में डिस्चार्ज, गरीबों के लिए जगी उम्मीद
चंदौली के कावर गांव के डॉ. अरविंद पांडे ने BHU में बिना हड्डी काटे बायपास सर्जरी कर इतिहास रचा। मरीज 5 दिन में ठीक होकर घर लौटा। पूर्वांचल समेत बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और नेपाल के गरीब मरीजों के लिए सस्ते इलाज की उम्मीद जगी।
चंदौली के लाल ने BHU में रचा इतिहास
बिना हड्डी काटे बायपास सर्जरी सफल
मरीज 5 दिन में हुआ डिस्चार्ज
गरीबों को कम खर्च में मिलेगा इलाज
पूर्वांचल, बिहार, झारखंड को होगा लाभ
चंदौली जनपद के बलुआ थाना क्षेत्र के कावर गांव निवासी प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार पांडे ने चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर चंदौली का नाम रोशन किया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कार्डियोथोरेसिक विभाग में प्रोफेसर डॉ. अरविंद पांडे की टीम ने बिना पसली की हड्डी काटे क्रोनरी आर्टरी बायपास सर्जरी (CABG) कर मरीज को महज पांच दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी। इस उपलब्धि से पूर्वांचल के साथ बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, नेपाल समेत आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण जगी है।
क्या है नई तकनीक, कैसे हुआ ऑपरेशन?
अब तक सामान्य तौर पर बायपास सर्जरी के दौरान मरीज की छाती की हड्डी को काटकर ऑपरेशन किया जाता रहा है। लेकिन डॉ. अरविंद पांडे की टीम ने कम चीरे के माध्यम से बिना हड्डी काटे यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ और पांच दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद मरीज अपने सामान्य दैनिक जीवन में लौट गया। कम चीरे वाली तकनीक में दर्द कम होता है और मरीज जल्दी ठीक होता है।
BHU की टीम ने खुद किया कारनामा
बताया जा रहा है कि BHU में इस तरह की तकनीक से सर्जरी का यह महत्वपूर्ण प्रयोग है। हालांकि इससे पहले भी विश्वविद्यालय में इस प्रकार की सर्जरी किए जाने की जानकारी है, लेकिन उस दौरान बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाकर ऑपरेशन कराया गया था। इस बार BHU के कार्डियोथोरेसिक विभाग की टीम ने डॉ. अरविंद पांडे के नेतृत्व में स्वयं इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह BHU के लिए भी गर्व का क्षण है।
गरीब और मध्यम वर्ग को होगा फायदा
इस उपलब्धि से गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों के लिए भी हृदय रोग के इलाज की उम्मीद बढ़ी है। बड़े शहरों में महंगे उपचार और अन्य खर्च वहन करना कई मरीजों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में BHU जैसे संस्थान में आधुनिक तकनीक से अपेक्षाकृत कम खर्च में उपचार उपलब्ध होना पूर्वांचल और आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब उन्हें मेट्रो शहरों में नहीं जाना पड़ेगा।
ब्लॉकेज क्यों होता है? डॉ. पांडे ने बताया
प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार पांडे ने बताया कि कोरोनरी धमनियों में वसा, कैल्शियम और अन्य पदार्थ जमा होने से ब्लॉकेज की समस्या पैदा हो सकती है। इसके कारण सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और हृदय संबंधी अन्य समस्याएं सामने आ सकती हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में चिकित्सकीय जांच के बाद आवश्यकतानुसार बायपास सर्जरी की जाती है। कम चीरे वाली तकनीक से मरीज को जल्द सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सकती है।
स्वस्थ जीवनशैली की अपील
डॉ. पांडे ने लोगों से बेहतर स्वास्थ्य के लिए खान-पान, रहन-सहन और नियमित दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय पूरे बीएचयू के साथ विभाग अध्यक्ष एवं टीम को दिया है।
जिले में खुशी का माहौल
चंदौली के छोटे से गांव से निकलकर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डॉ. अरविंद पांडे की उपलब्धि से जिले में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि यह उपलब्धि न केवल चंदौली बल्कि पूरे पूर्वांचल के लिए गर्व का विषय है।
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